मेरे पिता का 6 साल पहले इंतकाल हो चुका है. पुलिस ने उनके खिलाफ नोटिस भेजा है. अखबार में भी छपा है. नोटिस देने से पहले पुलिस को जांच करनी चाहिए थी कि जिन्हें नोटिस जारी किया जा रहा है वो इस दुनिया में हैं भी या नहीं. हमारे पास मृत्यु प्रमाण पत्र भी है.इसके अलावा पुलिस ने 90 वर्षीय सूफी अंसार हुसैन और 93 वर्षीय फसाहत मीर खां को भी नोटिस जारी किया है. पुलिस को इनसे शांति भंग होने का अंदेशा है. सूफी अंसार हुसैन फिरोजाबाद के जामा मस्जिद के सचिव और समाजसेवी हैं. पिछले 58 वर्ष से जामा मस्जिद की सेवा कर रहे हैं. 90 साल के हो चुके हैं. अब बीमार रहते हैं. सूफी अंसार हुसैन ने कहा,
मैं 25 दिसंबर को दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में चेकअप के लिए गया था. एक जनवरी को वापस आया हूं. अखबारों से पता चला कि पुलिस ने नोटिस जारी किया है. समझ में नहीं आ रहा है कि पुलिस ने ऐसा क्यों किया. मैंने अपना पूरा जीवन शहर में अमन के लिए समर्पित कर दिया. 90 की उम्र में मेरे साथ ऐसा हो रहा है. 20 दिसंबर को जो हुआ उस समय यहां उर्स था. मैंने सब अधिकारियों को इनवाइट भी किया था, लेकिन जाने क्यों मुझे पाबंद कर दिया गया.93 साल के फसाहत मीर खां को भी नोटिस मिला है. वो बीमार हैं. बिस्तर से उठ नहीं पाते. समाजसेवी रहे हैं. मौलाना आजाद निस्वन गर्ल्स इंटर कॉलेज के संस्थापक हैं. मीर खां के बेटे मोहम्मद ताहिर ने बताया,
दो पुलिसवाले घर आए. उन्होंने पूछा, फसाहत मीर खां यहीं रहते हैं? मैंने उन्हें बिस्तर पर पड़े पिताजी को दिखाया. पुलिसवाले कहने लगे ये तो बहुत बुजुर्ग हैं. लेकिन तीसरे दिन एक नोटिस चस्पा कर दिया. मेरे वालिद समाजसेवी हैं. उन्हें राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से मिलने का मौका मिला था. समझ में नहीं आ रहा है कि पुलिस ऐसा क्यों कर रही है.इस मामले में सिटी मैजिस्ट्रेट कुंवर पंकज सिंह का कहना है,
20 दिसंबर, 2019 को शहर में बवाल हुआ था. शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने का दबाव था. शहर के जो तमाम थाने हैं उनकी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हुई. लेकिन इस लिस्ट में कई बुजुर्गों के नाम हैं जो 90 साल के हैं. ऐसे लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी. कोई गलत नाम पाए जाने पर उसे हटाने का भी प्रवाधान है.मीडिया में खबरें आने के बाद प्रशासन लिस्ट में सुधार की बात कर रहा है. नोटिस जारी करने से पहले पुलिस ने ध्यान दिया होता तो इस तरह की छीछालेदर से बचा जा सकता था.
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