The Lallantop

अखिलेश यादव के यूपी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने की बात पर सपा क्या बोली?

शिवपाल यादव के साथ चुनाव लड़ने के सवाल पर क्या बोले अखिलेश?

Advertisement
post-main-image
सपा प्रमुख अखिलेश यादव. (तस्वीर- पीटीआई)
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2021 से जुड़ी बड़ी खबर. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि वे अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में हिस्सा नहीं लेंगे. समाचार एजेंसी पीटीआई को इंटरव्यू देते हुए अखिलेश यादव ने ये जानकारी दी. साथ ही कहा कि चुनाव के लिए राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के साथ सपा का गठबंधन पक्का है, बस सीटों का बंटवारा तय होना बाकी है. वहीं, चाचा शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया (PSPL) के साथ चुनाव में उतरने के सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा,
"मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है. उन्हें (यानी शिवपाल यादव) और उनके लोगों को सम्मान दिया जाएगा."
अखिलेश यादव इस समय आजमगढ़ से सांसद हैं. उन्हें बेशक 2021 में होने वाले विधानसभा चुनावों में सपा का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार माना जा रहा था. लेकिन चुनाव नहीं लड़ने की बात कह कर अखिलेश यादव ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि अब सपा की तरफ से सीएम पद का दावेदार कौन होगा. हालांकि ये भी ध्यान रहे कि सीएम बनने के लिए अखिलेश यादव का MLA होना जरूरी नहीं है. अगर चुनाव में सपा की जीत हुई तो वे विधान परिषद की सदस्यता लेकर भी सीएम बन सकते हैं. बाकी चुनाव का परिणाम आने तक ऐसी तमाम अटकले और अनुमान लगाए जाते रहेंगे.

पार्टी क्या कह रही?

ये साफ नहीं है कि अखिलेश यादव ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला अपने मन से लिया है या पार्टी के लोगों से बातचीत करने के बाद. उनके बयान को लेकर सपा की मीडिया सेल के हेड आशीष यादव ने ट्विटर पर जो प्रतिक्रिया दी, उसे देखने के बाद अटकलों का सिलसिला और बढ़ने वाला है. पीटीआई के ट्वीट के आधे घंटे बाद आशीष यादव ने ट्विटर पर कहा,
"उत्तर प्रदेश से भाजपा होगी पूरी तरह साफ. उत्तर प्रदेश की जनता सपा के साथ. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी के विधानसभा चुनाव लड़ने का निर्णय पार्टी लेगी."
आजतक की खबर के मुताबिक सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने भी अखिलेश के चुनाव नहीं लड़ने की बात खंडन किया है. यानी सपा प्रमुख यूपी चुनाव लड़ेंगे या नहीं, इस पर अंतिम फैसला होना अभी बाकी है. 

'हार के डर से किया ऐलान'

ये हम नहीं कह रहे. सोशल मीडिया पर कई लोगों का कहना है कि अखिलेश यादव को पता है कि उनकी पार्टी यूपी चुनाव नहीं जीतने वाली, इसलिए वे पहले ही मैदान छोड़कर भाग रहे हैं. ट्विटर पर कई लोगों ने अखिलेश के ऐलान पर चुटकी ली है. आंदोलनजीवी आनंद नाम के ट्विटर हैंडल से कहा गया,
"जो डर गया समझो मर गया. जंग से पहले ही हार मान लिया जिन्ना का पुत्र."
  अनूप नाम के यूजर ने कहा,
"अखिलेश यादव ने तो लड़ाई शुरू होने से पहले ही हार मान ली."
कुछ ऐसी ही बात अरुण डोगरा ने कही.
"समय से पहले ही भाग खड़े हुए."
  चुनाव का परिणाम आने में तो अभी कुछ महीने बाकी हैं. लेकिन कुछ लोगों ने ये सवाल कर लिया है कि अगर अखिलेश चुनाव नहीं लड़ेंगे और सीएम नहीं बनेंगे तो फिर जीतने पर सपा किसे मुख्यमंत्री बनाएगी. जैसे डॉ. शिवांश सिंह चौहान ने पूछा,
"अगर आप जीत गए तो सीएम कौन बनेगा, डिंपल यादव?"
वहीं, कुछ का मानना है कि अखिलेश यादव ने ये बात कहकर कांग्रेस को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन दिया है. ट्विटर पर मुकेश भल्ला नाम के व्यक्ति ने कहा,
"ये कांग्रेस को इनडायरेक्ट सपोर्ट करने का तरीका है."
 

जिन्ना वाला मामला क्या है?

अखिलेश यादव ने चुनाव नहीं लड़ने की बात ऐसे समय में कही है जब वे मोहम्मद अली जिन्ना को लेकर दिए अपने बयान के लिए जबर्दस्त विरोध का सामना कर रहे हैं. एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने जिन्ना का नाम महात्मा गांधी, सरदार पटेल और जवाहरलाल नेहरू के साथ ले लिया. कहा कि गांधी, पटेल, नेहरू और जिन्ना एक ही संस्था से पढ़कर निकले और बैरिस्टर बने और देश को आजादी दिलाई. ये भी कहा कि इन लोगों को कैसा भी संघर्ष करना पड़ा हो, ये लोग उससे पीछे नहीं हटे. इसी को लेकर बीजेपी सपा प्रमुख पर हमलावर है. वो अखिलेश के बयान को उनका 'जिन्ना प्रेम' बता रही है. यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है,
"अखिलेश यादव ने जिन्ना के प्रति प्रेम जता के देश के विभाजन के समय करोड़ों लोगों के संघर्ष को ही नहीं बल्कि सरदार पटेल को भी अपमानित किया है."
वहीं यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अखिलेश का जिन्ना की तुलना सरदार पटेल से करना अत्यंत शर्मनाक है. योगी ने कहा कि सरदार पटेल भारत की एकता-अखंडता के आधार और शिल्पी हैं. उनके समकक्ष जिन्ना को रखकर अखिलेश यादव ने अपनी विभाजनकारी मानसिकता दिखाई है.

Advertisement
Advertisement