“एनसीबी सबूतों के जरिए ये दावा नहीं सिद्ध कर पाई कि आचित कुमार निषिद्ध पदार्थों में डील करता है. एजेंसी के पास आर्यन खान के साथ वॉट्सऐप चैट के अलावा कोई भी सबूत नहीं है कि वो (आचित) ऐसी किसी एक्टिविटी में शामिल है. सिर्फ वॉट्सऐप चैट के आधार पर नहीं कहा जा सकता कि आरोपी कोई भी निषिद्ध पदार्थ सप्लाई करता था. वो भी तब जब हाई कोर्ट ने उस आरोपी आर्यन खान को जमानत दे दी है जिसके साथ चैट को आरोपों का आधार बनाया गया है.”कुल 9 आरोपियों में से 5 की जमानत याचिका पर कोर्ट का विस्तृत आदेश रविवार 31 अक्टूबर को उपलब्ध हुआ. इसमें आचित और एक इवेंट मैनेजमेंट से ताल्लुक रखने वाले 4 लोग शामिल हैं. जज ने कहा कि पहली नजर में इस बात का कोई सबूत नहीं मिला जो साबित कर सके कि उन्होंने कोई साजिश रची. इससे पहले 20 अक्टूबर को कोर्ट ने आर्यन खान, अरबाज़ मर्चेंट और मुनमुन धमेचा की जमानत याचिका ठुकराते हुए एनसीबी की इस बात से सहमति जताई थी कि सभी आरोपी एक कॉमन सूत्र से जुड़े हुए हैं. कोर्ट ने आचित कुमार के साथ ही केनप्लस ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड नाम की इवेंट मैनेजमेंट कंपनी से जुड़े चारों आरोपियों को भी जमानत दे दी. इस कंपनी ने ही उस कॉर्डेलिया क्रूज पर शो आयोजित करवाया था जहां से आर्यन खान और अन्य को गिरफ्तार किया गया था. कोर्ट ने जमानत याचिका मंजूर करते हुए कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि कंपनी ने आरोपियों को फाइनेंस किया है या उन्हें पनाह दी है. कोर्ट ने इस ओर भी ध्यान दिलाया है कि मामले में कॉर्डेलिया क्रूज़ की टीम और उसके प्रायोजक को केस में आरोपी तक नहीं बनाया गया है. दिल्ली के रहने वाले इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के डायरेक्टर समीर सहगल और गोपालजी आनंद के साथ कंपनी में काम करने वाले मानव सहगल और भास्कर अरोड़ा को केस में आरोपी बनाया गया है. आर्यन खान ड्रग्स मामला 2 अक्टूबर को मुंबई से गोवा से जा रहे कॉर्डेलिया नाम के क्रूज़ शिप पर नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की एक टीम ने रेड की. जहां NCB ने शाहरुख़ खान के बेटे आर्यन खान, अरबाज़ मर्चेंट और मुनमुन धमेचा समेत आठ लोगों को हिरासत में लिया गया. आरोप ये लगा कि ये लोग ड्रग्स रखने और लेने में शामिल थे. मामले में लोअर कोर्ट ने आरोपियों को इस आधार पर जमानत देने से मना कर दिया कि इन लोगों ने कथित तौर पर ड्रग्स को लेकर वॉट्सऐप चैट की थी. 28 अक्टूबर को आर्यन खान समेत अरबाज़ मर्चेंट और मुनमुन धमेचा को हाई कोर्ट से बेल मिली. 29 अक्टूबर को बॉम्बे हाई कोर्ट ने आर्यन खान के लिए पांच पन्नों का बेल ऑर्डर जारी किया. शनिवार, 30 अक्टूबर को इन्हें जेल से रिहा किया गया.
आर्यन ड्रग्स मामलाः NPDS कोर्ट ने कहा कि सिर्फ वॉट्सऐप चैट को ड्रग सप्लाई का सबूत नहीं मान सकते
5 अन्य आरोपियों को भी जमानत मिली.
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आर्यन खान (ऊपर) को जिस शख्स से चैट के आधार पर दोषी बताया जा रहा था, उसे एनडीपीएस कोर्ट ने जमानत दे दी है. कोर्ट का कहना है कि सिर्फ चैट के आधार पर ये कैसे मान लिया जाए कि वो ड्रग पेडलर है.
आर्यन ड्रग्स केस (Aryan Drugs Case) में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को एक और झटका लगा है. स्पेशल NDPS कोर्ट ने उस शख्स को भी बेल दे दी है, जिसे आर्यन खान का ड्रग्स सप्लायर बताया जा रहा था. कोर्ट ने बेल देते हुए कहा कि सिर्फ वॉट्सऐप चैट के आधार पर ये नहीं माना जा सकता कि कोई शख्स ड्रग्स का सप्लायर है. आर्यन खान को पहले ही हाई कोर्ट से बेल मिल चुकी है. आइए जानते हैं कि कोर्ट ने क्या क्या कहा.
चैट्स के आधार पर बताया था ड्रग पेडलर
ड्रग्स के मामले में लोअर कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद एक्टर शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को हाई कोर्ट से जमानत मिली. आर्यन के अलावा जिन अन्य को इस मामले में आरोपी बनाया गया था, उनमें आचित कुमार नाम का युवक भी शामिल है. आचित आर्यन खान का दोस्त है. नारकोटिक्स ब्यूरो ने 22 साल के आचित को कथित तौर पर 2.6 ग्राम गांजे के साथ गिरफ्तार किया था. एनसीबी का दावा है कि उसे आर्यन खान के फोन से ऐसे चैट्स मिले हैं जिससे पता चलता है कि आचित एक ड्रग पेडलर है और शहर के गांजा नेटवर्क का हिस्सा है. हालांकि कोर्ट ने बेल देने का जो आदेश दिया है, उसमें साफ लिखा है कि सिर्फ चैट के आधार पर ये नहीं माना जा सकता कि आचित एक ड्रग पेडलर है. कोर्ट ने कहा कि,
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