The Lallantop

बांग्लादेश में भगवान राम की सबसे बड़ी मूर्ति पर बवाल, गिराने की बात क्यों हो रही?

बांग्लादेश के उत्तरी हिस्से में एक जिला है गाइबांधा. यहां के पलाशबाड़ी शहर में एक मंदिर के कैंपस में भगवान राम की 81 फीट ऊंची मूर्ति बनाई जा रही थी. श्री राधा गोविंद मंदिर समिति मूर्ति बनवा रहा था. लेकिन इस्लामिक कट्टरपंथियों के विरोध के बाद ये प्रोजेक्ट रोक दिया गया है.

Advertisement
post-main-image
बांग्लादेश में भगवान राम की मूर्ति को लेकर विवाद हो गया है. (इंडिया टुडे)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • बांग्लादेश के गाइबांधा जिले में भगवान राम की 81 फीट ऊंची मूर्ति का निर्माण लगभग 80 प्रतिशत पूरा होने के बाद इस्लामिक कट्टरपंथी संगठनों की धमकियों के चलते रोक दिया गया है।
  • मूर्ति निर्माण को विराम देने का कारण इन इस्लामिक समूहों द्वारा सोशल मीडिया पर चलाए गए विरोधी अभियान और धार्मिक विवादों के बढ़ने का माहौल है, जो मंदिर समिति के दबाव में काम रोकने पर मजबूर हुई।
  • काम रोकने के बाद बांग्लादेश में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों पर सवाल उठे हैं तथा सरकार की अगली नीति इस विषय पर आगे की कार्रवाई तय करेगी।

बांग्लादेश में भगवान राम की सबसे बड़ी मूर्ति बन रही थी. 81 फीट ऊंची. लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था लेकिन अब काम रोक दिया गया है. क्योंकि इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन लगातार धमकी दे रहे थे. सोशल मीडिया पर इसके खिलाफ कैंपेन चल रहा था. एक इस्लामिक प्रीचर ने तो मूर्ति गिराने की मांग तक कर दी थी. बांग्लादेश के नए सदर तारिक रहमान जब सत्ता में आए तो सबको धार्मिक आजादी का वादा किया था लेकिन ताजा घटनाक्रम उनके दावे पर सवाल उठाते हैं. 

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

बांग्लादेश में धार्मिक आजादी और अल्पसंख्यक अधिकार खतरे में दिखने लगा है. ये विवाद ऐसे समय में शुरू हुआ है, जब भारत और बांग्लादेश के बीच तल्खियां फिर से बढ़ गई हैं. हफ्ते के शुरुआत में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सलाहकार जाहिद उर रहमान दिल्ली आए थे. इमिग्रेशन अधिकारियों ने उनको कुछ देर के लिए हवाई अड्डे पर रोक लिया. ये भारत के खिलाफ किए गए उनके अटैकिंग कॉमेंट्स के चलते हुआ था. ढाका ने इसको लेकर दिल्ली में कड़ा विरोध जताया. तारिक रहमान भारत आने वाले थे. उन्होंने भी टूर कैंसिल कर दिया.  

गुडविल जेस्चर के तौर पर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारतीय नेताओं को आम भेजती थीं. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ममता बनर्जी समेत कई नेता शामिल हैं. नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने इस बार नेपाल को तो आम की खेप भेजी है लेकिन अभी तक भारत के नेताओं तक आम नहीं पहुंचा है. अभी ये भी साफ नहीं है कि वे इस ट्रेडिशन को जारी रखना चाहते हैं या नहीं.

Advertisement

भगवान राम की मूर्ति को लेकर क्या विवाद है?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के उत्तरी हिस्से में एक जिला है गाइबांधा. यहां के पलाशबाड़ी शहर में एक मंदिर के कैंपस में भगवान राम की 81 फीट ऊंची मूर्ति बनाई जा रही थी. भगवान राम के अलावा भगवान कृष्ण की 50 फीट और भगवान शिव की 30 फीट ऊंची मूर्ति भी लगनी है. इस प्रोजेक्ट में करीब 220 मिलियन टका (15.6 करोड़) रुपये का खर्च आने वाला है. श्री राधा गोविंद मंदिर समिति इन मूर्तियों को बनवा रहा है. समिति के अध्यक्ष हरिदास चंद्र ने बताया,

 प्रोजेक्ट में शामिल लोगों को इस्लामिक ग्रुप से धमकियां मिल रही हैं. इसके चलते काम रोक दिया गया है. मैं बांग्लादेश के प्रधानमंत्री से इस प्रोजेक्ट को पूरा करवाने की अपील करता हूं.

Advertisement

मंदिर समिति के सलाहकार श्यामलाल कुमार महंत ने बताया कि मंदिर ने सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए मंदिर का काम रोक दिया है. उन्होंने बताया, 

लॉ एंड ऑर्डर और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए हम काम रोक रहे हैं. हम किसी भी विवाद का कारण नहीं बनना चाहते. न ही हम किसी की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाना चाहते हैं.

श्यामलाल कुमार महंत ने आगे प्रधानमंत्री तारिक रहमान की बात दोहराई कि धर्म व्यक्तिगत मामला है, लेकिन देश सभी का है. दरअसल तारिक रहमान ने बांग्लादेश में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले के बीच ये बयान दिया था. लेकिन हालिया घटनाएं सवाल उठाती हैं कि अगर देश सबका है, तो हिंदू अपने देवी देवताओं की मूर्तियां क्यों नहीं बना सकते?

मूर्ति गिराने की हुई मांग

इस महीने की शुरुआत में एक कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक का वीडियो वायरल हुआ था. वीडियो में वह धमकी दे रहा था कि ‘राम की मूर्ति बनाई जा रही है, इसे बुलडोजर से तोड़ दो. अगर सरकार ऐसा नहीं करती तो आम लोग (मुसलमान) इसे तोड़ देंगे.’

गाइबांधा में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने एक मार्च निकाला, उसमें भगवान राम की प्रतिमा का अपमान किया गया. इस घटना के विरोध में ढाका विश्वविद्यालय के छात्रों ने विशाल मशाल जुलूस निकाला और अपमान करने वाले लोगों की गिरफ्तार की मांग की. बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद बांग्लादेश में अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था है. इसने मंदिर से जुड़े लोगों को मिल रही धमकियों पर सरकार से एक्शन लेने की मांग की है.

बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने  मूर्ति गिराने की मांग को तालिबानी मानसिकता करार दिया है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब बांग्लादेश में दूसरी जगहों पर नई मस्जिदें बन रही हैं तो भगवान राम की मूर्ति का विरोध क्यों किया जा रहा. बांग्लादेश में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों पर फिर से सवाल उठने लगे हैं. राम मंदिर प्रोजेक्ट पर तारिक रहमान सरकार के रुख से तय होगा कि उनके देश में अल्पसंख्यक अधिकारों का कितना सम्मान है?

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: बांग्लादेश से आए घुसपैठियों के आधार कार्ड किसने बनवाए?

Advertisement