माफिया अतीक अहमद की पुलिस हिरासत के दौरान हुई हत्या पर देश भर में विपक्षी नेता सवाल उठा रहे हैं. सरेराह पुलिस और मीडिया के सामने हुई इस हत्या को विदेशी अखबारों और चैनलों ने भी कवर किया है. अधिकतर विदेशी मीडिया संस्थानों ने हेडिंग में अतीक अहमद के लिए ‘पूर्व सांसद’ शब्द का इस्तेमाल किया है. साथ ही लाइव टीवी पर हुई हत्या को हाईलाइट किया है. कई संस्थानों ने हत्या के दौरान आरोपियों द्वारा लगाए गए 'जय श्री राम' के नारों का भी जिक्र किया है. 15 अप्रैल को प्रयागराज में पुलिस हिरासत के दौरान अतीक और उसके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या हुई थी.
अतीक अहमद की हत्या पर विदेशी मीडिया में क्या-क्या छपा?
कई संस्थानों ने हत्या के दौरान आरोपियों द्वारा लगाए गए 'जय श्री राम' के नारों का जिक्र किया.


ब्रिटिश अखबार द गार्डियन ने इस घटना पर शीर्षक दिया है- "भारत में पूर्व सांसद और उसके भाई की लाइव टीवी पर गोली मारकर हत्या"
अखबार ने लिखा कि अपहरण के दोषी और हत्या के आरोपी पूर्व सांसद और उसके भाई की लाइव टीवी के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई. जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व सांसद अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ अहमद पुलिस हिरासत में थे, जब तीन हमलावरों ने उन पर 20 राउंड फायरिंग की. दोनों भाइयों की मौके पर ही मौत हो गई. हत्या के आरोपियों ने फायरिंग के तुरंत बाद पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया. इनमें से एक ने 'जय श्री राम' का नारा लगाया, जो नारा मुस्लिमों के खिलाफ हिंदू राष्ट्रवादियों के लिए 'युद्धघोष' बन चुका है.
गार्डियन ने अतीक की सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका का भी जिक्र किया, जिसमें उसने अपनी जान को खतरा बताया था. साथ ही लिखा है, उत्तर प्रदेश पुलिस का अपराधियों के एक्स्ट्रा ज्यूडीशियल "एनकाउंटर" करने में रिकॉर्ड कुख्यात है. इसमें वे दावा करते हैं कि अपराधी हिरासत से भागने की कोशिश करते हैं या अधिकारियों पर पहले गोली चलाते हैं. पिछले पांच सालों में उत्तर प्रदेश में 9 हजार से ज्यादा पुलिस एनकाउंटर हुए, जिसमें 150 से ज्यादा लोग मारे गए.
जर्मन मीडिया डॉयचे वेले (DW) ने शीर्षक दिया है- "भारत: पूर्व सांसद, उसके भाई की लाइव टीवी पर गोली मारकर हत्या"
DW ने लिखा है कि पूर्व भारतीय सांसद और उसके भाई की लाइव टीवी पर गोली मारकर हत्या कर दी गई, जब पुलिस उन्हें मेडिकल जांच के लिए ले जा रही थी. यह हमला उत्तरी शहर प्रयागराज में हुआ है. घटना के टीवी फुटेज में दिखता है कि अपराधी हमले के बाद हिंदू नारे लगा रहे हैं. DW ने यह भी लिखा कि दोनों पीड़ित भारत के मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय से थे. हालांकि अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है कि यह हमला किसी संप्रदायवाद से प्रेरित था. आगे यह भी लिखा गया है कि अतीक अहमद और उसका भाई भारत के आपराधिक जगत में पूरी तरह घुसा हुआ था. अहमद के खिलाफ 100 से ज्यादा केस दर्ज थे.
कतर के मीडिया नेटवर्क अल जजीरा ने शीर्षक दिया- "भारत में पूर्व सांसद अतीक अहमद, उसके भाई की लाइव टीवी पर गोली मारकर हत्या"
अल जजीरा ने लिखा है कि किडनैपिंग के आरोपी पूर्व सांसद और उसके भाई की पुलिस हिरासत के दौरान हत्या से उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. अतीक अहमद ने पिछले महीने ही भारत की शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर कहा था कि उसकी जान खतरे में है. उसके वकील विजय मिश्रा ने कहा कि गोलीबारी अचंभित करने वाला है, यह साफ है कि पुलिस उसके क्लाइंट की सुरक्षा करने में फेल रही है.

अल जजीरा ने उत्तर प्रदेश में हाल के सालों में हुए पुलिस एनकाउंटर का भी जिक्र किया है. इसके मुताबिक, 2019 में संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) के विशेषज्ञों ने उत्तर प्रदेश में पुलिस एनकाउंटर को लेकर चेताया था. स्टोरी में भारत के राजनेताओं पर दर्ज सैकड़ों केस की भी चर्चा की गई है. आगे लिखा है कि 2017 में बीजेपी की सरकार आने के बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ दर्ज कई केस हटा लिए गए थे.
ब्रिटिश मीडिया बीबीसी ने शीर्षक दिया है- "अतीक अहमद: पूर्व भारतीय सांसद और उसके भाई की लाइव टीवी पर हत्या"
BBC ने खबर में लिखा है कि अतीक अहमद को प्रयागराज में गोली तब मारी गई, जब वे पुलिस हिरासत के दौरान पत्रकारों से बात कर रहे थे. पिछले दो दशकों से ज्यादा समय में अतीक अहमद के खिलाफ हत्या, अपहरण और रंगदारी के दर्जनों मामले दर्ज हुए थे. एक स्थानीय कोर्ट ने एक अपहरण के मामले में उसे और दो अन्य लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी.
बीबीसी ने अतीक अहमद के बेटे असद की पुलिस एनकाउंटर में हुई मौत का भी जिक्र किया है. साथ ही लिखा है कि अतीक ने कुछ दिन पहले पुलिस से अपनी जान के खतरे का दावा किया था. विशेषज्ञों ने सवाल खड़े किये हैं कि मीडिया और पुलिस के सामने कैसे एक व्यक्ति को मारा जा सकता है. बीबीसी ने अपनी स्टोरी में अतीक अहमद के आपराधिक इतिहास को भी बताया है.
इसी तरह कई और मीडिया संस्थान ने अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के हवाले से इस घटना को कवर किया है.
उमेश पाल हत्याकांड मामले में पूछताछ के लिए यूपी पुलिस अतीक को गुजरात की साबरमती जेल से प्रयागराज लेकर लाई थी. कुछ दिन पहले भी उमेश पाल अपहरण केस में यूपी पुलिस उसे प्रयागराज लेकर आई थी. तब उसने सुप्रीम कोर्ट से अपनी सुरक्षा की मांग की थी. अतीक ने याचिका दायर कर अपनी जान को खतरा बताया था. हालांकि कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी. फिलहाल, उत्तर प्रदेश सरकार ने अतीक और उसके भाई की हत्या की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन कर दिया है.






















