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दलित शख्स की पीट-पीटकर हत्या, एक महीने पहले पुलिस को बता दिया था- "मुझे मार देंगे"

कोजाराम मेघवाल अपनी बेटियों के साथ गए थे. आरोप है कि इसी दौरान उनकी हत्या कर दी गई.

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विरोध प्रदर्शन करते हुए लोग. (फोटो: इंडिया टुडे)

राजस्थान के बाड़मेर में एक दलित व्यक्ति की हत्या (Barmer Dalit Man Killing) के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है. दलित संगठनों ने बाड़मेर में 14 अप्रैल को प्रस्तावित आंबेडकर जयंती और दूसरे सभी कार्यक्रमों को स्थगित करने का फैसला लिया गया है. बाड़मेर के असाड़ी में 40 साल के दलित शख्स कोजाराम मेघवाल (Kojaram Meghwal) की 12 अप्रैल को हत्या हुई थी. जिसके बाद दलित संगठनों ने इस मुद्दे को उठाया था. बताया जा रहा है कि हत्या पुरानी रंजिश की वजह से हुई है.

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले को लेकर भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद ने बाड़मेर आने का ऐलान किया है. बताया जा रहा है कि इस ऐलान के बाद प्रशासन चिंता में पड़ गया है. वहीं, इसी मामले को लेकर दलित नेता उदाराम मेघवाल को सोशल मीडिया पर धमकी मिली है. इस संबंध में उदाराम मेघवाल ने कार्रवाई की मांग की है.

एक महीने पहले ही की थी शिकायत

आजतक से जुड़े दिनेश बोहरा की रिपोर्ट के मुताबिक, बाड़मेर जिले के आसाडी गांव में 12 अप्रैल को सुबह 7:30 बजे कोजाराम मेघवाल अपनी दो छोटी बेटियों के साथ बकरी चराने के लिए घर से निकले थे. आरोप है कि इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले लोगों ने कोजाराम मेघवाल को लाठी और डंडों से बुरी तरह मारा. कोजाराम को अस्पताल ले जाया गया लेकिन उनकी रास्ते में ही मौत हो गई. कोजाराम के घरवालों का कहना है कि आरोपियों ने उन्हें घायल कोजाराम के पास तक नहीं जाने दिया. 

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक कोजाराम ने एक महीने पहले ही इन आरोपियों के खिलाफ गिराब थाने में जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज करवाया था. कोजाराम ने शिकायत में कहा था कि उन्हें और उनके परिवार को गुलाबसिंह से जान का खतरा है. आरोप है कि पुलिस ने इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की. जिसके बाद आरोपियों ने कोजाराम की हत्या कर दी.

रिपोर्ट के मुताबिक, कोजाराम की हत्या के बाद बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुआ. लोग अस्पताल में ही धरने पर बैठ गए. इस बीच चंद्रशेखर आजाद ने बाड़मेर आने का ऐलान कर दिया. उन्होंने कहा कि आखिर कब तक दलित समुदाय के लोग इस तरह से मारे जाते रहेंगे. चंद्रशेखर आजाद ने राज्य की गहलोत सरकार पर भी निशाना साधा और धरने पर बैठे लोगों से डटे रहने को कहा. इस मामले में दलित संगठनों ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं-

- पुलिस की लापरवाही के चलते कोजाराम मेघवाल की जान गई है इसलिए उप-अधीक्षक और गिराब थानेदार को तुरंत निलंबित किया जाए. 
- एक दर्जन से ज्यादा आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए. 
- गांव में अस्थाई पुलिस चौकी लगाकर पीड़ित पक्ष को सुरक्षा दी जाए. 
- परिवार को आर्थिक मुआवजे के तौर पर एक करोड़ रुपये और परिवार के दो सदस्यों को सरकारी नौकरी दी जाए.

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प्रशासन ने कही कार्रवाई की बात

कोजाराम की हत्या को लेकर विरोध प्रदर्शन अभी थमा नहीं है. इस बीच आंबेडकर जयंती के दिन प्रशासनिक अधिकारी दलित संगठनों से बातचीत कर मामला सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं. वहीं दलित संगठनों ने ज्यादा से ज्यादा लोगों को इकट्ठा होने के लिए कहा है. उनका कहना है कि लोग पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए अपनी आवाज उठाएं.

इधर, बाड़मेर के जिला कलेक्टर लोकबंधु ने बताया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया है. वहीं SP ने पीड़ित पक्ष से ज्ञापन लेने की बात कही है. प्रशासन का कहना है कि बातचीत हो रही है और जो भी पुलिस अधिकारी जिम्मेदार होगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी.

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