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मुबारक हो! नई नोटों की पहली रिश्वत दी जा चुकी है

काश नोट में जीपीएस वाली चिप लगी होती.

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फोटो - thelallantop
मेरा देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है. और इसी क्रम में बदलाव की पहल नोटों के सेक्टर में भी हुई. एक दिन हमारे मोदी जी टीवी पर आये और बोलने लगे  कि रात बारह बजे से 500 और 1000 की नोटें काग़ज़ का एक टुकड़ा रह जायेंगी बस. हमारे माथे पर पसीना आ गया. हमने तुरंत जेब से दो काग़ज़ के टुकड़े निकाले और पसीना पोंछ डाला. फिर आगे उनकी बात सुनी. और भी लोगों की बात सुनी. वो लोग जो कह रहे थे कि ये सब भ्रष्टाचार से निपटने के लिए किया जा रहा है. साथ ही इससे काले धन पर हाथ टाइट किया जाएगा. हमारा मन प्रसन्न. जो चाहते थे वो हो रहा था. फिर शुरू हुआ बैंक के बाहर लाइन लगाने का सिलसिला. माना कि गरमी चिलचिलाती हुई नहीं है लेकिन दो घंटे खड़े रहने पर गरमी लगने ही लगती थी. हम टी-शर्ट पहन के जाते थे. तीन दिन बाद पैसा एक्सचेंज हुआ. हम खुश. मेरा देश बदल रहा था. नोट भी. फिर एक दिन खबर मिली कि कोई अंकल एक्सपायर कर गए. लाइन में लगे लगे. हमने भगवान का शुक्रिया अदा किया. कि हम बच गए. इन सभी बातों से हमें ज़्यादा विचलित नहीं होना चाहिए. ये सब होता ही है. ग्रेटर कॉज़ को ध्यान में रखिये. बिना मूंगफली तोड़े आज तक कभी दाना मिला है क्या? ठीक उसी तरह ग्रेटर कॉज़ यानी भ्रष्टाचार पर रोक और काले धन पर मार का अहसास ही हमें ख़ूब प्रफुल्लित किये पड़ा था. और फिर! अचानक ऐसा हुआ जैसे 'कल हो न हो' में 'माही वे' गाना गाते-गाते एकदम हैप्पी-हैप्पी सेटिंग के बीच शाहरुख़ खान को दिल का दौरा पड़ने लगता है. ठीक वैसे ही एक घटना हुई. दिल टूट गया. कसम से. खबर मिली कि गुजरात में रिश्वत दी गयी है. हमने सोचा कि देखो, यहां ससुर तीन-तीन दिन लाइन में लगो, एक-दो अंकल एक्सपायर करवाओ तब जाकर पैसा मिल रहा है. वहां रिश्वत दी जा रही है. लेकिन फिर मालूम पड़ा कि ये एक्सचेंज हुई नोटों से दी गयी रिश्वत नहीं थी. ये वो पैसे थे जो नए लाये गए थे. ये कहके कि इन नोटों से भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी. गुजरात में 2 पोर्ट ट्रस्ट ऑफिसर्स 2.5 लाख की रिश्वत लेते हुए पकड़े गए. एनडीटीवी से मालूम चला कि उनमें से एक के घर से 40,000 रूपया और मिला. मुद्दे की बात ये कि ये पूरा का पूरा 2 लाख 90 हज़ार रूपया 2000 की नयी नोटों में था.  यानी कुल 145 नोटें. मात्र 145 नोटों में 3 लाख में 10 हज़ार कम. इसके साथ ही देखने वाली बात ये है कि खाते में से एक हफ़्ते में मात्र 10,000 रुपये निकाले जा सकते थे. मंडे से ये रकम बढ़ाकर 24,000 कर दी गयी थी. ऐसे में 2 लाख 90 हज़ार के लिए कितने खाते इस्तेमाल किये गए, अभी तक नहीं मालूम चल पाया है. खाते इस्तेमाल भी किये गए या नहीं, ये भी मालूम करना चाहिए. कह रहे हैं कि नयी नोट में कई ऐसे फ़ीचर्स हैं जिनसे आप इन नोटों की नक़ल नहीं कर सकते हैं. लेकिन इनसे रिश्वत कैसे बंद की जाए. काश वो खबर सही होती जिसमें कहा गया था कि इन नोटों में एक चिप लगी हुई है जो 120 मीटर ज़मीन के अन्दर से भी सिग्नल भेज देगी. और अगर बल्क में इकट्ठी होंगी तो लोकल पुलिस के पास फ़ोन चला जायेगा. काश!

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