क्या किसी ने गोकशी के बहाने सांप्रदायिक दंगा कराने की प्लानिंग की थी?
'खेत में गाय के शरीर के हिस्से टंगे हुए थे' फिलहाल जो घटनाक्रम सामने आ रहा है, उसमें कुछ चीजों पर शक तो होता ही है. जानवर के शरीर के हिस्से मिलने की बात पता चलने पर प्रशासन की ओर से सबसे पहले मौके पर पहुंचे थे तहसीलदार राजकुमार भाष्कर. न्यूज 18 के रौनक कुमार गुंजन ने राजकुमार से बात की.
उन्होंने बताया,
कटी हुई गाय के टुकड़े गन्ने के खेत में टंगे हुए थे. गाय की चमड़ी और उसका सिर ऐसे टांगा गया था, जैसे लोग हैंगर पर कपड़े टांगते हैं. ये बहुत अजीब है. गोकशी करने वाला कोई आदमी इस तरह उसका प्रदर्शन क्यों करेगा? उत्तर प्रदेश में जैसी स्थितियां हैं, उसे जानते हुए वो यूं डिस्प्ले में क्यों लगाएगा? मांस के टुकड़ों को यूं टांगा गया था कि वो दूर से ही नज़र आ रहे थे.
उन्होंने प्रदर्शन करना शुरू कर दिया. माहौल गर्मा गया. भीड़ जमा हो गई. फिर भीड़ ने जानवर के शरीर के टुकड़ों को ट्रैक्टर पर लादा और उसे लेकर थाने के सामने प्रदर्शन करने पहुंच गए. ये बुलंदशहर को जाने वाला हाई-वे है.
तीन दिनों के इस प्रोग्राम का आखिरी दिन था 3 दिसंबर को. यहां लाखों मुस्लिम जमा हुए थे. वहां से लौटने वाले इसी बुलंदशहर-गढ़मुक्तेश्वर हाई-वे से लौटते. ऐसा होता, तो रास्ते में उनकी मुलाकात इस भीड़ से होती. क्या ऐसे में किसी दंगे जैसी स्थिति की आशंका से इनकार किया जा सकता है? अगर ऐसा है, तो क्या ये मुमकिन नहीं कि ये सब बहुत सोच-समझकर किया गया हो.
उनकी टीम ने कोशिश भी की उन्हें अस्पताल ले जाने की. मगर भीड़ ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया.
मैं खेत के बिल्कुल पास में रहता हूं. पिछले दिन, यानी 2 दिसंबर को वहां मरी हुई गाय नहीं थी. सोमवार को ही हमें वहां जानवर के शरीर के हिस्से दिखाई दिए. मैंने किसी को भी गाय काटते हुए नहीं देखा.

ये भोला सिंह है. बुलंदशहर से बीजेपी के सांसद हैं. इनका कहना है कि पुलिस को इज्तेमा के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी.
क्या बीजेपी किसी भी तरह इस घटना का लिंक मुसलमानों से जोड़ना चाहती है? फिलहाल उत्तर प्रदेश ने इस घटना के पीछे कोई सांप्रदायिक ऐंगल होने की बात से इनकार किया है. एक तरफ पुलिस ये कह रही है, दूसरी तरफ बीजेपी के सांसद भोला सिंह हैं. उन्होंने न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा-
यहां कानून-व्यवस्था आमतौर पर सही रहती है. मगर बुलंदशहर में हुए मुस्लिमों के इज्तेमा कार्यक्रम के बारे में पुलिस को कुछ नहीं बताया गया था. पुलिस अंधेरे में थी. इसी वजह से ये सब हुआ. यही है हिंसा की वजह.मतलब जिस प्रोग्राम में 10 लाख के करीब मुस्लिम शामिल हुए. जहां तीन दिनों तक इतना बड़ा धार्मिक कार्यक्रम हुआ. उस जगह की पुलिस को इस प्रोग्राम के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी! तो फिर पुलिस और प्रशासन इज्तेमा वाली जगह पर मुस्तैद कैसे था? शहर की पुलिस फोर्स का एक बड़ा हिस्सा वहां तैनात किसने किया था? इसको क्या अंधेरे में होना कहते हैं? क्या इतनी लापरवाही से बयान देकर सांसद भोला सिंह माहौल नहीं खराब कर रहे हैं? क्या वो ये बयान देकर इस पूरी घटना का ठीकरा किसी न किसी तरह से मुस्लिमों और उनके धार्मिक कार्यक्रम पर फोड़ना चाहते हैं? वो भी तब, जब खुद बुलंदशहर पुलिस कह चुकी है कि इज्तेमा पूरी शांति के साथ हुआ.
इज्तमा में क्या होता है जिसके लिए लाखों मुस्लिम इकट्ठा होते हैं?





















