करे कोई भरे कोई. दंगों पर ये बात सही लगती है. हरियाणा के मेवात से शुरू हुई सांप्रदायिक हिंसा ने राज्य के दूसरे इलाकों के साथ लोगों के दिलो-दिमाग में भी खौफ भर दिया है. खबरें हैं कि इस डर के चलते वो पलायन को मजबूर हो रहे हैं. दंगे करने वालों में हिंदू-मुस्लिम थे. पलायन करने वालों में भी हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग शामिल हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अलग-अलग राज्यों से कामकाज के लिए आए लोग अब इलाके को छोड़कर जा रहे हैं.
'यहीं काम कर परिवार पाला, अब डर लग रहा, नूह छोड़ रहे लोग हिंदू हैं या मुस्लिम?
हिंसा वाले दिन के बाद से कई लोग पैदल ही पलायन कर इलाके से निकल गए हैं.


आजतक से जुड़े नीरज की रिपोर्ट के मुताबिक नूह में हुई हिंसा के बाद प्रशासन ने हालात पर काबू तो पा लिया है, लेकिन हिंसा की वजह से इलाके में दहशत बढ़ गई है. इसकी वजह से बड़ी संख्या में प्रवासी नूह से पलायन कर रहे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक इलाके से जा रहे लोगों का कहना है कि नूह के हालात अब रहने के लायक नहीं रहे. मध्य प्रदेश के रहने वाले जगदीश ने आजतक को बताया,
“पिछले कई महीनों से नूह में रह कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था, लेकिन अब डर लग रहा है.”
जगदीश की ही तरह उत्तर प्रदेश के राम अवतार भी नूह में अपने परिवार के साथ रह रहे थे. अब उन्हें भी इलाके में डर लग रहा है.
पश्चिम बंगाल की रहने वाली बमिशा खातून तीन साल से गुरुग्राम में रह रही हैं. वो यहां हाउस हेल्प का काम करती हैं. आजतक से बात करते हुए उन्होंने बताया,
“मुझे अपनी जान का डर है. इसलिए मैंने अपने घर जाने का फैसला किया है.”
बमिशा की तरह ही प्रवासी अहिला बीबी ने कहा कि वो अपनी जान जोखिम में नहीं डालना चाहती हैं, हालात सुधरने पर बाद वापस आएंगी.
रिपोर्ट के मुताबिक हिंसा वाले दिन के बाद से कई लोग पैदल ही पलायन कर इलाके से निकल गए हैं. हालांकि पुलिस-प्रशासन लगातार दावा कर रहा है कि हालात काबू में हैं. लेकिन इलाके के लोगों को अपनी सुरक्षा को लेकर कोई ठोस विश्वास नहीं मिल पा रहा है.
महिलाओं के साथ थे, तो लड़ाई क्यों करेंगे?हरियाणा हिंसा के बाद दो नाम चर्चा में आए. मोनू मानेसर और बिट्टू बजरंगी. दोनों के वीडियो वायरल हैं. हिंसा से पहले मोनू मानेसर ने धार्मिक यात्रा में शामिल होने का एलान किया था. लेकिन बाद में उसने इससे इनकार किया. वहीं बिट्टू बजरंगी ने कहा है कि वो लोग यात्रा में महिलाओं और बच्चों के साथ निकले थे, तो लड़ाई क्यों करेंगे?
आजतक से जुड़े राहुल गौतम के साथ बातचीत में बिट्टू बजरंगी ने बताया,
“हर साल की तरह इस साल भी शोभायात्रा निकाली गई. पूजा के बाद सबने खाना खाया. कीर्तन हुआ. हम वापस लौट रहे थे. काफिला 500 मीटर ही चला होगा. तभी हमने वहां देखा कि आगे हमारी कुछ बसों-गाड़ियों को आतताइयों ने आग के हवाले कर दिया. वहीं पास में एक मस्जिद थी. उनके पास करीब 250 हथियार थे जिनसे उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी.”
बिट्टू बजरंगी ने कहा कि उसे और उसके साथ मौजूद लोगों को महिलाओं और बच्चों की चिंता था, इसलिए यात्रा को वापस कर एक मंदिर में चले गए.
यात्रा में हथियार आने के सवाल पर बिट्टू ने कहा कि जो एकाध बंदूकें थीं, वो लाइसेंसी थीं. तलवारें ‘पूजा-पाठ और शादी’ वाली थीं. बिट्टू ने आगे कहा कि हम शांति से यात्रा पर गए थे.
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