1. भूपेश बघेल

भूपेश बघेल प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हैं और मुख्यमंत्री के दावेदार भी.
भूपेश प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं. दुर्ग की पाटन सीट से चुनाव लड़े हैं. पांचवीं बार विधायक बन सकते हैं.
मजबूती
# कांग्रेस संगठन को मजबूत करने का श्रेय.
# सरकार विरोधी लहर को खड़ा करने में सफल रहे. सड़क पर दिखे.
# राहुल गांधी ने अगर संगठन को खुश करने की सोची तो इनका नंबर लग सकता है.
कमजोरी
# राजेश मूणत की कथित सेक्स सीडी केस में किरकिरी.
# प्रदेश के अन्य बड़े कांग्रेस नेताओं से नहीं बनती.
# पीएल पूनिया के साथ टिकट बंटवारे को लेकर खींचतान.
2. टीएस सिंह देव

टीएस सिंहदेव भी मुख्यमंत्री के दावेदार हैं.
नेता प्रतिपक्ष हैं. अंबिकापुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं.
मजबूती
# घोषणा पत्र बनाने वाली कमिटी के मुखिया.
# अच्छा घोषणा पत्र कांग्रेस को चुनाव जिताने में बड़ी वजह रहा.
# 5 साल विधानसभा में मुखर रहे.
# सबसे अमीर विधायक मगर जनता के बीच लोकप्रिय.
# स्टार प्रचारकों में सबसे आगे.
# व्यापारी इनके पक्ष में.
कमजोरी
# चुनाव से पहले ही सीएम बनने की इच्छा जताई थी. इससे गुटबाजी बढ़ी थी.
# रमन सिंह समेत विपक्ष के नेताओं के करीबी बताए जाते हैं.
3. चरण दास महंत

चरन दास महंत भी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के दावेदारों में हैं.
पूर्व सांसद हैं. पूर्व मंत्री रहे हैं और प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष हैं.
मजबूती
# पुराने कांग्रेसी. केंद्र और राज्य दोनों में मंत्री रहे.
# छत्तीसगढ़ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष.
# चुनाव के दौरान बड़े कांग्रेस नेताओं को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
# गांधी परिवार के करीबी.
कमजोरी
# पूरे प्रदेश में पकड़ नहीं.
# आरोप लगते हैं कि रायपुर और दिल्ली में रहते हैं.
4. ताम्रध्वज साहू

ताम्रध्वज साहू भी सीएम कैंडिडेट हैं.
कांग्रेस की ओबीसी विंग के अध्यक्ष हैं और छत्तीसगढ़ के इकलौते कांग्रेस सांसद हैं. इस विधानसभा चुनाव में दुर्ग ग्रामीण से चुनाव लड़ रहे हैं.
मजबूती
# ओबीसी वर्ग खासकर बहुसंख्यक साहू समाज को साधकर रखा.
# साफ छवि और प्रदेश के बड़े नेताओं के बीच विरोध नहीं.
कमजोरी
# सर्वमान्य नहीं.
# छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की वापसी में बड़ा रोल नहीं.
चुनावों के रिज़ल्ट में सबसे ज़्यादा खराब हालत रमन सिंह की ही हुई है























