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अल जवाहिरी पर घोषित ढाई करोड़ डॉलर का इनाम किसे मिलेगा?

अल जवाहिरी को मार गिराने की प्लानिंग कई महीनों से चल रही थी.

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ओसामा बिन लादेन के साथ अल-जवाहिरी (फाइल फोटो- रॉयटर्स)

अमेरिका ने आतंकी संगठन अल-कायदा के प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी को ड्रोन हमले में मार गिराया. अमेरिकी सरकार के मुताबिक अल-जवाहिरी अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में रह रहा था. अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन (FBI) ने इस मिशन को अंजाम दिया. 

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इससे पहले 2011 में ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद जवाहिरी अल-कायदा का प्रमुख बना था. उसे अमेरिका में 11 सितंबर 2001 में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए आतंकी हमले का मास्टरमाइंड बताया जाता है. इस हमले में करीब 3 हजार लोग मारे गए थे. अमेरिका ने जवाहिरी पर 2.5 करोड़ डॉलर का इनाम रखा था. भारतीय रुपये में देखें तो ये राशि 196 करोड़ से भी ज्यादा होती है. अब सवाल है कि जवाहिरी के मारे जाने के बाद ये इनाम किसे मिलेगा. इसके लिए अमेरिकी सरकार के कुछ तय नियम हैं.

अमेरिका कैसे देता है इनाम?

अमेरिका ने आतंक के खिलाफ लड़ाई के लिए 1984 में एक कानून बनाया. इस कानून के तहत रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस (RFJ) प्रोगाम लाया गया. इसके तहत अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ किसी भी गतिविधि को रोकने के लिए इनाम की घोषणा करता है. फिर वो आतंकी गतिविधियों से जुड़ा हो, आतंकियों की पहचान करना हो या उसके ठिकाने की जानकारी देना हो, साइबर खतरे से जुड़ी कोई अहम जानकारी हो, इन सब की सूचना या टिप देने वाले को अमेरिकी सरकार इनाम देती है.

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इस इनाम की घोषणा विदेश मंत्रालय करता है. रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस की वेबसाइट के मुताबिक, ऐसी सूचना या टिप उसे ईमेल, सोशल मीडिया या दूसरे माध्यम से दी जा सकती है. 1984 के बाद से अब तक अमेरिका दुनियाभर में 125 लोगों को 25 करोड़ डॉलर का इनाम दे चुका है. हालांकि ओसामा बिन लादेन पर घोषित ढाई करोड़ डॉलर का इनाम किसी को नहीं मिला था, क्योंकि उसे अमेरिकी सेना ने ही ढूंढ कर मारा था. ऐसे में मुमकिन है अल जवाहिरी पर घोषित इनाम भी किसी को ना मिले. उसे भी अमेरिका ने अपनी एजेंसियों की मदद से ही मार गिराया है.

क्या जवाहिरी की टिप देने वाले की पहचान सामने आएगी?

अमेरिका ने जवाहिरी को मार गिराने के पूरे ऑपरेशन की जानकारी शेयर नहीं की है. अगर ऑपरेशन की डिटेल्स सामने आती भी हैं तो उन सूत्रों की पहचान सामने नहीं आएगी जिन्होंने जवाहिरी के ठिकाने का पता बताया हो. जिन लोगों को इनाम दिया जाता है उनकी जानकारी गोपनीय रखी जाती है. क्योंकि ऐसे मामलों में लोगों की जान को खतरा हो सकता है.

साल 1993 में भी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला हुआ था. इस हमले में शामिल रामजी युसेफ को फरवरी 1995 में पाकिस्तान से गिरफ्तार किया गया था. रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस के मुताबिक, युसेफ के ठिकाने की जानकारी देने वाले एक सूत्र को इनाम दिया गया गया था. इसके अलावा आतंकी अहमद अबु खट्टालाह की गिरफ्तारी की सूचना देने वाले को अमेरिका ने 30 लाख डॉलर का इनाम दिया था. अहमद अबु 2012 में लीबिया में अमेरिकी मिशन पर हमले का मास्टरमाइंड था. इसमें यूएस राजदूत समेत चार अमेरिकियों की मौत हुई थी.

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अल जवाहिरी की पहचान कैसे हुई?

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान से निकले थे. लेकिन इसके बाद से अमेरिका अल कायदा की अफगानिस्तान में मौजूदगी पर लगातार नजर बनाए था. अधिकारियों ने बताया कि जवाहिरी इसी साल अपने परिवार के साथ काबुल के सेफ हाउस में शिफ्ट हुआ था. कई महीनों की रेकी के बाद अमेरिका ने जवाहिरी के पहचान की पुष्टि की थी. अप्रैल की शुरुआत में अमेरिका के सीनियर अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई. फिर इसकी सूचना अमेरिकी एनएसए और राष्ट्रपति जो बाइडेन को भी दी गई थी.

अधिकारियों ने महीनों तक जवाहिरी की पूरी लाइफस्टाइल के पैटर्न की जानकारी जुटाई. ये जानकारी कई स्वतंत्र सूत्रों से हासिल की गई थी. अधिकारियों ने उस बिल्डिंग के कंस्ट्रक्शन की भी जांच की थी. रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 1 जुलाई को जो बाइडेन को वाइट हाउस में इस ऑपरेशन की पूरी जानकारी दी गई थी. इस मीटिंग में CIA के डायरेक्टर विलियम बर्न्स भी शामिल थे. 

इसके बाद 25 जुलाई को जो बाइडेन ने अपने कैबिनेट मेंबर्स और एडवाइजर्स को पूरे ऑपरेशन के बारे में जानकारी दी. जवाहिरी की मौत के बाद अमेरिका के तालिबान के साथ संबंधों और दूसरे मुद्दों पर भी चर्चा की गई थी. इसके बाद 30 जुलाई की रात 9 बजकर 48 मिनट पर जवाहिरी पर ड्रोन से मिसाइल दागा गया. अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी कहा कि जवाहिरी की मौत से 3 हजार लोगों के परिवारवालों को राहत मिलेगी.

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