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फ़्लाइट में बच्चे को सांस नहीं आ रही थी, IAS और डॉक्टर ने मिलकर कमाल कर दिया!

फ्लाइट में अचानक से एक बच्चे को सांस लेने में दिक्कत होने लगी. मदद के लिए अनाउंसमेंट हुआ, तो पता चला कि IAS डॉ. नितिन कुलकर्णी और रांची सदर अस्पताल के एक डॉक्टर मौजूद हैं.

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बच्चे को जन्म से ही दिल की बीमारी थी. (फ़ोटो/इंडिया टुडे/unsplash.com)

30 सितंबर को इंडिगो की एक फ्लाइट रांची से दिल्ली आ रही थी. फ्लाइट में अचानक से एक बच्चे को सांस लेने में दिक्कत होने लगी. बच्चे को जन्म से ही दिल की बीमारी थी. फ्लाइट में बच्चे की मदद के लिए अनाउंसमेंट हुआ, तो पता चला कि फ़्लाइट पर दो डॉक्टर मौजूद हैं. दोनों ने मिलकर फ्लाइट में ही बच्चे का इलाज किया और उसकी जान बचा ली.

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NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक बच्चे के माता-पिता इलाज के लिए ही उसे दिल्ली के AIIMS ला रहे थे. लेकिन फ्लाइट के उड़ान भरने के 20 मिनट बाद ही बच्चे को सांस लेने नें दिक्कत होने लगी. फिर फ्लाइट के पॉयलट ने आपातकालीन घोषणा की और पूछा कि अगर फ्लाइट में कोई डॉक्टर है? उसी समय IAS अधिकारी और ट्रेनिंग से डॉक्टर नितिन कुलकर्णी और रांची सदर अस्पताल के डॉ मोजम्मिल मदद के लिए आगे आए. उन्होंने बच्चे को वयस्कों के लिए बने ऑक्सीजन मास्क दिया. और ज़रूरी दवाएं दीं. इससे बच्चे को ऑक्सीजन सपोर्ट मिला. एक घंटे बाद फ्लाइट लैंड हुई, तो मेडिकल टीम ने बच्चे को अपनी देखरेख में लिया.

डॉक्टर्स ने क्या कहा?

NDTV से बातचीत के दौरान डॉ. कुलकर्णी ने कहा कि बच्चे की मां रो रही थी. क्योंकि उनका बच्चा सांस लेने के लिए हांफ रहा था. कहा, 

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“मैंने और डॉ. मोजम्मिल ने बच्चे की देखभाल की. ​​एक वयस्क ऑक्सीजन मास्क के जरिए बच्चे को ऑक्सीजन सपोर्ट दिया. ऐसा इसलिए किया क्योंकि फ्लाइट में बच्चों के लिए मास्क या कैनुला उपलब्ध नहीं था.”

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डॉ. कुलकर्णी ने आगे बताया कि बच्चे को दवाओं की किट से थियोफाइलिन इंजेक्शन दिया गया और माता-पिता के पास भी इंजेक्शन डेक्सोना था. इससे इलाज में उन्हें काफी मदद मिली. 

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नोट: पेटेंट डक्टस आर्टीरियोसस (PDA) दिल से निकलने वाले ख़ून की दो नसों के बीच का छेद है. छोटे पीडीए के कोई लक्षण नहीं होते. लेकिन अगर गंभीर हो जाए, तो ख़ुराक में कमी, स्वास्थ्य गिरना या सांस लेने में दिक़्क़त हो सकती है. ऐसे कोई भी लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.

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