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इस एक अकेली स्कीम के दम पर मोदी जीत सकते हैं 2019 का चुनाव

ये हुआ तो इतने वोट गिरेंगे, इतने वोट गिरेंगे कि गिनने वाली EVM परेशान हो जाएंगी.

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मोदी सरकार की ये नई स्कीम 2019 और उससे पहले होने वाले चुनाव में फायदेमंद साबित हो सकती है.
बीजेपी ने यूपी, गुजरात जैसे बड़े राज्य जीतकर साल 2017 तो अपने पाले में गिरा लिया. मगर अब हो गया है हैप्पी न्यू ईयर. माने 2018. और इस साल भी चुनौतियां कम नहीं हैं. कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे बड़े राज्य दांव पर लगे हैं. साल के अंत तक ये चुनाव होने हैं. और इन चुनावों के ठीक बाद यानी 2019 में होगा सबसे बड़ा इम्तेहान. लोकसभा चुनाव. जाहिर सी बात है इन चुनावों में केंद्र की बीजेपी सरकार अपनी पुरानी स्कीमों के सहारे नहीं उतरेगी. उसे चाहिए कुछ नया. एकदम मारक. जिससे लोगों का भी भला हो जाए और उसका भी. और अब लग रहा है कि बीजेपी ने ये संजीवनी खोज निकाली है. बात कर रहे हैं सोशल सिक्योरिटी स्कीम की. इसके तहत गैर संगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों को फायदा पहुंचाया जाएगा. फिलहाल तो ये पाइपलाइन में है, मगर 2018 के अंत तक इसके शुरू हो जाने की उम्मीद है. आपको बताते हैं क्या है इस स्कीम में-
# योजना का ब्लूप्रिंट श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने तैयार किया है. योजना के तहत उन मजदूरों को फायदा मिलेगा जो EPFO (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) और ESIC (कर्मचारी राज्य बीमा निगम) के दायरे में नहीं आते हैं.
असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों को इस योजना से काफी फायदा होगा.
असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों को इस योजना से काफी फायदा होगा.

# योजना में कवर होने वाले गैर संगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों को अनिवार्य पेंशन, विकलांगता और मृत्यु का बीमा दिया जाएगा. इसके साथ ही उन्हें मेडिकल और मैटरनिटी कवरेज दिया जाएगा. बेरोजगारी के दौरान भत्ते की भी व्यवस्था इसके तहत की जाएगी.
# सवाल उठता है कि इस योजना के लिए फंड का इंतजाम कैसे होगा. तो इसके लिए केंद्र सरकार राज्यों से बात कर रही है. पैसा देने का सिस्टम कुछ ऐसा रहेगा कि इपीएफओ और ईएसआई का आधा पैसा जैसे संगठित क्षेत्रों के कर्मचारी देते हैं और आधा कंपनी. वैसे ही इन मजदूरों की कंपनी आधा पैसा देंगी और आधा पैसा सरकारें देंगी.
# स्कीम के एक प्रस्ताव पर मजदूर संगठनों की नाराजगी भी है. इसके तहत 300 कर्मचारियों वाली कंपनी कभी भी बंद हो सकती है, वो भी बिना सरकार को बताए. अब तक ऐसा सिर्फ 100 कर्मचारियों वाली कंपनी ही कर सकती है.
# नैशनल सैंपल सर्वे ऑर्गनाइजेशन ने 2011-12 में एक सर्वे किया था. इसमें पाया गया था कि देश के 47.41 करोड़ कर्मचारियों में से 39.14 करोड़ यानी करीब 83% गैर संगठित क्षेत्र में काम करते हैं. इनको पीएफ और ईएसआई जैसी कोई सोशल सिक्योरिटी नहीं मिलती थी. पर ये नई स्कीम इनको मजबूती देगी.
ये स्कीम अगर समय से लागू हो गई तो अगले चुनाव में बीजेपी की बल्ले-बल्ले हो सकती है.
ये स्कीम अगर समय से लागू हो गई तो अगले चुनाव में बीजेपी की बल्ले-बल्ले हो सकती है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 में सत्ता में आने के बाद एनडीए सरकार ने 44 श्रम कानूनों को मजबूत करने की घोषणा की थी. और ये स्कीम इस दिशा में बड़ा कदम है. 2018 में अगर ये स्कीम लागू हो जाती है तो बीजेपी को आने वाले चुनावों में इसका फायदा मिल सकता है. कारण है इतना बड़ा मास जो इससे फायदा पाएगा. ऐसे करीब 39 करोड़ से ज्यादा लोग हैं, जिन्हें सोशल सिक्योरिटी मिलेगी. हालांकि अभी ये स्कीम पाइपलाइन में है. लेबर मिनिस्ट्री ने इसका ड्राफ्ट कोड अपनी वेबसाइट पर भी डाल रखा है. लागू होते-होते इसमें क्या और सुविधाएं बढ़ती या घटती हैं, ये भी दिखने वाला होगा. और सबसे जरूरी बात, इसका फायदा जरूरतमंद लोगों को मिलता है या नहीं.


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