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166 सिविल सेवा अधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज, CBI अधिकारी ने सरकारों का 'सच' बताया

लोक सेवा के नाम पर 'भ्रष्टाचार' करने में किस राज्य के सिविल अधिकारी हैं सबसे आगे?

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अधिकारियों के खिलाफ दर्ज ज्यादातर मामले भ्रष्टाचार से जुड़े हैं. (सांकेतिक तस्वीरें- इंडिया टुडे और Unsplash.com)

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने साल 2018 से अब तक कुल 166 सिविल सेवा अधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं. केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने हाल ही में सांसद सुगाता रे के सवाल का जवाब देते हुए संसद को ये जानकारी दी.

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टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक सिविल सेवा अधिकारियों के खिलाफ सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में दर्ज किए गए है. यहां 35 अधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं. दूसरे नंबर पर जम्मू कश्मीर आता है. यहां कुल 18 सिविल सेवा अधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज हैं. वहीं कर्नाटक के 14, उत्तर प्रदेश के 13, तमिलनाडु के 10 और दिल्ली के नौ अधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक 17 मार्च, 2023 तक के ये आंकड़े अलग-अलग विभाग और मंत्रालयों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर सामने रखे गए हैं. संसद में बोलते हुए राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने ये भी बताया कि ग्रुप A और B के कुल 88 सिविल सेवा अधिकारियों ने समय से पहले ही नौकरी से रिटायरमेंट ले लिया है.

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क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) के सेक्शन 197 के तहत ये नियम है कि अगर कोई भी सरकारी अधिकारी अपनी ड्यूटी के दौरान कोई भी कथित आपराधिक कृत्य करता है तो उसके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए एक सक्षम अधिकारी की पूर्व स्वीकृति लेनी होगी. इस मामले में एक CBI अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया,

“सिविल सेवा के अधिकारियों के खिलाफ जो मामले दर्ज किए गए हैं, उनमें से ज्यादातर मामले भ्रष्टाचार से जुड़े हैं. राज्य सरकार के पास इन मामलों की जांच की स्वीकृति लेने के लिए कई नोटिस अभी भी लंबित हैं.”

अधिकारी ने आगे बताया कि राज्य सरकारें इन मामलों की जांच की स्वीकृति देने में कथित रूप से देरी करती हैं. उसके मुताबिक इस बात को डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल की स्टैंडिंग कमेटी ने मार्च 2022 की एक रिपोर्ट में भी सामने रखा था. CBI अधिकारी ने कहा कि ऑल इंडिया सर्विसेज (कंडक्ट) रूल, 1968 और सेंट्रल सिविल सर्विसेज (कंडक्ट) रूल, 1964 के तहत अधिकारियों के आपराधिक कृत्यों की जांच की जाती है.

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