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राहुल और लालू ने आगे का प्लान बता दिया, बिहार जातिगत जनगणना के बाद अब क्या करेंगे?

बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने जातिगत जनगणना के आंकड़े जारी कर दिए, इस पर BJP, JDU, RJD और Congress के नेताओं ने अब तक क्या कहा?

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राहुल ने बिहार के जातिगत सर्वे पर क्या प्रण ले लिया है? (फोटो - इंडिया टुडे)

गांधी जयंती, 2 अक्टूबर पर बिहार की नीतीश कुमार सरकार (Nitish Kumar) ने जातिगत जनगणना (Caste Census) के आंकड़े जारी कर दिए हैं. जनगणना में संख्या का असल अनुपात सामने आते ही, राजनीतिक हलकों से बयानबाज़ी शुरू हो गई है. आरक्षण में मिले कोटे और आबादी के फ़र्क़ पर टिप्पणियां की जा रही हैं.

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जनगणना के मुताबिक़, बिहार में सबसे ज़्यादा अति-पिछड़ा वर्ग है. क़रीब, 36 फ़ीसदी. पिछड़ा वर्ग 27 फ़ीसदी है, 19 फ़ीसदी से ज़्यादा अनुसूचित जाति, 15.52 फ़ीसदी सवर्ण (अनारक्षित वर्ग), और 1.68 फीसदी अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या है.

सबसे पहले राहुल गांधी का बयान पढ़िए. राहुल ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया है -

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"बिहार की जातिगत जनगणना से पता चला है कि वहां OBC + SC + ST 84% हैं. केंद्र सरकार के 90 सचिवों में सिर्फ़ 3 OBC हैं, जो भारत का मात्र 5% बजट संभालते हैं! इसलिए, पूरे भारत के जातिगत आंकड़े जानना ज़रूरी है. जितनी आबादी, उतना हक़ - ये हमारा प्रण है."

कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने भी कहा कि UPA-2 सरकार ने जातिगत जनगणना करवाई थी, लेकिन नतीजे मोदी सरकार ने इसके जारी नहीं किए. सामाजिक सशक्तिकरण को मज़बूत करने और सामाजिक न्याय को आगे बढ़ाने के लिए ऐसी जनगणना बहुत ज़रूरी हो गई है.

‘सामाजिक न्याय’ की राजनीति करने वाले लालू यादव ने क्या कहा? लिखा कि बीजेपी की साज़िशों, क़ानूनी अड़चनों और तमाम षड्यंत्र के बावजूद सर्वे रिलीज़ किया.

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"ये आंकडे़ वंचितों, उपेक्षितों और ग़रीबों के समुचित विकास और तरक़्क़ी के लिए योजना बनाने और हाशिए के समूहों को आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व देने में देश के लिए नज़ीर पेश करेंगे. सरकार को अब सुनिश्चित करना चाहिए कि जिसकी जितनी संख्या, उसकी उतनी हिस्सेदारी हो."

लालू ने 2024 का भी माहौल सेट किया. वादा किया कि अगर 2024 में उनकी (INDIA की) सरकार बनती है, तो पूरे देश में जातिगत जनगणना करवाई जाएगी.

'अगर आए, तो ये करेंगे' वाले पुराने सूत्र पर चलने वाले लालू अकेले नहीं हैं. मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस से राज्यसभा सांसद दिगविजय सिंह ने भी अपनी जनता को यही कहा है:

"मैंने हमेशा इसका समर्थन किया है. अगर कांग्रेस मध्य प्रदेश में सत्ता में आती है, तो हम मध्य प्रदेश में भी जाति आधारित जनगणना कराएंगे."

आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी कहा है कि पूरे देश में जातीय जनगणना होनी चाहिए. पिछड़ों और अनुसूचित वर्ग के लोगों को अपनी आबादी के बारे में पता होना चाहिए.

भाजपा ने क्या कहा?

अभी तक भाजपा के बड़े राष्ट्रीय नेता या मंत्रियों का बयान नहीं आया है. बिहार से बयान हैं. राज्य के बीजेपी अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा,

“लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार जाति पर राजनीति करते हैं. पिछड़ा वर्ग बहुत ज़रूरी है, लेकिन नीतीश कुमार ने पिछड़ों के लिए कुछ नहीं किया है.”

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी कहा कि जाति जनगणना से केवल सूबे के ग़रीबों के बीच भ्रम फैलेगा, और कछ नहीं होगा. उन्होंने कहा कि नीतीश और लालू को अपने शासनकाल का रिपोर्ट कार्ड देना चाहिए था. नीतीश कुमार ने 18 साल और लालू यादव ने 15 साल तक राज्य पर शासन किया, लेकिन राज्य का विकास नहीं किया.

लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख चिराग पासवान ने भी कहा कि नीतीश कुमार की पार्टी जद(यू) बिहार के लोगों को बांटने की कोशिश कर रही है.

भारतीय जनता पार्टी ने जातिगत जनगणना का कभी खुलकर विरोध नहीं किया. जून, 2023 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि प्रशासनिक, क़ानूनी और तकनीकी वजहों से राष्ट्रीय जनगणना के दौरान जाति सर्वेक्षण करना बेहद चुनौतीपूर्ण है.

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