अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने एक बार फिर NATO से नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा 'जब हमें NATO की जरूरत थी, तब वे वहां नहीं थे और अगर हमें फिर से उनकी जरूरत पड़ी, तो भी वे वहां नहीं होंगे'. ट्रंप पहले भी कई बार NATO ट्रीटी से बाहर निकलने की धमकी दे चुके हैं. लेकिन कयास है कि इस बार सच में वो ऐसा कर सकते हैं. क्या अमेरिका के लिए ये इतना आसान होगा? इसे समझते हैं.
'जब अमेरिका को जरूरत थी, तब तो आए नहीं... ', गुस्साए ट्रंप क्या NATO छोड़ देंगे?
US on NATO: डॉनल्ड ट्रंप पहले भी कई बार NATO ट्रीटी से बाहर निकलने की धमकी दे चुके हैं. लेकिन कयास है कि इस बार सच में वो ऐसा कर सकते हैं. क्या अमेरिका के लिए ये इतना आसान होगा? इसे समझते हैं.


NATO के सेक्रेटरी-जनरल मार्क रुटे की डॉनल्ड ट्रंप के साथ मीटिंग हुई. इस मीटिंग से पहले वाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लीविट ने बताया था कि ट्रंप NATO छोड़ने के बारे में बात करेंगे. उन्होंने कहा कि अमेरिका NATO देशों के डिफेंस को फंड करता है. लेकिन बीते छह हफ़्तों में सभी देशों ने अमेरिका को पीठ दिखाई है. मीटिंग के बाद, ट्रंप ने एक पोस्ट शेयर कर अपना गुस्सा जताया. इसके अलावा उन्होंने फिर से ग्रीनलैंड को लेकर टिप्पणी की. ट्रंप पहले भी डेनमार्क के नियंत्रण वाले ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की इच्छा जता चुके हैं, जिस पर यूरोपीय देशों ने चिंता जाहिर की थी.
NATO (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइज़ेशन) 32 देशों का एक सैन्य संगठन है. इसकी सबसे बड़ी ताकत आर्टिकल 5 है, जो कहता है कि अगर किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है, तो उसे सभी सदस्यों पर हमला माना जाएगा. अमेरिका भी इसका हिस्सा है. अमेरिका के लिए इस ट्रीटी से बाहर निकलना मुश्किल है मगर मुमकिन है.
अमेरिकी संसद कांग्रेस ने 2023 में एक कानून पारित किया था. ये किसी भी राष्ट्रपति को संसद की मंजूरी के बिना NATO से बाहर निकलने से रोकता है. डॉनल्ड ट्रंप लंबे समय से NATO के आलोचक रहे हैं और अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने संकेत दिया था कि उनके पास अकेले ही इस गठबंधन को छोड़ने का अधिकार है. जब यह कानून पास हुआ था. तो इसका जोरदार समर्थन ट्रंप के मौजूदा विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ही किया था, जो उस समय फ्लोरिडा से सीनेटर थे.
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NATO और डॉनल्ड ट्रंप के रिश्ते पिछले एक साल से अच्छे नहीं रहे हैं. NATO का आरोप है कि डॉनल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद रूस के खिलाफ युद्ध में यूक्रेन को सैन्य मदद कम कर दी थी. वो सहयोगी देश डेनमार्क से बार-बार ग्रीनलैंड छीनने की धमकी भी दे रहे है. वहीं ट्रंप इस बात से नाराज़ हैं कि NATO के सहयोगी देश स्पेन और फ्रांस ने ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका के लिए अपने हवाई क्षेत्र या साझा सैन्य सुविधाओं के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी. उन्होंने एक बार NATO को ‘पेपर टाइगर’ या 'कागजी शेर' तक कह दिया था.
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