बाएं- प्रवर्तन निदेशालय के डायरेक्टर संजय मिश्रा.
केंद्र सरकार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो CBI और प्रवर्तन निदेशालय ED के प्रमुख का कार्यकाल बढ़ाने का फैसला किया है. इसके लिए सरकार एक अध्यादेश ले आई है. अध्यादेश में कहा गया है कि सीबीआई और ईडी के निदेशकों के कार्यकाल को पांच साल तक के लिए बढ़ाया जा सकता है. अध्यादेश के अनुसार, दो साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद इन शीर्ष एजेंसियों के प्रमुखों के कार्यकाल को 1+1+1 के आधार पर बढ़ाया जा सकता है. इन अध्यादेश में कहा गया है कि पहले सीबीआई और ईडी के डायरेक्टरों की नियुक्ति दो साल के लिए होती थी. अगर सरकार चाहे तो दो साल पूरे होने पर एक-एक साल करके तीन बार इनका कार्यकाल बढ़ा सकती है. यानी पहले 2 और बाद में 3 साल, कुल मिलाकर 5 साल. पांच साल के बाद इनके कार्यकाल को और नहीं बढ़ाया जा सकता.
ED प्रमुख के रिटायरमेंट से 3 दिन पहले आया अध्यादेश
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, विनीत नारायण के प्रसिद्ध मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मद्देनजर सीबीआई और ईडी के निदेशकों की नियुक्ति की तारीख से उनका दो साल का निश्चित कार्यकाल होता है. केंद्रीय सतर्कता आयोग (संशोधन) अध्यादेश को मौजूदा प्रवर्तन निदेशालय प्रमुख एस के मिश्रा की सेवानिवृत्ति से महज तीन दिन पहले जारी किया गया है. सरकार ने उनका दो साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद 2020 में एक और सेवा विस्तार दिया था. इस मामले में इस साल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई जिसने सेवा विस्तार को रद्द नहीं किया, लेकिन सरकार से मिश्रा को 17 नवंबर के बाद और सेवा विस्तार नहीं देने को कहा. हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि अध्यादेश लागू होने के बाद देखना होगा कि मिश्रा ईडी प्रमुख के रूप में काम करते रहेंगे या नहीं. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा जारी अध्यादेश कहा गया है,
बशर्ते जिस अवधि के लिए प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक अपनी प्रारंभिक नियुक्ति पर पद धारण करते हैं, उसे सार्वजनिक हित में, खंड (ए) के तहत समिति की सिफारिश पर और लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों के लिए, एक बार में एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है.
प्रवर्तन निदेशालय वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के तहत काम करता है. इसका काम विदेशी मुद्रा से जुड़े कानूनों और मनी लॉन्ड्रिग से जुड़े मामलों का पता लगाना और उनकी जांच करना है. ईडी निदेशक की नियुक्ति केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश पर केंद्र सरकार करती है. इसके सदस्यों में सतर्कता आयुक्त, गृह सचिव, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के सचिव और राजस्व सचिव शामिल हैं.
CBI को लेकर भी आया अध्यादेश
सरकार ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन (DSPI) (संशोधन) अध्यादेश, 2021 भी जारी किया है. इस अध्यादेश में DSPI कानून में प्रावधान जोड़ा गया है,
बशर्ते जिस अवधि के लिए निदेशक अपनी प्रारंभिक नियुक्ति पर पद धारण करते हैं, उसे सार्वजनिक हित में, धारा 44 की उप-धारा (1) के तहत समिति की सिफारिश पर और लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों के लिए, एक बार में एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है. बशर्ते प्रारंभिक नियुक्ति में उल्लेखित अवधि समेत कुल पांच वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद ऐसा कोई सेवा विस्तार नहीं दिया जाएगा.
सीबीआई कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत काम करने वाली एक जांच एजेंसी है. इसका काम रिश्वतखोरी, सरकारी भ्रष्टाचार, केन्द्रीय कानूनों का उल्लंघन आपराधिक और आर्थिक मामलों की जांच करना है.सीबीआई के निदेशक का चयन प्रधानमंत्री, भारत के प्रधान न्यायाधीश और लोकसभा में विपक्ष के नेता की एक समिति की सिफारिश के आधार पर होता है.