
लोगों ने श्रुति को क्रिटिसाइज़ करना शुरू भी कर दिया है.
श्रुति ने बताया कि वो जब 18 साल की थीं, तब उनके साथ ऐसी घटना घटी थी. वो अपनी पहली कन्नड़ फिल्म के लिए एक मीटिंग करने गई थीं. वहां हुए इस अप्रिय अनुभव के बाद वो बेहद डर गई थीं. इतना कि रोने लग गई थीं. उन्होंने ये बात अपने कोरियोग्राफर को बताई. उसका रिएक्शन चौंकाने वाला था. उसने कहा, "अगर तुम इस चीज़ को हैंडल करना नहीं जानती हो, तो अभी के अभी ये काम छोड़ दो." श्रुति ने वो फिल्म नहीं की.
इसके चार साल बाद श्रुति के साथ एक और किस्सा घटा. उनकी एक कन्नड़ फिल्म के राईट्स एक तमिल प्रोड्यूसर ने खरीद लिए. उसकी इच्छा थी कि श्रुति अपने रोल में थोड़ा सा बदलाव करें. इस सिलसिले में उस प्रोड्यूसर ने श्रुति को फोन किया और बातचीत के दौरान कहा, "हम पांच लोग हैं. हम आपस में तुम्हें एक्सचेंज करते रहेंगे. जब भी हमारी मर्ज़ी होगी."
श्रुति कहती हैं कि उस वक़्त तक उन्हें ऐसी सिचुएशन हैंडल करना आ गया था. उन्होंने कहा कि वो चप्पल उतारकर धुन देगी. उसके बाद ये अफवाहें फैली कि श्रुति अजीब है और उनके साथ काम करना कठिन है. तबसे श्रुति को तमिल सिनेमा में अच्छे ऑफर्स मिलने बंद हो गए.

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में श्रुति हरिहरन.
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के स्टेज से श्रुति द्वारा ये राज़ खोलने के बाद कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री में हलचल है. कन्नड़ फिल्म चेंबर ऑफ़ कॉमर्स (KFCC) ने वादा किया है कि वो मामले की जांच करेंगे. साथ ही 'तब क्यों नहीं, अभी क्यों' वाला हथियार भी निकाल लिया है. KFCC के प्रेसिडेंट सारा गोविंदु ने कहा है कि श्रुति को ये बात बताने में दस साल क्यों लग गए? जांच का आश्वासन देते हुए उन्होंने कहा,
"हमें इसकी खबर न्यूज़ चैनल देखने के बाद चली. दस साल पहले हुई इस घटना के बारे में श्रुति पहले बता सकती थीं. सभी प्रोड्यूसर एक जैसे नहीं होते. पिछले 30 सालों से मैं खुद प्रोड्यूसर हूं. हम सब भाई-बहन की तरह रहते हैं. श्रुति फेमस होने के बाद ये सब बता रही हैं. ये देखकर नई आने वाली अभिनेत्रियों को गलत सिग्नल जाएगा. वो भी कामयाब होने तक सब छिपा के रखेंगी. हमारी जानकारी में ये पहला केस है. हम इसकी जांच करेंगे."गोविंदु जी का सवाल कोई नया नहीं है. हर मुल्क के हर विक्टिम से पहला सवाल ही ऐसा होता है जो घुमा-फिरा कर उसे ही कटघरे में खड़ा करता है.

सारा गोविंदु.
श्रुति हरिहरन साउथ का जाना-माना नाम है. 'लूसिया' और 'गोधी बन्ना' जैसी फिल्मों से उन्होंने अपनी पहचान बनाई. आजकल खुद प्रोड्यूसर बन गई हैं और मीनिंगफुल सिनेमा बनाना चाहती हैं. ऐसी फ़िल्में जो बदलाव ला सकें. उनका अपनी आपबीती सुनाना भी बदलाव की दिशा में एक कदम माना जा सकता है. हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया है.
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