शुक्रवार की रात को दिल्ली के हवाई अड्डे में हॉलीवुड फिल्म की स्टाइल में खूब अफसरी जूतों की खटपट हुई. काहे कि एक बहुत बड़ा कारोबारी धर लिया गया था. मोईन कुरैशी. प्रवर्तन निदेशालय अर्थात ED ने इसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मुकदमा ठोंक रखा है. दुबई जाने को नहाए-धोए तैयार बैठे थे. दबोचे गए. कुछ देर पूछताछ हुई. उसके बाद उसे दुबई जाने दिया गया. पता लगा है कि निकलने के लिए इसने अपने नेताओं वाले कनेक्शन का जोर लगाया था. तो ये मोईन बाबू कित्ते बड़े तोप हैं, आज जान लो.
कहां घर है, कहां ठिकाना
यूपी के रामपुर में खानदान रहता आया है. घर वहीं है. ऊंची चौपाल इलाके में बड़ी सी हवेली है. मुंशी अब्दुल मजीद के नाम की. पूछो ये कौन? तो ये मोईन के अब्बू हुआ करते थे. इनके नाम पर यहां एक मोहल्ला है, एक रोड है. रामपुर में मोईन कुरैशी का रौला है. वहां के लोग मानते हैं कि ये बड़ा जेंटलमैन है. बिजनेसमैन है. सबसे हंस के मिलता है. घर द्वार के बारे में कुल इत्ता ही पता है.
धंधा क्या है?
खुले में मीट का धंधा है. AMQ इंडिया लिमिटेड नाम से कंपनी है. रामपुर में ही मीट फैक्ट्री है बड़ी सी. वहां से गोश्त कटकर इंडिया से बाहर एक्सपोर्ट होता है.
असली धंधा?
इस पैराग्राफ में टोटल बवाल है. अपने रिस्क पर पढ़ना. फरवरी 2014 में ED ने मोईन का खंगालना शुरू किया. दो साल जांच चली. ब्लैक मनी एक्ट 2015 के तहत फिर दर्ज हुआ मुकदमा. अपने टाइम का सबसे बड़ा केस था. रकम के मामले में. 100 करोड़ से ऊपर का खेला था गुरू. मोईन के दो विदेशी बैंक एकाउंट नोचे गए. दोनों हॉन्ग-कॉन्ग के BSI बैंक में. स्विस बैंक का सबसे पुराना जोड़ीदार है.
नेताओं से अफसरों तक कनेक्शन कथा
जांच-वांच हुई तो पता चला कि इनका CBI के तब के डायरेक्टर एपी सिंह से भरत मिलाप था. एकदम लंगोट यारी टाइप. हवाला कारोबार करने के लिए सन 2013 में. इनके अलावा मोईन ने सेटिंग भिड़ाई तब के स्टेट बैंक चेयरमैन और एग्जिम बैंक के चेयरमैन से. ये पता चला मोईन की कॉल डिटेल्स और SMS की पड़ताल से. ब्लैकबेरी मैसेंजिंग सर्विस से भी काम लिया गया. यही कुल जमा कमाई है मोईन बाबू की. जिसमें जांच होते रहने से हो सकता है कुछ और खजाना जुड़े.