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पुलिस ने धरा 854 करोड़ रुपए का फ्रॉड, बेनाम कंपनी बनाकर कौन चूना लगा रहा था?

84 बैंक खातों में 854 करोड़ रुपये और एक बेडरूम का घर कैसे बन गया साइबर क्राइम हब?

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धोखाधड़ी के नेटवर्क के लिए ऑफिस तक खोला हुआ था. (फ़ोटो/सांकेतिक/इंडिया टुडे)

बेंगलुरु के येलहंका इलाक़े में एक बेडरूम का मकान था. इसमें मनोज श्रीनिवास और फणींद्र के रहते थे. मनोज, MBA ग्रेजुएट और फणींद्र, सॉफ्टवेयर इंजीनियर. दो साल पहले दोनों ने बिना नाम की एक प्राइवेट कंपनी खोली. दो लोगों को काम करने के लिए रखा गया. क्या काम? कि दिन-रात 8 फ़ोन चालू रहें. बस. 

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पिछले महीने बेंगलुरु साइबर क्राइम पुलिस ने मनोज, फणींद्र और इन दोनों कर्मचारियों - श्रीनिवास और सोमशेखर - समेत कुल 8 लोगों को गिरफ़्तार किया है. इनपर आरोप हैं कि इन्होंने 854 करोड़ रुपये का फ्रॉड किया है.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, 26 साल की एक महिला ने 8.5 लाख रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करवाई थी. महिला का कहना था कि उसे छोटे इन्वेस्टमेंट करने का लालच दिया गया. पहले एक ऐप पर, बाद में एक वॉट्सएप ग्रुप पर. पुलिस ने जांच की तो पता चला कि एक बेडरूम के घर में धोखाधड़ी का एक बड़ा नेटवर्क चल रहा था. सोशल मीडिया पर लोगों को बढ़िया रिर्टन देने का लालच देकर धड़ल्ले से फ्रॉड किया जा रहा था.

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854 करोड़ रुपये और 84 बैंक खाते

रिपोर्ट के मुताबिक़, गिरोह की जांच से पता चला कि पिछले दो सालों में 84 बैंक खातों के ज़रिए 854 करोड़ रुपये का लेन-देन किया गया है. जब साइबर क्राइम पुलिस ने सितंबर में इन खातों का पता लगाया और इन्हें फ्रीज किया, तो उनमें केवल 5 करोड़ रुपये बचे थे. इन सभी पैसों को गेमिंग ऐप्स, यूएसडीटी जैसी क्रिप्टोकरेंसी, ऑनलाइन कैसीनो और पेमेंट गेटवे में ट्रांसफर कर दिया गया था.

पुलिस का कहना है कि जिन लोगों को पैसे ट्रांसफ़र किए गए हैं, वो दुबई से ऑपरेट कर रहे हैं. वो कथित तौर पर चीनी ऑपरेटरों से भी जुड़े हुए हैं. पुलिस ने अभी दुबई में रह रहे ऑपरेटरों को नहीं पकड़ा है. 

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पुलिस ने नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर बेंगलुरु में साइबर अपराध से जुड़े बैंक खातों की तलाश की, तो मालूम पड़ा कि पूरे भारत में ऐसे कुल 5,013 मामले थे. कर्नाटक के अलावा कुछ हैदराबाद में भी थे. हैदराबाद में 15,000 लोगों से 712 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई थी. हैदराबाद वाले मामलों की जांच में एक टेरर-फंडिंग लिंक भी पाया गया है. चूना लगा कर पाए गए पैसे को कथित तौर पर लेबनानी हिजबुल्लाह समूह से जुड़े क्रिप्टो वॉलेट में भेजा गया था.

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गैंग वॉट्सएप और टेलीग्राम के ज़रिए लोगों को फंसाता है. एक पुलिस अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया,

“शुरुआत में लोगों को 1,000 से 10,000 रुपये तक की छोटी रकम इन्वेस्ट करने के लिए कहा जाता था और लालच दिया जाता था कि छोटी सी इनवेस्टमेंट से वो हर दिन एक से पांच हज़ार रुपये तक का प्रॉफिट कमा सकते हैं.”

पुलिस ने जांच में फ़र्ज़ी कंपनी बैंगलरू की ‘सुब्बू एंटरप्राइज़ेज़’, तमिलनाडु में ‘दिव्या एंटरप्राइज़ेज़’ से जुड़े 45 बैंक खातों का खुलासा किया है. इन कंपनियों के लिए कोई कर्मचारी या कार्यालय नहीं थे. वे शेल कंपनियां हैं.

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पुलिस ने इस केस में दो मुख्य आरोपियों - मनोज श्रीनिवास और बैंक अकाउंटेंट वसंत कुमार - को गिरफ़्तार किया है. लेकिन ज़मानत की सुनवाई के दौरान दोनों का कहना है कि उन्हें पुलिस ने झूठा फंसाया है. दावा किया कि पुलिस में शिकायत उनके दोस्तों ने करवाई. वो भी तब, जब उन्होनें दोस्तों को पैसे देने से मना कर दिया था. आरोपियों को एक केस में 30 सितंबर को ज़मानत मिल गई थी. मगर दूसरे केसों में आरोपी दो सालों से अभी भी हिरासत में हैं. 

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