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18 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने अतीक से कहा था- "यूपी पुलिस आपकी रक्षा करेगी"

अतीक ने कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा की मांग की थी.

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28 मार्च को अतीक ने कहा था कि उसकी जान को खतरा है (फोटो- पीटीआई)

माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की 15 अप्रैल को पुलिस हिरासत के दौरान गोली मारकर हत्या हो गई. यूपी पुलिस का कहना है कि हमला तब हुआ जब दोनों को मेडिकल के लिए अस्पताल लाया जा रहा था. उमेश पाल हत्याकांड मामले में पूछताछ के लिए यूपी पुलिस अतीक को गुजरात की साबरमती जेल से प्रयागराज लेकर लाई थी. कुछ दिन पहले 27 मार्च को उमेश पाल अपहरण केस में यूपी पुलिस उसे प्रयागराज लेकर आई थी. तब उसने सुप्रीम कोर्ट से अपनी सुरक्षा की मांग की थी. अतीक ने याचिका दायर कर अपनी जान को खतरा बताया था.

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UP सरकार सुरक्षा करेगी- SC

अतीक के वकील ने यूपी पुलिस की हिरासत के दौरान उसकी सुरक्षा सुनिश्चित किये जाने की मांग की थी. 28 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी. साथ ही कहा था कि वह हाई कोर्ट जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने जान के खतरे की बात को 'रिकॉर्ड' में लेने से इनकार कर दिया और कहा था कि सुरक्षा की जिम्‍मेदारी राज्‍य सरकार की है.

जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की बेंच ने कहा था कि चूंकि वे न्यायिक हिरासत में हैं, उगर उनकी जान को खतरा है तो उत्तर प्रदेश सरकार की मशीनरी उनकी सुरक्षा का खयाल रखेगी. बेंच ने कहा था, 

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"इस मामले में अदालत हस्तक्षेप नहीं करेगी. आपके पास हाई कोर्ट के सामने जाने का विकल्प है. जो भी तय कानूनी प्रक्रिया है उसका पालन किया जाएगा."

अतीक के वकील ने सुप्रीम कोर्ट से बार-बार अनुरोध किया था. वकील ने कहा था कि वे किसी तरह की पूछताछ या हिरासत से नहीं बच रहे लेकिन उनकी जान को गंभीर खतरा है. हालांकि कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी.

28 मार्च को प्रयागराज की एक अदालत ने उमेश पाल अपहरण केस में अतीक को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसी सुनवाई के लिए उसे साबरमती जेल से प्रयागराज लाया था. कोर्ट ने उसके भाई अशरफ अहमद सहित सात आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया था. इस फैसले के बाद दोबारा उसे साबरमती जेल पहुंचा दिया गया था.

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दोबारा प्रयागराज क्यों लाया गया?

24 फरवरी के उमेश पाल हत्याकांड मामले में भी अतीक और उसका भाई अशरफ मुख्य आरोपी थे. उसके परिवार के कई सदस्य भी आरोपी हैं. बेटा असद अहमद भी आरोपी था. लेकिन दो अतीक की हत्या से दो दिन पहले एक कथित एनकाउंटर में उसकी भी मौत हो गई. 13 अप्रैल को यूपी पुलिस ने दावा किया था कि झांसी में असद और उसके सहयोगी गुलाम को एनकाउंटर में मार दिया गया.

उमेश पाल मर्डर केस में पूछताछ के लिए अतीक को दोबारा साबरमती जेल से प्रयागराज लाया गया. 13 अप्रैल को इस मामले में उसे और अशरफ को प्रयागराज कोर्ट में पेश किया गया था. कोर्ट ने पूछताछ के लिए 14 दिन की न्यायिक हिरासत को मंजूरी दी थी. अतीक और अशरफ को 26 अप्रैल तक प्रयागराज की नैनी जेल में रखा जाना था. 14 दिन की रिमांड खत्म होने के बाद अशरफ को बरेली जेल में और अतीक को साबरमती जेल में सुरक्षित पहुंचाया जाना था.

साबरमती जेल कैसे पहुंचा अतीक?

दिसंबर 2018 में यूपी की देवरिया जेल में एक कारोबारी मोहित जायसवाल की पिटाई की गई थी. मोहित ने आरोप लगाया था कि उनका अपहरण अतीक अहमद ने करवाया था. इस घटना के बाद अतीक अहमद को देवरिया से बरेली जेल भेजा गया. वहां के जेल प्रशासन ने अतीक को रखने से हाथ खड़े कर दिए. बाद में उसे इलाहाबाद की नैनी जेल में शिफ्ट कर दिया गया. लेकिन देवरिया जेल में पिटाई का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था. 23 अप्रैल 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को आदेश दिया कि अतीक अहमद को यूपी के बाहर शिफ्ट किया जाए. उसके बाद यूपी सरकार ने 3 जून 2019 को उसे अहमदाबाद की साबरमती जेल में शिफ्ट कराया.

वीडियो: अतीक अहमद के अपराध और राजनीति की पूरी कहानी,क्या इस बड़े नेता ने उसे शह दिया?

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