इसका विरोध करने वाले बताते रहे कि ये बैलों के खिलाफ़ क्रूरता है. इस पर बैन लगाने की मांग करने वाले तमाम लोग बैलों के वेलफेयर के लिए चिंतित नज़र आए. उन्होंने बैल बचाओ मुहिम छेड़ दी. पहली बार भारत में फोकस गाय से हट कर बैलों पर चला गया. बैल बचाने के कई सारे उपाय सुझाए गए. वो तो खैर सब हवा-हवाई था लेकिन आंध्र प्रदेश में पुलिस के एसपी ने जरूर 30 बैलों की चिंता की है.जब पूरे भारत में गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा था और आज़ादी की बातें हो रही थी उसी वक़्त आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में एसपी साहब बैलों को सचमुच की आज़ादी दिलवा रहे थे. एक टाटा 407 में भरे 25 बैल हैदराबाद एक कत्लखाने ले जाए जा रहे थे. ओडिशा में इन्हें ख़रीदा गया था. एसपी ब्रह्मा रेड्डी ने इन्हें चेकपोस्ट पर पकड़ा.
उन्होंने कहा, “हमारा क़ानून गौवंश की बलि की इजाज़त नहीं देता. इस गाड़ी में 25 पूरी तरह विकसित बैल थे जिन्हें काटे जाने से रोकना ज़रूरी था.” रेड्डी ने बताया, “ये बैल भूखे-प्यासे थे. कानूनन एक ट्रक में सिर्फ 6 या 8 बड़े जानवर ही ढोए जा सकते हैं. साथ ही उनके लिए चारे और पानी का समूचा इंतज़ाम भी होना चाहिए था. लेकिन यहां हमने देखा कि सभी बैल एक-दूसरे के ऊपर बेदर्दी से ठूंसे गए थे. मल-मूत्र भी उसी हालत में कर रहे थे. ऐसी परिस्थितियों में ज़्यादातर जानवर मर जाते हैं. ये बैल हैदराबाद ले जाए जा रहे थे जो लगभग 800 किलोमीटर दूर है. इतने लंबे फासले में इनमे से ज़्यादातर मर जाते. हमने तेज़ी से एक्शन लिया और इसीलिए कोई जान नहीं गई”.कुछ पशु कल्याण संगठनों ने मिलकर इन बैलों की ज़िम्मेदारी संभाली है. तीन कसाइयों को गिरफ्तार किया गया है. इनके पास न तो जानवरों के मूवमेंट के लिए ज़रूरी कागज़ात थे और न ही पशुओं के अलाभकारी होने के संबंध में कोई सर्टिफिकेट था. तीनों के खिलाफ़ नरसन्नापेटा पुलिस स्टेशन में कम्प्लेंट दर्ज करा दी गई है. एक तरफ तो जल्लीकट्टू में बैलों को बचाने का शोर पूरे भारत में सुना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ कोई खामोशी से अपना फ़र्ज़ निभाते हुए सच में बैलों को बचा रहा है. श्रीकाकुलम जिले के एसपी अपने फ़र्ज़ को शानदार ढंग से अंजाम देने के लिए बधाई के पात्र हैं. देखें फोटोः
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