करोड़ों लोगों के चहेते नारे को कंपनी ने पिछवाड़ा पोंछने के काम में लगा दिया
जिस नारे ने करोड़ों लोगों को हिम्मत दी, उसको कंपनी ने टॉइलेट पोंछने के लिए इस्तेमाल कर लिया.
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ब्लैक ऐंड ब्यूटीफुल कोई आम नारा नहीं है. अश्वेतों के राजनैतिक और सामाजिक अधिकार हासिल करने के संघर्ष में इस नारे की बहुत खास भूमिका रही है. ये नारा अश्वेतों के आत्मविश्वास का प्रतीक है.
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मेरा एक सपना है. कि एक दिन मेरे चारों बच्चे ऐसे मुल्क में सांस लें, जहां उनकी चमड़ी का रंग देखकर लोग उनके बारे में राय न बनाएं. उनके कर्म और उनका चरित्र ही उन्हें परखने का पैमाना बने. : मार्टिन लूथर किंग जूनियरमां-बाप बच्चों के लिए कैसे-कैसे सपने देखते हैं. बड़े-बड़े. मेरा बच्चा ये बनेगा. वो बनेगा. और एक बाप सपना देख रहा था. इतना बुनियादी. कि उसके बच्चे को इंसान समझा जाए. बराबरी दी जाए. कितनी स्वाभाविक सी बात थी, लेकिन इसका भी सपना देखना पड़ रहा था. ये सपना बस मार्टिन लूथर किंग की आंखों का सपना नहीं था. दुनियाभर के लाखों-करोड़ों अश्वेतों ने ये सपना देखा. इसे हासिल करने के लिए जान लगा दी. काले-गोरे की ये लड़ाई बहुत दर्दनाक थी. मगर बाजार भावनाएं कहां देखता है! 'सबसे बड़ा रुपैया' के चक्कर में किसी का दिल दुखाने से भी नहीं कतराता. ब्राजील में एक कंपनी ने ऐसा ही किया. एक ऐड के लिए लोगों की भावनाओं को ठेंगा दिखा दिया.
A gente vê racismo em tudo ou cês são convenientemente cegos? #blackisbeautiful
— Lip (@moreiralipe_) October 23, 2017
#personalvipblack
pic.twitter.com/SEaxkoxj57

ऐड में मॉडल ने अपने शरीर पर ये ब्लैक टॉइलेट पेपर लपेटे नजर आती है.
'ब्लैक इज ब्यूटीफुल' कोई साधारण स्लोगन भर नहीं है रंगभेद की लड़ाई में दुनिया ने बहुत देखा-भोगा है. चमड़े के रंग से इंसान की किस्मत तय हो जाती थी. सॉरी, हो जाती है. कोई बस गोरे रंग के सहारे बेहतर मान लिया जाता है. किसी की काबिलियत उसके काले-भूरे रंग से तय कर ली जाती है. गोरा है, तो बेहतर है. ऐसा मान लेते हैं. श्वेतों और अश्वेतों के इस संघर्ष में काले रंग वालों ने जान लगा दी. बहुत संघर्ष कर अपने लिए राह बनाई. अधिकार हासिल किए. एक टर्म था, जो इस 'अश्वेत आंदोलन' के साथ जुड़ा रहा. ब्लैक इज ब्यूटीफुल. काला रंग खूबसूरत होता है. बाकी रंगों की तरह, काले रंग में भी खूबसूरती होती है. ये 'ब्लैक इज ब्यूटीफुल' का नारा दुनियाभर के अश्वेतों के दिल के बहुत करीब है. ये उन्हें हिम्मत देता है. हौसला बढ़ाता है. यकीन दिलाता है कि वो भी सुंदर हैं.

ब्राजील में इस विज्ञापन पर काफी हंगामा हुआ. लोगों ने विरोध में सोशल मीडिया रंग दिया.
टॉइलेट पेपर के ऐड में घुसा दिया 'ब्लैक इज़ ब्यूटीफुल' ब्राजील में एक पेपर कंपनी है. सैंथर. टॉइलेट पेपर बनाती है. उसने बनाया है, काले रंग का टॉइलेट पेपर. प्रॉडक्ट का नाम है- पर्सनल वीआईपी लाइन. ब्राजील का पहला ब्लैक टॉइलेट पेपर. उसके प्रचार में इसी 'ब्लैक इज ब्यूटीफुल' स्लोगन का इस्तेमाल किया है. इसका विज्ञापन कर रही हैं एक श्वेत अभिनेत्री. मरिना रू बारबोसा. गोरी-चिट्टी. गोल्डन-भूरे रंग के बाल. नीली-नीली 'संभ्रांत' आंखें. विज्ञापन में मरिना के शरीर पर कोई कपड़ा नहीं दिख रहा. बस ढेर सारा टॉइलेट पेपर लिपटा नजर आ रहा है. टॉइलेट पेपर क्या काम करता है, ये कोई सीक्रेट तो है नहीं. शौच करके पिछवाड़ा पोंछने में इस्तेमाल होता है.
दिल पर ले लिया है लोगों ने इस विज्ञापन पर लोग खूब नाराज हैं. जाहिर है. नाराज होना स्वाभाविक है. इतने भावुक और संवेदनशील टर्म का ऐसा इस्तेमाल अखर तो रहा होगा उनको. वो भी ऐसे. हर विज्ञापन का एक मनोविज्ञान होता है. इस 'ब्लैक टॉइलेट पेपर' का भी है. बनाने वालों ने सोचा होगा या नहीं, वो ही जानें. मगर देखने वाला क्या सोचेगा? ये ही कि एक गोरी लड़की काले रंग के टॉइलेट पेपर का इस्तेमाल कर उसे 'ब्लैक इज ब्यूटीफुल' का नाम देती है. यानी, काले रंग की खूबसूरती किसी गोरी चमड़ी वाले के शौच से सने पिछवाड़े को साफ करने में जाया हो रही है! अश्वेतों ने इस विज्ञापन पर बहुत आपत्ति जताई है. उनको इसमें अपनी बेइज्जती नजर आ रही है.In Brazil if you type in #blackisbeautiful
— Goblin (@nyakasanga) October 25, 2017
you are going to find ass paper.

कुछ दिनों पहले डव के इस ऐड पर खूब बवाल हुआ था. इसमें एक अश्वेत मॉडल डव इस्तेमाल करने के बाद अपनी भूरी चमड़ी को टी शर्ट की तरह उतारकर फेंक देती है और अंदर से निकलती है एक गोरी-गुलाबी लड़की.
अगर आपको रंगभेद नहीं दिखता, तो आपकी आंखें खराब हैं आप सोचकर देखिए. अश्वेतों के संघर्ष में कितनी सांस्कृतिक-राजनैतिक पीड़ा थी. एक आंदोलन था ये तो. जो 1960 के दौर में शुरू हुआ और पूरी दुनिया में फैला. अमेरिका में, दक्षिण अफ्रीका में और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इस्तेमाल हुआ. इस रंग में उन लोगों का संघर्ष है, जिन्होंने अश्वेतों के हक के लिए अपनी जान दी. ताकि, अश्वेत भी इज्जत से जी सकें. बराबरी हासिल कर सकें. इंसान समझे जाएं. स्थितियां आज भी कहां सुधरी हैं. ऊपर-ऊपर से दिखता है कि लोगों में अक्ल आ गई है. मगर सच ये है कि रंगभेद आज भी खूब होता है. ये संघर्ष खत्म नहीं हुआ. चल रहा है. अभी कुछ दिन पहले वो डव का ऐड आया था. लड़की डव लगाती है और भूरी चमड़ी सफेद हो जाती है. ये अकेला ऐड नहीं था. इस तरह के सारे प्रॉडक्ट देखिए. बिफोर और आफ्टर का गणित एक सा ही रहता है. प्रॉडक्ट लगाने से पहले इंसान 'काला' और गंदा नजर आता है. प्रॉडक्ट को इस्तेमाल करने के बाद दिखता है चमकता चेहरा. कामयाब. आत्मविश्वास से लबालब. चमड़ी के रंग से किस्मत तय हो जाती है. अगर आपको रंगभेद और नस्लवाद नजर नहीं आता, तो इसका सीधा सा मतलब है कि आपकी आंखें खराब हैं.
ब्राजील की आधी से ज्यादा आबादी या तो ब्लैक है या मिक्स्ड ब्रीड इस ऐड पर लोगों का गुस्सा वाजिब है. बाजार स्वार्थी होता है. मगर इतना भी क्या स्वार्थी होना कि एक आंदोलन को टॉइलेट पेपर से जोड़ दो. लाखों-करोड़ों लोगों के संघर्ष की हंसी उड़ाओ. बहुत हंगामा हुआ, तो कंपनी ने माफी मांगी. कहा, किसी को बुरा लगा हो तो सॉरी. फिर ये 'ब्लैक इज ब्यूटीफुल' वाला स्लोगन हटा लिया ऐड से. इस पूरे मामले में एक बात बड़ी दिलचस्प है. ब्राजील की आधी से ज्यादा आबादी या तो अश्वेत है या फिर मिली-जुली नस्ल की. तब भी वहां का ये हाल है. वहां अगर आप टीवी खोलते हैं, तो विज्ञापनों में ज्यादातर गोरे चेहरे ही नजर आएंगे. अजीब तो है ये बात, मगर जो है सो है.#BlackIsBeautiful
— Cecília Olliveira (@Cecillia) October 24, 2017
Brazilian Toilet Paper Brand Takes a Slogan for Black Empowerment and Wipes Its Ass With It https://t.co/OYlNETEuIK
Feito especialmente para um CU gótico. #CuGotico
— Tilico182 (@tilico182) October 23, 2017
#Personal
#PersonalVipBlack
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