मध्य प्रदेश के राजगढ़ (Rajgarh) जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. यहां के रामगढ़ गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब 250 जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए, जबकि यहां एक भी बच्चे का जन्म नहीं हुआ. इन फर्जी प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल आधार कार्ड में नाम और जन्मतिथि बदलवाने के लिए किया जाता था. पुलिस ने इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है.
'एक भी बच्चा नहीं जन्मा, बना दिए 250 बर्थ सर्टिफिकेट', हेल्थ डिपार्टमेंट का गजब फर्जीवाड़ा
Madhya Pradesh: इन फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल आधार कार्ड में नाम और जन्मतिथि बदलवाने के लिए किया जाता था. पुलिस ने इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है. अब पूरा मामला सामने आया है.


आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी महीने में स्वास्थ्य केंद्र में एक भी बच्चे का जन्म नहीं हुआ, फिर भी कंप्यूटर डाटा एंट्री ऑपरेटर की मदद से 137 जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए. मामला तब सामने आया जब ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर को शक हुआ. इसके बाद फरवरी में ही संबंधित ऑपरेटर को हटा दिया गया. 6 अप्रैल को माचलपुर थाने में शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की.
जांच में पता चला कि सिर्फ एक महीने ही नहीं, बल्कि 1950 से 1980 तक के फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए. उस समय गांव में न स्वास्थ्य केंद्र था और न ही वहां डिलीवरी होती थी. जांच में यह भी सामने आया कि राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों के नाम पर भी प्रमाण पत्र जारी किए गए. कुल मिलाकर 250 से ज्यादा फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए.
पुलिस के मुताबिक, आरोपी इन प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल आधार कार्ड में नाम और जन्मतिथि बदलवाने के लिए करते थे. इसके लिए जनसेवा केंद्र और आधार सेंटर के माध्यम से लोगों को जोड़ा जाता था. एक प्रमाण पत्र के लिए 500 से 1000 रुपये तक लिए जाते थे.
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पूछताछ में आरोपियों ने करीब 250 फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर 35 हजार रुपये कमाने की बात स्वीकार की है. पुलिस ने मुख्य आरोपी अर्जुन बैरागी सहित 6 लोगों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों के पास से मोबाइल फोन और स्वास्थ्य केंद्र का कंप्यूटर भी जब्त किया गया है. पुलिस ने लोगों से अपील की है कि फर्जी दस्तावेज बनाना या बनवाना अपराध है, इसलिए हमेशा सही प्रक्रिया का ही पालन करें.
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