धांधलियां कहां नहीं होतीं. तमाम चीजों से लड़कर लोग मेहनत करते हैं और ईनाम किसी 'पहुंच' वाले को मिल जाता है. 'मिस इंडिया अर्थ' जैसे नामी कंपटीशन में धांधली के आरोप लगे हैं. आरोप है कि कंपटीशन पूरा हुआ ही नहीं और एक लड़की को विनर घोषित कर दिया गया. कंपटीशन की एक कंटस्टेंट चम दारांग ने इस बारे में एक फेसबुक पोस्ट लिखी है. हम हिंदी में आपको पढ़वा रहे हैं. और हां, इस आरोप के बाद से मिस इंडिया अर्थ की ऑफिशियल वेबसाइट (http://www.missearthindia.com/voting-phase-2/) काम नहीं कर रही. उनका फेसबुक पेज भी बंद है. पढ़िए, चाम दारांग ने क्या लिखा है:
आज 5 अक्टूबर है और 'मिस इंडिया अर्थ' का फिनाले 3 को था. आप सोच रहे होंगे कि रिजल्ट का क्या हुआ. विजेता कौन रही? अब जानिए कि 3 अक्टूबर को क्या हुआ. पहली बात, कोई भी विनर नहीं है. दूसरी बात, कोई कम्पटीशन हुआ ही नहीं. हम सारी कंटस्टेंट उस क़यामत की घड़ी का इंतजार कर रही थीं. बिना सोए, बिना खाए. आखिरी समय पर हुए बदलावों के साथ सामंजस्य बैठाते हुए. कुल 3 राउंड होने थे. जिसमें आखिरी राउंड की कोरियोग्राफी तैयार नहीं थी. राउंड कैंसिल कर दिया गया. 25 कंटस्टेंट स्टेज पर खड़ी थीं. कुछ लड़कियां तो पहले राउंड की वॉक कर रही थीं. तभी स्टेज पर एक आदमी आता है. कहता है कि उन्होंने विनर खोज लिया है. विनर को कुशलता, मूल्यों, अनुभवों और पता नहीं किन किन चीजों के बेसिस पर चुना गया है. उन्होंने कहा कि कॉन्टेस्ट की विजेता राशि हैं. 24 लड़कियों का मुंह खुला का खुला रह गया. कुछ लोग अब ये कह रहे हैं कि हम झूठ बोल रहे हैं, क्योंकि हम कॉन्टेस्ट जीत नहीं पाए. सचमुच? जिन्हें ऐसा लगता है वो जान लें. कोई कम्पटीशन नहीं हुआ. कोई क्वेश्चन आंसर राउंड नहीं हुआ. कुछ लोगों ने कहा कि लड़कियों ने राशि को मारने की कोशिश की. जबकि सच से ये है कि ग्रीन रूम में लड़कियां रो रही थीं. सोचिए, किसी चीज को पाने के लिए आप अपना सब कुछ लगा दें. सारे पैसे लगा दें. घर वालों, दोस्तों, मां-बाप, रिश्तेदारों को आपसे उम्मीदें हो जाएं. और अंत में कम्पटीशन ही न हो. कैसा लगेगा आपको? टूटा हुआ लगेगा, है न? और आखिरी दिन की तैयारी हम 1 अक्टूबर से कर रहे थे. ये सोचकर कि फिनाले में अपना सबसे अच्छा परफॉर्मेंस देंगे. और अगर पिछली परफॉरमेंस के हिस्साब से ही प्राइज देना था, तो हमारी अटेंडेंस और परफॉर्मेंस चेक करके बताया जाए, क्या बाकी लड़कियों ने कोई कसर छोड़ी थी? क्या हम ये डिजर्व करते थे? 7 महीने कोई मजाक नहीं होते. हमें बार-बार दिल्ली जाना पड़ता. होटलों में रुकना पड़ता. ड्रेस कोड के हिसाब से कपड़े पहनने पड़ते. और ये सब अपने पैसों से करना पड़ता. हमसे कहा गया ढेर सारे कपड़े लाना. गाउन, साड़ी, ड्रेस, शॉर्ट्स और जिम के कपड़े. ये सब हमने उस फिनाले के लिए खरीदा, जो हुआ ही नहीं. पैसों की बात छोड़ भी दें तो जो हमारे परिवारों को झेलना पड़ा, वो बहुत बुरा था. हमारे पेरेंट्स नॉर्थ, साउथ, ईस्ट, वेस्ट, हर जगह से आए थे. मुझे अब भी विश्वास नहीं हो रहा कि ऐसा हुआ. काश ये सब एक बुरा सपना होता. मिस अर्थ इंडिया का ऑफिशियल पेज फेसबुक से गायब है. कोरियोग्राफी हुई नहीं. मुझे शक है कि ये एक खेल है, जिसका खेला जाना पहले से तय था. हमारे शुभचिंतकों, आपको लगता है कि हम ये डिजर्व करते थे? क्या ये सब ठीक है? आपको लगता है हमें चुपचाप इसे सह लेना चाहिए? आपको लगता है उन्हें हमारे आत्म-सम्मान के साथ खेलने का हक है? अगर आपको लगता है हम इस अपमान से बेहतर डिजर्व करते हैं तो इस पोस्ट को तब तक शेयर करिए जबतक हमें न्याय न मिल जाए. शुक्रिया!
इस मॉडल ने बताया 'मिस इंडिया अर्थ' कॉन्टेस्ट का घटिया सच!
इन लड़कियों के साथ जो हुआ, क्या वो डिजर्व करती थीं?
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फोटो - thelallantop
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