लेकिन वाजपेयी के चाहने वालों को पार्टी का ये बयान रास नहीं आ रहा है. इसकी वजह ये है कि वाजपेयी की उम्र फिलहाल 93 साल से ज्यादा की है. वो 2009 से ही वील चेयर पर हैं. उन्हें डिमेंशिया नाम की बीमारी है, जिसकी वजह से वो कहीं भी आ-जा नहीं सकते हैं और पूरे दिन बिस्तर पर ही पड़े रहते हैं.
घर पर ही होता है रुटीन चेकअप

पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी को भारत रत्न देने के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी उनके घर गए थे.
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की देखभाल का जिम्मा उनके सबसे करीबी सहयोगी शिव कुमार शर्मा के पास है. वाजपेयी के 93वें जन्मदिन पर बीबीसी को दिए इंटरव्यू में शिव कुमार शर्मा ने बताया था किकभी देश के सबसे अच्छे वक्ता रहे वाजपेयी अब बोल नहीं पाते हैं. अगर कोई बीजेपी का पुराना नेता उनसे मिलता है, तो आंखों और इशारे से ही वो बता देते हैं कि उन्होंने उसे पहचान लिया है या नहीं. इसके अलावा वाजपेयी की देखभाल के 24 घंटे डॉक्टरों की एक टीम तैनात रहती है. इसके अलावा चार फिजियोथेरेपिस्ट हर रोज पूर्व प्रधानमंत्री की फिजियोथेरेपी करते हैं. इसके अलावा उन्हें सिर्फ लिक्विड डाइट ही दी जाती है.
क्या होता है डिमेंशिया, जिसने वाजपेयी को इस हाल में पहुंचा दिया

एम्स में भर्ती वाजपेयी की हालत स्थिर है. एम्स ने खुद प्रेस विज्ञप्ति जारी कर ये बताया है.
अगर साधारण भाषा में समझें, तो डिमेंशिया भूलने की बीमारी को कहा जाता है. इसकी वजह से आदमी अपने बारे में सबकुछ भूल जाता है और उसे अपने आस-पास की भी चीजें याद नहीं रह जाती हैं. ये कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि बीमारियों का एक समूह है. इसकी वजह से इंसान हमेशा के लिए सबकुछ भूल सकता है, थोड़ी देर के लिए सबकुछ भूल सकता है या फिर उसके व्यवहार में बदलाव देखने को मिल सकता है. डॉक्टरों के मुताबिक 65 साल से ज्यादा उम्र के आदमी को इस बीमारी के होने का खतरा ज्यादा रहता है. उम्र के साथ बीमारी और भी बढ़ती जाती है.
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