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चंद्रयान-3 अभी कहां चक्कर काट रहा? बड़ी जानकारी सामने आई है

ISRO ने बीती 14 जुलाई को सतीश धवन स्पेस सेंटर, श्रीहरिकोटा से चंद्रयान-3 मिशन लॉन्च किया था.

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ISRO के सूत्रों के मुताबिक चंद्रयान-3 इस वक्त 38 हजार 520 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चंद्रमा की तरफ जा रहा है. (फोटो- ट्विटर)

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बीती 14 जुलाई को सतीश धवन स्पेस सेंटर, श्रीहरिकोटा से चंद्रयान-3 मिशन लॉन्च किया था. इसके 18 दिन बाद 1 अगस्त को चंद्रयान-3 ने एक उल्लेखनीय स्टेज पार कर ली. चंद्रयान-3 ने भारत की ऑर्बिट के चारों ओर अपनी परिक्रमा पूरी कर ली है. और अब वो चंद्रमा की ऑर्बिट में दाखिल होने वाला है.

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1 अगस्त को ISRO ने ट्रांसलूनर इंजेक्शन (TLI) की मदद से चंद्रयान-3 को चंद्रमा की तरफ धकेल दिया. ये ISRO के बेंगलुरू स्थित टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (ISTRAC) से किया गया. यानी चंद्रयान अब चंद्रमा की ऑर्बिट में प्रवेश करने वाला है. अगले चार दिनों में इसे चंद्रमा की ऑर्बिट में स्थापित कर दिया जाएगा. ISRO के मुताबिक लूनर ऑर्बिट इंसर्शन (LOI) 5 अगस्त के दिन किया जाएगा.

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ISRO के अनुसार वो 23 अगस्त को चंद्रयान-3 की चंद्रमा की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ कराने की कोशिश करेगा. इससे पहले पांच अगस्त को चंद्रयान चंद्रमा की पहली ऑर्बिट में प्रवेश करेगा. चांद की सतह से इस ऑर्बिट की दूरी करीब 11 हजार किलोमीटर के आसपास होगी. जिसके बाद चंद्रमा के चारों ओर पांच बार ऑर्बिट करके इस दूरी को कम किया जाएगा. और 100 किलोमीटर की दूरी पर लाया जाएगा.

रिपोर्ट्स के मुताबिक 100 किलोमीटर का ऑर्बिट 17 अगस्त तक पूरा होने की उम्मीद है. उसी दिन प्रोपल्शन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल अलग किए जाएंगे. 18 और 20 अगस्त को लैंडर मॉड्यूल की डीऑर्बिटिंग होगी. जिसे 25 अगस्त तक चंद्रमा की सतह पर लैंड किया जाएगा.

चंद्रयान-3 की रफ्तार कम नहीं हुई तो

ISRO के सूत्रों के मुताबिक चंद्रयान-3 इस वक्त 38 हजार 520 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चंद्रमा की तरफ जा रहा है. अब हर दिन इसकी गति थोड़ी-थोड़ी कम की जाएगी. चंद्रमा की ग्रैविटी पृथ्वी की ग्रैविटी से 6 गुना कम है. इसलिए चंद्रयान-3 की गति भी कम करनी पड़ेगी. चंद्रयान-3 को चांद की ऑर्बिट में पहुंचने के लिए अपनी रफ्तार 3 हजार 600 किलोमीटर प्रति घंटा करनी होगी. अगर ऐसा नहीं हुआ तो चंद्रयान-3 अगले 10 दिन का सफर कर वापस पृथ्वी की ऑर्बिट में आ जाएगा. चंद्रयान की रफ्तार कम करने के लिए इसके इंजन को विपरीत दिशा में चलाया जाएगा. इससे उसकी रफ्तार कम की जाएगी. इस प्रोसेस को डीबूस्टिंग कहा जाता है. 

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