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भारत में जिन बच्चों को कैंसर हुआ, ज्यादातर में थी ये बड़ी कमी, थोड़ी सी जानकारी से हो सकती है दूर

Childhood Cancer in India: भारत में बच्चों का कैंसर एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता का विषय है. यहां एक्सपर्ट्स बच्चों में जिस कमी की बात कर रहे हैं, उसे आप अपने घर में ही दूर सकते हैं, बस जानकारी लेकर बच्चे पर जरा सा ध्यान देना शुरू करना है.

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पीडियाट्रिक कैंसर केयर में कुपोषण सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है. (सांकेतिक तस्वीर: इंडिया टुडे)

भारत में एक अनुमान के मुताबिक हर साल 76,000 से अधिक बच्चे कैंसर से पीड़ित होते हैं. वहीं जिन बच्चों में कैंसर का पता चलता है, उनमें से ज्यादातर उस समय कुपोषित होते हैं. एक हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि बच्चों में कैंसर डायग्नोसिस के वक्त 57-61 फीसदी बच्चे कुपोषण के शिकार पाए जाते हैं. ये रिपोर्ट कडल्स फाउंडेशन (Cuddles Foundation) ने जारी की है. 

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कडल्स फाउंडेशन भारत में 14 राज्यों के 40 से अधिक हॉस्पिटल्स के साथ काम करते हुए कैंसर से जूझ रहे गरीब बच्चों को पोषण सहायता देता है. इस फाउंडेशन के Food Heals Report 2024 में चाइल्डहुड कैंसर केयर पर कुपोषण के खतरनाक प्रभाव और कैंसर से पीड़ित ज्यादातर बच्चों के कुपोषित होने की जानकारी दी गई है.

इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल अनुमानित तौर पर 76,000 बच्चों में कैंसर का पता चलता है. उनमें से 57% से 61% बच्चे अपना पहला न्यूट्रिशन कंसल्टेशन पाने तक कुपोषित होते हैं. 65% नये पीडियाट्रिक कैंसर पेशेंट्स अपनी रोज की जरूरी कैलोरी और प्रोटीन का आधे से भी कम उपभोग करते हैं. 

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कुपोषण के कारण ऐसे बच्चों में कैंसर ट्रीटमेंट को सहन करने की क्षमता काफी कम हो जाती है. संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इस तरह से कैंसर से जूझ रहे बच्चों के विकास और उनकी रिकवरी में बाधा आ सकती है. जटिलताएं बढ़ सकती हैं और ट्रीटमेंट के खराब नतीजे सामने आ सकते हैं. 

Cuddles Foundation की संस्थापक और CEO पूर्णोता दत्ता बहल ने कहा,

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“पीडियाट्रिक कैंसर केयर में कुपोषण सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है. अच्छा पोषण इन बच्चों को भीषण ट्रीटमेंट को सहने की शक्ति देता है. इससे उनके ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है.”

भारत में कैंसर से पीड़ित हजारों बच्चों के जिंदा रहने की दर और उनके जीवन की गुणवत्ता अपर्याप्त पोषण के कारण प्रभावित होती है. रिपोर्ट के मुताबिक ये समस्या पिछले तीन सालों से बनी हुई है. पूर्णोता दत्ता बहल ने कहा कि एकसाथ मिलकर, हम ये सुनिश्चित कर सकते हैं कि कोई भी बच्चा उचित पोषण की कमी के कारण अपनी लड़ाई न हारे. बच्चे को भरपूर पोषक तत्वों वाला आहार देकर इस कमी को दूर कर सकते हैं.

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