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बजट 2026: दिल्ली-बनारस समेत इन 7 रूटों पर चलेगी हाई स्पीड ट्रेनें

वित्त मंत्री ने बजट भाषण में बताया कि मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु और दिल्ली-वाराणसी, वाराणसी-सिलिगुड़ी के बीच ये हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाए जाएंगे. इनका उद्देश्य तेज, आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था तैयार करना है.

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बुलेट ट्रेन की सांकेतिक तस्वीर. (India Today)

दिल्ली से बनारस के बीच हाई-स्पीड ट्रेन चलेगी. बजट 2026 में इस बात की घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण ने कर दी है. बजट भाषण में घोषणा की गई है कि देश की चारों दिशाओं में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाए जाएंगे. सरकार का कहना है कि इन्हें “ग्रोथ कनेक्टर” के रूप में तैयार किया जाएगा.

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वित्त मंत्री ने बजट भाषण में बताया कि मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु और दिल्ली-वाराणसी, वाराणसी-सिलिगुड़ी के बीच ये हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाए जाएंगे. इनका उद्देश्य तेज, आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था तैयार करना है.

भारत में फिलहाल पहला हाई-स्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट मुंबई-अहमदाबाद के बीच बन रहा है. इस परियोजना का पहला हिस्सा, सूरत से बिलीमोरा के बीच, 15 अगस्त 2027 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है.

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इंस्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर बजट में कई महत्वपूर्ण ऐलान किए गए हैं. वित्त मंत्री ने घोषणा की कि नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे, जो पूर्व में डंकुनी को पश्चिम में सूरत से जोड़ेंगे. इसके अलावा अगले पांच सालों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग शुरू किए जाएंगे. इसकी शुरुआत ओडिशा में नेशनल वाटरवे-5 से होगी, जो तलचर और अंगुल जैसे खनिज समृद्ध क्षेत्रों को कलिंग नगर जैसे औद्योगिक केंद्रों और पारादीप व धामरा बंदरगाहों से जोड़ेगा. वाराणसी और पटना में अंतर्देशीय जलमार्गों के लिए जहाज मरम्मत का ढांचा भी तैयार किया जाएगा.

सरकार ने 2026-27 वित्त वर्ष के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) तय किया है, जो 2025-26 के 11.21 लाख करोड़ रुपये से लगभग 9% अधिक है. सड़क, हाईवे क्षेत्र रेलवे, केंद्र सरकार के कुल कैपेक्स का आधे से ज्यादा हिस्सा लेते दिख रहे हैं. 2024-25 में सड़क और राजमार्गों पर 2.85 लाख करोड़ रुपये और रेलवे पर 2.52 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. उस साल कुल पूंजीगत व्यय 10.52 लाख करोड़ रुपये था.

सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में बुनियादी ढांचे पर खर्च लगातार बढ़ाया है. 2018-19 से 2021-22 के बीच पूंजीगत व्यय में 92% की वृद्धि हुई, जो 3.07 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 5.92 लाख करोड़ रुपये हो गया. इसके बाद भी यह बढ़त जारी रही और 2025-26 में यह 11.21 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया.

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आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, बुनियादी ढांचे पर खर्च का बड़ा आर्थिक प्रभाव होता है. हर एक रुपये के निवेश से देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 2.5 से 3.5 रुपये की वृद्धि होती है. सर्वे में कहा गया है कि सड़क, रेलवे, बंदरगाह, बिजली, विमानन और डिजिटल ढांचे में बड़े पैमाने पर निवेश से कनेक्टिविटी मजबूत हुई है, क्षमता बढ़ी है और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था बेहतर हुई है, जिससे आर्थिक विकास और उत्पादकता को बढ़ावा मिला है.

वीडियो: नेहरू से लेकर मोदी तक बजट में क्या क्या बदला?

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