उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के मामले में दो SDM और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. जांच में सामने आया कि वोटर लिस्ट में बदलाव के लिए 13,779 फॉर्म भरे गए थे. इनमें से 10,470 फॉर्म मंजूर किए गए, लेकिन इनसे जुड़े जरूरी कागजात दफ्तर में नहीं मिले. अब इन सभी मंजूर फॉर्म की दोबारा जांच होगी. दोनों SDM को उनके पद से हटाकर जिला मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है. वहीं, कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी खत्म कर दी गई है. दोनों SDM के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू हो गई है.
10 हजार वोटर्स की जानकारी बदली, UP SIR में धांधली पकड़ी गई, 2 SDM पर FIR
पीलीभीत की सदर सीट पर ये मामला सामने आया है. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे. कांग्रेस का आरोप था कि 13,150 वोटर्स की जानकारी फॉर्म-8 भरकर बदली गई है. जांच हुई तो वोटर लिस्ट में गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं. इसके बाद बड़े अफसरों पर एक्शन हुआ है.

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने पीलीभीत की सदर विधानसभा सीट की वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे. कांग्रेस का आरोप था कि 13,150 वोटर्स के EPIC नंबर एक जैसे हैं, लेकिन उनके और पिता के नाम अलग-अलग हैं. EPIC नंबर यानी वोटर ID कार्ड पर लिखा पहचान नंबर.
कांग्रेस ने ये भी आरोप लगाया कि 884 ऐसे वोटर्स के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए, जो इलाके में ही रह रहे हैं. इसके अलावा, पार्टी ने करीब 2,600 ऐसे लोगों के नाम जोड़ने का आरोप लगाया, जो उस इलाके में रहते ही नहीं हैं. कांग्रेस के मुताबिक, इन तीनों तरह की गड़बड़ियों से कुल 16,554 वोटर्स के रिकॉर्ड पर सवाल खड़े हुए.
इन शिकायतों के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने मामले की जांच के आदेश दिए. पीलीभीत के जिला निर्वाचन अधिकारी ने जांच की और अपनी रिपोर्ट मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजी. जांच में वोटर लिस्ट में गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं. इसके बाद दो SDM और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ कार्रवाई की गई.
जांच में क्या-क्या गड़बड़ियां मिलीं?पूरा मामला पीलीभीत की सदर विधानसभा सीट की वोटर लिस्ट से जुड़ा है. यहां वोटर ID नंबर डालकर जानकारी देखने पर कुछ लोगों के नाम के सामने दूसरे वोटर की जानकारी दिखाई दे रही थी. शिकायतों की जांच में पता चला कि 31 मई से 29 अगस्त, 2026 के बीच वोटर लिस्ट में जानकारी बदलने के लिए कुल 13,779 फॉर्म-8 भरे गए थे.
फॉर्म-8 का इस्तेमाल वोटर लिस्ट में नाम, पता और दूसरी जानकारियों में सुधार के लिए किया जाता है. इन 13,779 फॉर्म में से 10,470 मंजूर कर लिए गए, जबकि 3,309 फॉर्म खारिज कर दिए गए. लेकिन जांच में पता चला कि इन फॉर्म से जुड़े कागजात और दूसरे जरूरी रिकॉर्ड दफ्तर में मौजूद नहीं थे. यानी जिन आवेदनों के आधार पर वोटर लिस्ट में बदलाव किए गए, उनसे जुड़े दस्तावेज ही नहीं मिले.
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, इन 13,779 फॉर्म में से 4,717 फॉर्म उस दौरान दर्ज हुए, जब मयंक गोस्वामी SDM थे. बाकी 9,062 फॉर्म हेमंत चौधरी के कार्यकाल में दर्ज किए गए थे. दोनों उस समय वोटर लिस्ट तैयार करने और उसमें बदलाव की जिम्मेदारी संभाल रहे थे.
जांच के बाद पीलीभीत की पूरनपुर तहसील के SDM मयंक गोस्वामी और अमरिया इलाके के SDM हेमंत चौधरी को उनके पद से हटाकर जिला मुख्यालय से अटैच कर दिया गया. वहीं, वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर में काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की सेवाएं खत्म कर दी गईं.
इसके बाद 22 अक्टूबर को तीनों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई. उनके खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और BNS की धारा 201 के तहत मामला दर्ज किया गया है. दोनों SDM के खिलाफ विभागीय जांच भी चल रही है. साथ ही, दूसरे अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.
लेकिन मामला सिर्फ FIR तक सीमित नहीं है. पीलीभीत के जिला निर्वाचन अधिकारी ने अब सदर विधानसभा सीट के उन सभी 10,470 फॉर्म की दोबारा जांच कराने का फैसला किया है, जिन्हें मंजूर किया गया था.
इसके अलावा, पीलीभीत की पूरनपुर, बीसलपुर और बरखेड़ा विधानसभा सीटों की वोटर लिस्ट की भी जांच की जाएगी. चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के दूसरे जिलों के निर्वाचन अधिकारियों से भी वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की जांच करके रिपोर्ट देने को कहा है.
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उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पीलीभीत में 10 अप्रैल से 21 अक्टूबर के बीच कंप्यूटर ऑपरेटर की ओर से दर्ज किए गए फॉर्म-6 और फॉर्म-7 की भी जांच करने को कहा है. फॉर्म-6 का इस्तेमाल वोटर लिस्ट में नया नाम जुड़वाने के लिए किया जाता है. वहीं, फॉर्म-7 के जरिए किसी नाम को वोटर लिस्ट से हटाने की मांग की जा सकती है.
अब जांच में यह देखा जाएगा कि इन फॉर्म के जरिए नाम जोड़ने और हटाने के लिए तय नियमों का पालन किया गया था या नहीं.
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