वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट पेश किया. इसमें अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के बजट में बड़ी कटौती की गई है. 2023-24 के लिए मंत्रालय को 3097 करोड़ रुपए का बजट मिला है, जबकि 2022-23 में ये राशि 5020 करोड़ रुपए थी. यानी बजट में 38 फीसद की कटौती हुई है.
अल्पसंख्यकों के बजट में बड़ी कमी, ओवैसी ने सरकार को 'सबका विकास' वाला ताना मार दिया
पिछले साल कितना फंड आवंटित हुआ था?


प्रोफेशनल और टेक्निकल कोर्सेस के लिए मेरिट-कम मीन्स स्कॉलरशिप के बजट में 87% की कटौती हुई है. पिछली बार के 365 करोड़ रुपए की तुलना में इस बार केवल 44 करोड़ रुपए ही अलॉट किए गए हैं. प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप के बजट में भी 992 करोड़ रुपए की कमी आई है. इस स्कॉलरशिप के लिए 433 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं. प्रधानमंत्री जनविकास कार्यक्रम के लिए पिछली बार 1650 करोड़ रुपए जारी किए गए थे, लेकिन इस बार 600 करोड़ रुपए अलॉट हुए हैं.
हालांकि, पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप का बजट 100 फीसद से भी ज्यादा बढ़ाया गया है. पिछली बार जहां इस स्कीम के लिए 515 करोड़ रुपए जारी किए गए थे, वहीं इस बजट में 1065 करोड़ रुपए जारी हुए हैं.
अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में पहली बार पीएम विरासत का संवर्धन (PM VIKAS) योजना के लिए 540 करोड़ रुपए का फंड जारी किया गया है. इसके तहत कौशल विकास और ट्रेनिंग से संबंधित काम होंगे.
वित्त वर्ष 2022-23 के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय को 5020 करोड़ रुपए का बजट मिला था. हालांकि, बाद में इसे कम कर 2612 करोड़ रुपए कर दिया गया था. इसके पीछे वजह बताई गई कि मंत्रालय 2600 करोड़ रुपए ही खर्च कर पाया था. यानी मौजूदा फंड पिछले वित्त वर्ष के शुरुआती आवंटन से जहां करीब 2000 करोड़ रुपए कम है, वहीं उसी साल हुए रिवाइज्ड फंड से 400 करोड़ रुपये ज्यादा है.
इससे पहले सरकार ने प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया घटा दिया था. इसके तहत पहली से आठवीं तक के स्टूडेंट्स को इस योजना से बाहर कर दिया गया था. इसके पीछे तर्क दिया गया कि शिक्षा के अधिकार कानून के तहत इन कक्षाओं के छात्र पहले से ही मुफ्त शिक्षा पा रहे हैं. अब इस स्कॉलरशिप स्कीम में केवल 9वीं और 10वीं के छात्र ही आवेदन कर सकते हैं.
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में कटौती पर सरकार को घेरा है. उन्होंने कहा,
“मंत्रालय के बजट में 40 फीसद की कटौती की है. शायद पीएम मोदी के हिसाब से गरीब अल्पसंख्यक बच्चों को सरकार के प्रयास की जरूरत नहीं है. सबका विकास जैसे नारे ही काफी है.”
2006 में केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यक मंत्रालय का गठन किया था. इसका पहला बजट 144 करोड़ रुपए था, जो 2022-23 तक बढ़कर 5020 करोड़ रुपए हो गया था.
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