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ये नॉर्मल बात नहीं है. इसके पहले ओबामा भी आए हैं इधर. व्हाइट हाउस तो नहीं तिरंगा हो गया. लेकिन शेख मोहब्बत बिन ज़ाएद का दिल मोदी जी ने जीत लिया. अब ये न पूछना कि "एक ही तो दिल होता है सीने में मोदी जी, कितनी बार जीतोगे?" तो मोदी जी ने जीत लिया. अब बारी शेख की है. देखो वो कितना खरे उतरते हैं उम्मीदों पर.

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देखो मुद्दे की बात बताते हैं. रकम की बात. यहां सरकार का जो प्लान है. अगले 10 साल में पुल इन्फ्रास्ट्र्क्चर, रोड वगैरह बनाने में, सात हजार गांवों तक पहुंचने में, इस सबमें खर्चा लगेगा न. इस्टीमेट है लमसम डेढ़ सौ लाख डॉलर का. कितने जीरो लगेंगे इसमें कि पन्ना भर जाए. पिछले साल वित्तमंत्री अरुण जेटली चीन गए थे. तो वहां बोला था कि रेलवे, रोड, एयरपोर्ट वगैरह का काम ऑलरेडी जोर शोर से चल रहा है. सिर्फ बैंकों के बस का काम नहीं है ये. इसलिए सरकार इसमें पब्लिक के साथ प्राइवेट पार्टनरशिप पर जोर दे रही है. विदेशी इनवेस्टमेंट में भी हाथ डाला जा रहा है.

तो शेख ज़ाएद क्या हेल्प करेंगे इसमें? तगड़ा प्लान है भई. शेख ने तकरीबन साढ़े 51 खरब रुपए इनवेस्ट करने का वादा किया है इधर. अगर भाई इतना डेयरिंग दिखा रहा है तो सोचो अपन कहां पहुंच जाएंगे दस साल में. आप तो बस हाथ ऊपर करके कहो- आमीन.












