साध्वी प्रज्ञा पर गंभीर आरोप हैं.
मुंबई हमले में शहीद हुए हेमंत करकरे को लेकर दिए गए विवादित बयान को साध्वी प्रज्ञा ने वापस ले लिया है. उनके बयान की हर तरफ आलोचना हो रही थी. बीजेपी ने भी उनका व्यक्तिगत बयान बताते हुए किनारा कर लिया था. कांग्रेस ने साध्वी के बयान को शहीदों का अपमान बताते हुए बीजेपी पर हमला किया था. इसके बाद प्रज्ञा ने माफी मांगते हुए अपना बयान वापस ले लिया. साध्वी प्रज्ञा ने कहा,
मेरे बयान से देश के दुश्मनों का फायदा हो रहा है. इसलिए मैं अपने बयान वापस ले रही हूं. साथ ही मैं माफी मांगती हूं. यह मेरे व्यक्तिगत दुख था जिसे मैंने साझा किया. हेमंत करकरे दुश्मन देश के आतंकवादियों की गोलियों से मारे गए. वह निश्चित रूप से शहीद हैं.
इससे पहले साध्वी प्रज्ञा ने मुंबई हमले में शहीद हुए हेमंत करकरे को लेकर कहा था कि उन्होंने मुझे गलत तरीके से फंसाया. मैंने उनसे कहा था कि तुम्हारा पूरा वंश खत्म हो जाएगा. वो अपने कर्मों की वजह से मरे हैं. ये बयान एक जनसभा के दौरान दिया था.
हेमंत करकरे के लिए और क्या-क्या कहा था साध्वी प्रज्ञा ने?
साध्वी प्रज्ञा ने भाषण देते हुए कहा था कि
'वे जांच अधिकारी सुरक्षा आयोग के सदस्य थे. उन्होंने हेमंत करकरे को बुलाया और कहा कि साध्वी को छोड़ दो. मगर हेमंत करकरे ने कहा कि मैं कुछ भी करूंगा. सबूत लाऊंगा और साध्वी को नहीं छोड़ूंगा.'
साध्वी ने आगे कहा था कि
'ये उसकी (हेमंत करकरे की) कुटिलता थी. ये देशद्रोह था. धर्मविरुद्ध था. वो मुझसे पूछता था कि क्या मुझे सच के लिए भगवान के पास जाना होगा तो मैंने कहा था कि आपको जरूरत है तो जाइए. मैंने उससे कहा था तेरा सर्वनाश होगा. ठीक सवा महीने में सूतक लगता है. जिस दिन मैं गई थी, उस दिन इसका सूतक लग गया था. और ठीक सवा महीने में, जिस दिन आतंकवादियों ने इसको मारा, उस दिन उसका अंत हुआ.
दिग्विजय सिंह ने क्या कहा उनके आरोपों पर?
साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के आरोपों के बाद कांग्रेस नेता और भोपाल से पार्टी के उम्मीदवार दिग्विजय सिंह ने उनकी कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा कि-
चुनाव आयोग ने साफ-साफ कहा है कि सेना और शहीदों को लेकर कोई राजनीतिक बयायन नहीं दिया जाएगा. हेमंत करकरे जी ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी थे, जिन्होंने एक आतंकी हमले में मुंबई के लोगों के लिए शहादत दी.
आईपीएस एसोसिएशन ने आलोचना की
उधर, आईपीएस एसोसिएशन ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के बयान की आलोचना की है. एसोसिएशन ने कहा कि
अशोक चक्र से सम्मानित आईपीएस स्वर्गीय श्री हेमंत करकरे ने अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया. हममें से जो भी इस वक्त सेवा में है, सभी एक उम्मीदवार के बयान की निंदा करते हैं. और मांग करते हैं कि हमारे सभी शहीदों का सम्मान होना चाहिए.
भाजपा ने सफाई में क्या कहा?
साध्वी प्रज्ञा के बयान पर विवाद बढ़ने के बाद भाजपा को सफाई के लिए आगे आना पड़ा. पार्टी के मीडिया सेल के प्रमुख अनिल बलूनी की ओर से शाम को एक बयान जारी किया गया. इसमें कहा गया कि भाजपा का साफ मानना है कि हेमंत करकरे आतंकियों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए. भाजपा ने हमेशा उन्हें शहीद माना है. जहां तक साध्वी प्रज्ञा का बयान है, वो उनका निजी बयान है. जो उन्होंने सालों तक मिली शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना की वजह से दिया होगा.
हेमंत करकरे कौन थे, प्रज्ञा ठाकुर ने क्यों उनको निशाना बनाया?
26 नवंबर, 2008 को मुंबई में आतंकियों ने हमला कर दिया था. इसमें आतंकियों से लड़ते हुए करकरे के साथ दो अन्य पूलिस अधिकारी शहीद हो गए थे. 1982 में वो आईपीएस बने थे. महाराष्ट्र के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर के बाद उनको एटीएस यानी आतंक निरोधी दस्ते का चीफ बनाया गया था. 26 नवंबर, 2009 में भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया था. साध्वी प्रज्ञा की नाराजगी उनसे इस बात को लेकर है कि मालेगांव में हुए बम धमाकों की जांच हेमंत करकरे ने ही की थी. उन्होंने ही इस केस में पहली चार्जशीट दाखिल की थी. हालांकि उनकी चार्जशीट पर सवाल खड़े हुए थे. हेमंत करकरे का जन्म 12 दिसंबर, 1954 को करहड़े ब्राह्मण परिवार में हुआ था.
उम्मीदवारी पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
साध्वी प्रज्ञा का भोपाल में मुकाबला कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह से है. साध्वी की उम्मीदवारी को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं. पहले तहसीन पूनावाला ने उनकी ज़मानत रद्द करने की अपील की और अब मालेगांव धमाके के पीड़ित के पिता ने NIA की कोर्ट में याचिका दायर कर उनकी जमानत पर सवाल उठा दिए हैं. एनआईए कोर्ट में दायर की गई याचिका में कहा गया है कि साध्वी प्रज्ञा को कोर्ट ने स्वास्थ्य कारणों के चलते जमानत दी थी. ऐसे में वे भोपाल से लोकसभा का चुनाव कैसे लड़ सकती हैं.
क्या हुआ था मालेगांव में?
29 सितंबर, 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में एक मोटरसाइकिल में रखे गए बम से विस्फोट हो गया था. इसे आतंकी वारदात माना गया. इसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी. और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. प्रज्ञा ठाकुर समेत 7 लोग इस केस में आरोपी बनाए गए हैं. अक्टूबर, 2008 में प्रज्ञा ठाकुर को इस केस में गिरफ्तार किया गया था. महाराष्ट्र एटीएस ने इस केस में साध्वी को आरोपी बनाया था. बाद में ये केस राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए को सौंप दिया गया. एनआईए ने साध्वी प्रज्ञा पर लगाए गए आरोप हटा दिए थे. इसके बाद साल 2017 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने प्रज्ञा ठाकुर को जमानत दे दी थी. अब भाजपा ने प्रज्ञा ठाकुर को भोपाल से पार्टी का उम्मीदवार बनाया है.
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