कहां तो अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ईरान की सभ्यता खत्म करने का दावा कर रहे थे और कहां डेडलाइन से चंद मिनट पहले सीजफायर की घोषणा कर दी. अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्तों के लिए जंग तो रुक गई, लेकिन दुनिया भर में मौजूद ईरानी एंबेसी इसका मजा उड़ा रही हैं.
ईरान युद्ध के दौरान ट्रंप ने क्या-क्या डींगें मारीं, ईरानी एंबेसी ने एक-एक पर मौज लूटी
Iran Embassy in Sri Lanka Trump statements: श्रीलंका स्थित ईरानी एंबेसी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बयानों की लिस्ट बनाई है. साथ ही एक फोटो भी साझा की है. बताया है कि कैसे राष्ट्रपति के बयान हर दिन बदले हैं. कभी धमकाना, तो कभी चिल रहने वाला मूड.


अब श्रीलंका स्थित ईरानी एंबेसी ने भी अपनी क्रिएटिविटी दिखाते हुए डॉनल्ड ट्रंप पर तंज कसा है. बताया है कि 28 फरवरी को शुरू हुई जंग के बाद से कैसे मिस्टर प्रेजिडेंट के 'मूड स्विंग' हुए हैं. एंबेसी ने युद्ध के हर दिन के उनके बदलते बयान लिखे हैं.
शुरुआत होती है नो कमेंट्स! से. फिर कोट कर बयान पर बयान लिखे जाते हैं.
3 मार्च- “हम जंग जीत गए.”
7 मार्च- “हमने ईरान को हरा दिया.”
9 मार्च- “हमें ईरान पर हमला करना चाहिए.”
9 मार्च- “युद्ध लगभग पूरी तरह से और बहुत ही खूबसूरती से खत्म हो रहा है. ”
11 मार्च - “हमें ईरान पर हमला करना चाहिए.”
12 मार्च- "हम जीते तो जरूर, लेकिन अभी पूरी तरह से नहीं जीते हैं."
13 मार्च - “हमने जंग जीत ली.”
14 मार्च - “प्लीज हमारी मदद करो.”
15 मार्च- “अगर आप हमारी मदद नहीं करते, तो मुझे ये बात जरूर याद रहेगी.”
16 मार्च- “दरअसल, हमें किसी मदद की जरूरत नहीं है.”
16 मार्च-" मैं बस देख रहा था कि कौन मेरी बात सुन रहा है. "
16 मार्च- "अगर नाटो मदद नहीं करता, तो उन्हें बहुत बुरा भुगतना पड़ेगा."
17 मार्च- "हमें नाटो की मदद की ना तो जरूरत है और ना ही हम उसे चाहते हैं."
17 मार्च- "नाटो से हटने के लिए मुझे कांग्रेस की मंजूरी की कोई जरूरत नहीं है."
18 मार्च- "हमारे साथियों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए फिर से सहयोग करना चाहिए. "
19 मार्च- "अमेरिका के साथियों को आगे बढ़कर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने में मदद करनी चाहिए."
20 मार्च- "नाटो बुजदिल है."
21 मार्च- “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा उन देशों को करनी चाहिए, जो इसका इस्तेमाल करते हैं. हम इसका यूज नहीं करते, हमें इसे खोलने की जरूरत नहीं.”
22 मार्च- “ये आखिरी बार है. मैं ईरान को 48 घंटे का समय दे रहा हूं. ओपन द स्ट्रेट.”
23 मार्च- "ईरान के साथ हमारी बातचीत बहुत अच्छी और प्रोडक्टिव रही."
24 मार्च- “हम आगे बढ़ रहे हैं.”
25 मार्च- कोई खास बयान नहीं.
26 मार्च- “डील करो, वर्ना हमें यूं ही उन्हें उड़ाते रहेंगे.”
27 मार्च- “नाटो के लिए हमें वहां रहने की कोई जरूरत नहीं.”
28 मार्च- कोई खास बयान नहीं.
29 मार्च- दावा किया कि बातचीत आगे बढ़ रही है
30 मार्च- “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तुरंत खोलो, वर्ना इसके भयानक नतीजे भुगतने पड़ेंगे. ”
31 मार्च- दावा किया कि समझौता 'बहुत करीब' है और ईरान 'सही काम करेगा.'
1 अप्रैल- "हम बहुत जल्द देखेंगे कि क्या होता है."
2 अप्रैल- अपनी बात दोहराई कि समझौता होने की संभावना है. मगर साथ ही चेतावनी भी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो हमले जारी रहेंगे.
3 अप्रैल- “कुछ बहुत बड़ा होने वाला है.”
4 अप्रैल- कहा कि ईरान को “तुरंत” बात माननी होगी, वर्ना उसे और भी बुरे नतीजे भुगतने पड़ेंगे.
5 अप्रैल- “उस होर्मुज को खोलो, वर्ना तुम लोग नरक में रहोगे - बस देखते जाओ!”
बयानबाजी खत्म हुई, तो आखिर में ECG की एक तस्वीर भी लगा थी. साथ में एक झूठ बोलने वाले इमोजी को ऊपर चिपका दिया. माने जैसे ECG में धड़कन ऊपर-नीचे होती रहती है, वैसे ही ट्रंप के बयान भी बार-बार बदले गए हैं. कभी धमकी देना, तो कभी मदद मांगना और कभी ‘आई, डोंट केयर’ वाला एडिट्यूड अपनाना. और फिर आखिर में सीजफायर कर देना.
ईरानी मीडिया ने सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के हवाले से सीजफायर को जीत बताया. अमेरिकी न्यूज चैनल CNN ने भी ईरानी मीडिया के हवाले से लिख दिया कि ईरान ने जीत का दावा किया है. बस ये बात थी और राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप न्यूज चैनल पर भड़क गए. CNN के जारी किए गए बयान को 'फ्रॉड' बता दिया.
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ईरानी एंबेसी ने ट्रंप के 6 और 7 अप्रैल के बयानों को नहीं लिखा है. जाते-जाते उन्हें हम लिख देते हैं.
6 अप्रैल- “केवल 4 घंटे में पूरे ईरान को बर्बाद कर दिया जाएगा.”
7 अप्रैल-"आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी."
ट्रंप की इस बयानबाजी से पूरी दुनिया बेचैन हो गई थी. आखिर में पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ सुलहा-समझौता कराने आए. लेकिन वो भी ड्राफ्ट का मैसेज लगाकर. जिसके बाद उन्हें भी काफी ट्रोल किया गया और सवाल उठे कि क्या ये मैसेज उन्हें अमेरिका या इजरायल की तरफ से आया था?
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