The Lallantop

सेशन जज ने केस का ऑर्डर एक ही पेज पर प्रिंट करा लिया, हाई कोर्ट गदगद हो गया

जस्टिस कालसन ने सेशन कोर्ट के जज की तारीफ करते हुए आगे कहा कि यह ऑर्डर कागज को फिजूल बर्बादी से बचाने का एक सफल और सराहनीय उदाहरण है. उन्होंने कागज को एक बहुमूल्य संसाधन बताया. साथ ही कहा कि कोर्ट से जुड़ी कार्यवाही में इसका इस्तेमाल समझदारी से किया जाना चाहिए.

Advertisement
post-main-image
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने कागज के कम इस्तेमाल पर सेशन कोर्ट के जज की तारीफ की. (फोटो- इंडिया टुडे)

सेशन जज ने एक ही शीट पर केस का फैसला प्रिंट करा दिया तो हाई कोर्ट गदगद हो गया. पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने इस जज की जमकर तारीफ की है. जज ने ये कोशिश की थी कि एक केस से जुड़े ऑर्डर को जहां तक संभव हो सके, एक ही कागज की शीट पर प्रिंट कराया जाए. हाई कोर्ट ने कहा कि सेशन जज की इस पहल से कागज की फिजूल बर्बादी को रोकने का भी प्रयास किया गया.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

हाई कोर्ट ने जज की तारीफ उस समय की जब एक अपहरण की याचिका पर सुनवाई हो रही थी. जस्टिस नीरजा के. कालसन ये सुनवाई कर रही थीं. लाइव लॉ के रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस कालसन ने कहा,

‘कोर्ट मामले से जुड़े ऑर्डर को खारिज करने से पहले इस बात की तारीफ करता है. जिसमें अधिकारी ने कागजों के कम से कम उपयोग करने की हर संभव कोशिश की है. केस के ऑर्डर को एक ही शीट पर प्रिंट करने की कोशिश की गई. जिसे सभी कोर्ट्स को करना चाहिए.’

Advertisement

जस्टिस कालसन ने लुधियाना के एक सेशन कोर्ट के जज की तारीफ करते हुए आगे कहा कि यह ऑर्डर कागज को फिजूल बर्बादी से बचाने का एक सफल और सराहनीय उदाहरण है. उन्होंने कागज को एक बहुमूल्य संसाधन बताया. साथ ही कहा कि कोर्ट से जुड़ी कार्यवाही में इसका इस्तेमाल समझदारी से किया जाना चाहिए.

हाई कोर्ट में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (ICDC, 2023) की धारा 528 के तहत एक याचिका दायर की गई थी. जिसकी सुनवाई कोर्ट में की जा रही थी. इस याचिका में याचिकाकर्ता ने लुधियाना के एक फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट के उस आदेश को खारिज करने की मांग की. जिसमें उसे IPC की धारा 363, 366-A और POCSO की धारा 12 के तहत अपराधी बताया गया था.

यह भी पढ़ें: योगी-मोदी के लिए रोने वाले अयोध्या के अफसर इस्तीफा वापस लेकर क्या बोले?

Advertisement

इसी ऑर्डर को सेशन कोर्ट के एडिशनल सेशन जज ने जारी किया था. जिसमें उन्होंने कम से कम कागज की शिट के इस्तेमाल की कोशिश की. साथ ही एक ही शीट पर ज्यादा से ज्यादा फैक्ट्स रखने की कोशिश की थी. 

बता दें कि हाई कोर्ट ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की. कोर्ट ने पाया की सेशन कोर्ट यह साबित नहीं कर पाया कि याचिकाकर्ता गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार या छिप गया था. जो कि ऑर्डर पास करने की एक जरूरी शर्त है.

वीडियो: Budget 2026: बजट में STT का ऐलान होते ही क्यों गिरा शेयर मार्केट?

Advertisement