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गंजेड़ी बेहतर हमदर्द क्यों होते हैं?

एक रिसर्च में दावा किया गया है कि गांजे का सेवन करने वाले लोग बेहतर सहानुभूति रखते हैं. कारण भी बताए गए हैं.

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रिसर्च में 85 ऐसे लोगों को शामिल किया गया था जो नियमित गांजे का सेवन करते थे. साथ ही 51 लोग ऐसे थे जो गांजे का सेवन नहीं करते थे. (फोटो- आजतक)

गांजा. इसे Marijuana (मैरुआना), Weed (वीड), Stuff (स्टफ), माल, Pot (पॉट), और Grass (ग्रास) नाम से भी जाना जाता है. सदियों से लोग इसे इस्तेमाल करते आए हैं. इसका साइंटिफिक नाम Cannabis (कैनिबिस) है. कैनिबिस को लेकर लगातार रिसर्च चलती रहती है. साइंटिफिक कम्युनिटी में इसके सेवन से शरीर में होने वाले बदलाव और बाकी चीजों पर बहस होती रहती है. कैनिबिस को लेकर एक नया खुलासा हुआ है. जर्नल ऑफ न्यूरोसाइंस रिसर्च में छपी रिपोर्ट के मुताबिक एक रिसर्च में पता चला है कि नियमित रूप से कैनिबिस का सेवन करने वालों में ज्यादा सहानुभूति की भावना होती है.

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रिसर्च में सामने आया है कि गांजे के सेवन से ब्रेन का ‘एंटीरियर सिंगुलेट’ (वो हिस्सा जो गांजे के सेवन से प्रभावित होता है) शरीर के दूसरे हिस्सों से ज्यादा कनेक्टेड महसूस करता है. खासकर उन हिस्सों से, जो इमोशनल चीजों को सेंस करते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक रिसर्च में 85 ऐसे लोगों को शामिल किया गया था जो नियमित गांजे का सेवन करते थे. साथ ही 51 लोग ऐसे थे जो गांजे का सेवन नहीं करते थे. ये सभी लोग साइकोमेट्रिक टेस्ट में शामिल हुए थे. साथ ही 46 यूजर्स और 34 नॉन-यूजर्स को फंक्शनल मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (MRI) एग्जाम के लिए रखा गया था.

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हालांकि, रिसर्च को लेकर अभी आगे की जानकारी आना बाकी है. ‘यूनिवर्सिदाद नेशनल ऑटोनोमा डी मेक्सिको’ के विक्टर ओलाल्दे-मैथ्यू (आप इस स्टडी को कंडक्ट कराने वालों में से एक हैं) ने बताया कि ये रिसर्च गांजे के सेवन से होने वाले बदलावों को लेकर नई जानकारी सामने लाएगी. साथ ही ये सोशियोपेथी, सोशल एंग्जायटी व कई और डिसऑर्डर्स के ट्रीटमेंट के बारे में भी नई जानकारियां सामने रखेगी.

खैर ये तो हुई रिसर्च की बात. पर गांजे का दिमाग पर क्या असर पड़ता है, ये भी जान लीजिए.

दरअसल, गांजे के सेवन से होने वाले नुकसान पर ज्यादा रिसर्च मौजूद नहीं है. इसका एक बड़ा कारण तो यही है कि इसका इस्तेमाल लगभग प्रतिबंधित ही है. फिर भी हम कुछ बातें जानते हैं. जैसे अलग-अलग लोगों पर इसका अलग असर होता है. लेकिन एक बात पक्की है. कम उम्र में गांजे का सेवन करने वालों का ब्रेन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है. जब तक हम 20 साल के नहीं होते, हमारा दिमाग पूरी तरह डेवलप नहीं होता. कई स्टडीज़ में पाया गया है कि टीनएज यानी किशोरावस्था में गांजा फूंकने वालों की कॉग्निटिव एबिलिटी पर बुरा असर पड़ सकता है.

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USA की National Academies of Sciences, Engineering, and Medicine ने मैरुआना पर रिसर्च का रिव्यू किया. इसमें पाया गया कि गांजे का सेवन कुछ लोगों के लिए ख़तरनाक साबित हो सकता है. कौन लोग? वो जिन्हें सांस संबंधी समस्या है या प्रेंग्नेंट महिलाएं या वो जिनमें मेंटल हेल्थ डिसऑर्डर डेवलप होने का रिस्क हैं. यानी ये बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य को और बिगाड़ सकता है. साथ ही इसका अत्यधिक सेवन करने से इस पर निर्भरता बढ़ती है. यानी इसके बिना रहना अजीब लगता है.

National Academies के रिसर्च रिव्यू ने इसके मेडिकल बेनिफिट्स भी बताए. इस रिपोर्ट के मुताबिक़, क्रॉनिक पेन, नॉसिया, वॉमिटिंग जैसी कई दिक़्क़तों में इसके मेडिकल बेनिफिट के पुख्ता प्रमाण देखे गए हैं. दूसरी बीमारियों में भी इसके बेनिफिट बताए जाते हैं. लेकिन अभी और रिसर्च की ज़रूरत है.

(ये भी पढ़ें: घर पर भांग उगाते, गांजा बनाते और कॉलेज में बेचते थे, MBBS स्टूडेंट्स का 'कारनामा' सुन 'नशा' हो जाएगा)

*हम गांजा पीने की वकालत नहीं करते. विवेक से काम लें.*

वीडियो: गांजा को ड्रग्स की लिस्ट से हटवाने में भारत क्यों रहा UN में आगे?

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