ब्राजील की जेलों में पंगे बढ़ते ही जा रहे हैं. दरअसल इनको पंगे नहीं दंगे कहना ठीक है. सनीचर को नॉर्थ ब्राजील की ऐल्कासूज़ जेल में कैदियों पर सनीचर चढ़ गया. फिर जो मार काट मची कि कम से कम 10 कैदी मर गए. तीन की तो जानवरों की तरह गर्दनें काटी गई हैं.
रियो डी जेनेरियो की वारदात है ये. ये वही शहर है अगर आपको याद हो, इस साल ओलंपिक गेम हुए थे यहां. जहां खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने और सेल्फी लेने विजय गोयल पहुंचे थे. खिलाड़ियों का तो जानते ही हो. बात मुद्दे की, एक साल में जेलों के अंदर होने वाली ये तीसरी सबसे बड़ी फाइट है. इसी महीने अमेजन स्टेट में दंगा हुआ था, ड्रग्स को लेकर. सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी. हुआ ये था कि कैदियों का एक ग्रुप शनिवार की दोपहर अपनी सेल से बाहर था. ये क्रिमिनल ऑर्गनाइजेशन माने तगड़े हिस्ट्री शीटर कैदी हैं. किसी बात पर दूसरे वालों से टुन पुन हुई होगी. तो दूसरी तरफ जाकर अटैक कर दिया. फिर ऐसा खूनी खेल शुरू हुआ कि कुत्ते भी वैसे नहीं लड़ते. बाहर से जेल के सिपाहियों ने घेर लिया. अंदर से गोलियां चलने की आवाजें आ रही थीं.
हाल ये है कि 680 कैदियों की क्षमता वाले इस जेल में 1100 के आस पास कैदी हैं. अमेजन वाले दंगे के बाद सरकार ने ऐलान किया था कि पांच और हाई सिक्योरिटी जेल बनेंगी. ताकि ऐसे जुझारू गैंग्स को ठिकाने पर रखा जा सके. जेल में फाइट कैसे होती है. उसका एक बहुत हल्का नमूना सिल्वेस्टर स्टैलन और एर्नॉल्ड की फिल्म 'एस्केप प्लान' में देखने को मिलता है. हल्की सी झलक देख लो फिर इस जेल का हाल बताते हैं. https://youtu.be/xHIX1BLK8_8?t=70
नरक से बदतर हालात में हैं कैदी
ब्राजील चरस गांजे से लेकर हर तरह के नशे का अड्डा है. जाहिर है वहां क्राइम भी जमकर होगा और क्रिमिनल्स को रोकने के लिए जेलें भी. यहां दंगा होने के सारे इंतजाम किए हुए हैं. जेल में कैदियों को इतनी सुविधाएं हैं कि ऐसी मार काट होना मुश्किल नहीं रह जाता. ये तस्वीरें जारी की हैं Penal Placido de Sa Carvalho(प्रोनुन्सिएशन खुद कर लो) ने. जो जेल के अंदर के हालात दिखा रहे हैं.

कमरों की हालत बहुत खराब है. ऊपर से नीचे तक सीलन, बदबू भरी रहती है. जहरीले कीड़े फर्श पर टहलते हैं. सांप बिच्छू सब. उसी फर्श पर कैदी लेटते हैं.

कमरे तो घटिया हैं ही. औकात से ज्यादा कैदी उनमें भरे हुए हैं. कइयों को तो सोने के लिए एक चादर भी नहीं मिलती.

कमरों की छत उधड़ चुकी है. सरिये बाहर आ गए हैं. पन्नी लगी है, बारिश के पानी को रोकने के लिए.

जेल का कानून जो है वो तो कानून वालों की जेब में रहता है. असली पेंच होता है जेल के लंबरदारों से बनाकर रखना. छोटे कैदियों की तो कोई औकात ही नहीं है. जिसको यहां जिंदा रहना है उसे तमाम सांप और नाग नाथों में से किसी एक की तरफ जाना ही पड़ता है.

इतने दंगे पुंगे होने के बाद भी केस फाइनल करने की स्पीड एकदम अपने भारत जैसी है. कहो बीसियों साल केस चल जाए. तो जो कैदी विचाराधीन हैं वो भी इनके अंदर ही जमे रहते हैं. नए कैदी भी आते रहते हैं. जगह जानलेवा होती जाती है.