कुछ भी कहो दोस्त, लेकिन 21वीं सदी में असल क्रांति तो ऑनलाइन शॉपिंग वाली वेबसाइट्स ने ही मचाई है. कहीं गाय के गोबर के कंडे बिक रहे हैं, कहीं हाथों के लिए चड्ढियां बिक रही हैं तो कहीं टेस्टिकल्स जैसी लाइटें बिक रही हैं. ऐमजॉन पर तो चले भर जाओ बस. उसके बाद तो आप कन्फ्यूज हो जाएंगे कि ऑनलाइन शॉपिंग साइट पर आए हैं या कॉमेडी साइट पर.
ऐमजॉन पर टेस्टिकल्स की लाइटें बिक रही हैं!
असली क्रांति तो ऑनलाइन शॉपिंग वाली वेबसाइट्स ने मचा रखी है.


# अब इसे देखो. ऐमजॉन वाले कह तो ये रहे हैं कि दिल के शेप में ये साइकल की टेल लाइट है, लेकिन असल में ये क्या है और कैसी दिख रही है, ये आपको समझ में आ ही रहा होगा. एक चीज और. कोई मजे के लिए इसे खरीदना भी चाहे तो न खरीद पाए. पौने बारह सौ की बेच रहे हैं. गांव चले जाएं तो इत्ते में तो रामआसरे अपनी साइकल दे देंगे.

# गाय के गोबर के कंडों वाली बात मजाक में नहीं कही थी. बचपन में घरवाले हमें भेजते थे शराफत के यहां से गोबर लाने के लिए. गोवर्धन पूजा होती थी न घर में. लोग गंगा में खड़े होकर जिस तरह दोनों हाथों में गंगाजल लेते हैं न, हम वैसे ही गोबर लेकर दौड़े चले आते थे घर. और यहां देखो. कंडों को केक बताकर 350 में बेचा जा रहा है, 100 रुपया पहुंचाने का लेंगे सो अलग.

# अभी आपने पैंट और जींस के नीचे ही चड्ढियां पहनी होंगी. अरे कहने का मतलब है कि अंग विशेष को ढकने के लिए ही पहनी होगी. ऐमजॉन पर हाथों की चड्ढियां बिक रही हैं. आपकी चड्ढी तीन-चार जगह से खुली होती है, लेकिन हाथ वाली चड्ढियां छह जगह से खुली हैं. भई जरूरत-जरूरत की बात है.

# यार सुना तो हमने ये भी है कि लोग गदहा मारकर खा जाते हैं, लेकिन ये बताओ कि जो जीव है ही नहीं मृत्युलोक में. उसका मांस कहां से लाते हो भाई?

# नाक से निकलती चीज को देखते ही इंडियन बड़ा छिछिया जाते हैं. उन्हें तो इतनी घिन आती है कि कई लोग इसी वजह से घी नहीं खाते. और इन्हें देखो.

# देखो भई मार्केट में हर चीज डिमांड पर ही बिकती है. तो डिमांड हो तो डॉनल्ड ट्रंप जैसी हो, वरना न हो. एक जनता उन्हें अमेरिका का राष्ट्रपति बनाना चाहती है तो दूसरी जनता उनसे क्या करना चाहती है, खुद ही देख लीजिए.

# जो लोग गोल्फ कोर्स में खेलने के बजाय बाकी सारे चोंचले करने जाते हैं न, उनके लिए ऐमजॉन बड़ी खास चीज लाया है. खेल भले न आता हो, लेकिन नवाबी दिखाने का मौका कोई इंडियन नहीं छोड़ना चाहता.

# तौलिए के किस हिस्से से मुंह पोंछा गया है और किस हिस्से से पिछवाड़ा, ये याद रखना मुलायम सिंह की बोली समझने से भी मुश्किल है. पहले मुझे लगता है कि अकेले मुझे ही ये परेशानी है, लेकिन जब देखा कि ऐमजॉन पर इसके लिए सपेसल तौलिया बिक रहा है तो यकीन हो गया कि सब कुछ नॉर्मल है.
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