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'बीजेपी की वैक्सीन' बताकर विवादों में आए अखिलेश यादव ने अब नया बयान दिया है

वैक्सीन पर मायावती ने अखिलेश के उलट स्टैंड लिया है

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कोरोना वैक्सीन को लेकर मायावती और अखिलेश की राय अलग अलग सामने आई है . फोटो- PTI
3 जनवरी को DCGI यानी ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने कोरोना-19 की दो वैक्सीन के भारत में इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाजत दी. उसके बाद से ही बयानबाजी का सिलसिला शुरू चालू है. कांग्रेस के कुछ नेताओं ने वैक्सीन को जल्दबाजी में मंजूरी पर सवाल खड़े किए, तो समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे बीजेपी की वैक्सीन बताते हुए लगवाने से ही इंकार कर दिया. लेकिन उनके साथ कभी महागठबंधन का हिस्सा रहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने अलग ही लाइन ली है. अब अखिलेश ने अपने बयान पर बवाल के बाद सफाई दी है. मायावती ने कोरोना वैक्सीन के लेकर अपने ट्वीट में लिखा,
"अति-घातक कोरोना वायरस महामारी को लेकर आए स्वदेशी वैक्सीन (टीके) का स्वागत व वैज्ञानिकों को बहुत-बहुत बधाई. साथ ही, केन्द्र सरकार से विशेष अनुरोध भी है कि देश में सभी स्वास्थ्यकर्मियों के साथ-साथ सर्वसमाज के अति-गरीबों को भी इस टीके की मुफ्त व्यवस्था की जाए तो यह उचित होगा."
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पहले क्या कहा था? अखिलेश यादव ने 2 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस के मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा था,
“देखिए मैं तो नहीं लगवाऊंगा वैक्सीन. मैंने अपनी बात कह दी. और वो भी बीजेपी लगा रही है, उसका भरोसा करूंगा मैं? अरे जाओ भाई, अपनी सरकार आएगी तो सबको फ्री वैक्सीन लगाई जाएगी. हम बीजेपी की वैक्सीन नहीं लगवा सकते.”
अखिलेश यादव का अब एक नया बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने कहा है कि उनका सवाल वैज्ञानिकों और डॉक्टरों पर नहीं था बल्कि बीजेपी पर था. उन्होंने कहा कि उनका सवाल ये था कि गरीबों को वैक्सीन कब तक मिलेगी. उन्होंने ये भी कहा कि उनके बयान को पूरा नहीं दिखाया गया. सपा विधायक ने कहा था, नपुंसक न बना दें यूपी के मिर्जापुर में समाजवादी पार्टी के MLC आशुतोष सिन्‍हा ने मीडिया से बात करते हुए कहा था,
"अगर आदरणीय अखिलेश यादव जी ने इस बात को कहा है तो जरूर इसमें गंभीरता होगी. इस सरकार के तंत्र पर भरोसा नहीं किया जा सकता है. अगर वो (अखिलेश) नहीं लगवा रहे हैं तो उस वैक्सीन में ऐसी चीजें होंगी कि नुकसान हो जाए. बाद में कह दें कि जनसंख्या कम करने के लिए लगाई गई हैं वैक्सीन. नपुंसक बना दें. कुछ भी हो सकता है. केवल सपाई ही नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता को भी वैक्सीन नहीं लगवानी चाहिए."
समाजवादी पार्टी और बीजेपी आमने सामने कोरोना वैक्सीन को लेकर सपा का क्या स्टैंड है, इस बारे में हमने बात की पार्टी के प्रवक्ता नावेद सिद्दीकी से. उन्होंने फोन पर कहा,
"अखिलेश जी से दो दिनों से मेरी मुलाकात हुई नहीं है लेकिन उन्होंने कहा है तो जरूर कोई लॉजिक है. वो बिना लॉजिक वाली बातें करते नहीं हैं. अब हम ठोस सुबूत के साथ उतरेंगे मैदान में. कुछ तो है तभी वो चीज निकलकर आई है."
जहां समाजवादी पार्टी अपने नेता के बयान पर कायम दिख रही है, वहीं बीजेपी इसको मुद्दा बना रही है. बीजेपी प्रवक्ता डॉक्टर चंद्रमोहन ने कहा,
"सपा का बयान वोटबैंक की राजनीति है. ये वो लोग हैं जो कोरोना वॉरियर्स पर हमले के समय हमलावरों के साथ थे. ये सब भ्रम पैदा करने की कोशिश है लेकिन जनता भ्रमित नहीं होगी."
ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया का बयान ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के निदेशक वीजी सोमानी ने कोरोना वैक्सीन से खतरे को लेकर कहा कि इस बात में तनिक भी सच्चाई नहीं है. उन्होंने कहा,
“हम कभी भी ऐसा कुछ अप्रूव नहीं करेंगे जिस पर हमें सुरक्षा संबंधी चिंता हो. टीके 110% सुरक्षित हैं. बुखार, दर्द और एलर्जी जैसे कुछ दुष्प्रभाव हर टीके के लिए आम हैं. यह (कि लोग नपुंसक हो सकते हैं) पूरी तरह बकवास है.”
https://twitter.com/ANI/status/1345612111762735104 अब अखिलेश ने क्या कहा है? बीजेपी की वैक्सीन वाले बयान पर विवाद के बाद अखिलेश यादव ने सोमवार को सफाई दी. उन्होंने कहा कि
मेरा सवाल वैज्ञानिकों पर नही है, डॉक्टरों पर नही है. पूरा बयान दिखाइये मेरा. मेरा सवाल बीजेपी पर है. गरीबों को वैक्सीन कब तक मिलेगी? और मिलेगी तो फ्री मिलेगी या नहीं?  ये बड़ा सवाल है. बीजेपी पर मेरा भरोसा नही है.
मायावती और अखिलेश के बयानों पर अमर उजाला के पूर्व संपादक कुमार भवेश चंद्रा कहते हैं कि इसमें पहली बात ये है कि मायावती खुद को अखिलेश से अलग दिखाना चाहती हैं. मायावती ने सधा हुआ बयान दिया है. दूसरी बात ये है कि अखिलेश का बयान केवल विरोध करने के लिए है. ऐसे बयानों से उन्हें और उनकी पार्टी को नुकसान ही होगा. दो वैक्सीन के आपात इस्तेमाल को मिली मंजूरी बता दें कि DCGI ने दो वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की अनुमति दी है. सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन. DCGI के निदेशक वीजी सोमानी ने कहा कि Central Drugs Standard Control Organisation की subject expert committee ने 1 जनवरी को कोविशील्ड और 2 जनवरी को कोवैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की अनुमति देने की सिफारिश की थी. इस कमेटी में डॉक्टर और वैज्ञानिक शामिल थे. सोमानी ने कहा कि दोनों वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित हैं और इनका इस्तेमाल इमरजेंसी की स्थिति में किया जा सकेगा.

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