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पड़ताल : क्या 2016 में हुए 84,734 रेप केस में 81,000 आरोपी मुसलमान हैं?

और बलात्कार की शिकार 90 फीसदी महिलाएं हिंदू हैं?

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सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि 2016 में कुल 84734 बलात्कार हुए हैं, जिनमें से 81 हजार बलात्कार मुस्लिमों ने किया है. ये दावा एनसीआरबी की रिपोर्ट के आधार पर किया गया है.
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक मैसेज खूब वायरल हो रहा है. इसमें कहा जा रहा है भारत में 95 फीसदी बलात्कार मुसलमान करते हैं. 2016 में कुल 84734 बलात्कार हुए हैं, जिनमें से 81 हजार बलात्कार मुस्लिमों ने किया है. ये भी कहा जा रहा है कि बलात्कार की शिकार 92 फीसदी महिलाएं हिंदू हैं. और लोग इन आंकड़ों के लिए नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो का हवाला दे रहे हैं. Untitled1 इसके अलावा कई पोस्ट में कहा जा रहा है कि जैसे-जैसे मुस्लिमों की संख्या बढ़ती जाएगी, बलात्कारों की संख्या बढ़ती जाएगी. Untitled2 कुछ लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि अफसोस है कि मुस्लिम बलात्कार कर रहे हैं, लेकिन हिंदू इस पोस्ट पर नज़र भी नहीं मारेंगे. Untitled3 ये भी लिखा जा रहा है कि मुस्लिम 18 फीसदी हैं और हिंदू 80 फीसदी. लेकिन इसके बाद भी देश में बलात्कार की शिकार 90 फीसदी हिंदू महिलाएं हैं. ncrb21 लेकिन ये सच नहीं है. हकीकत ये है कि इनमें से कोई भी आंकड़ा सच नहीं है. जिस नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के हवाले से ये आंकड़े बताए जा रहे हैं, वो पूरी तरह से गलत हैं. एनसीआरबी की ओर से 2016 के लिए जारी रिपोर्ट कहती है- 38,947 कुल बलात्कार के केस दर्ज हुए 2016 में 39,068 पीड़ित थे इन दर्ज हुए केस में 36,770 केस रेप के थे कुल दर्ज मुकदमे में 2167 केस दर्ज हुए थे गैंगरेप के 5729 रेप की कोशिश के मामले दर्ज हुए 2016 में 5732 महिलाओं के साथ हुई रेप की कोशिश साल 2016 में 489 वारदात कुकर्म की कोशिश की हुई 493 लोगों के साथ हुई कुकर्म की कोशिश 3,25,652 वारदात महिलाओं पर हुए हत्याचार की. 3,29,067 महिलाएं हुईं शिकार 2016 में अलग-अलग वारदात की (इनमें हत्या, लूट, चोरी, डकैती जैसे वारदात शामिल नहीं हैं) 6289 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है. तो पहली बात ये है कि सोशल मीडिया पर बलात्कार का जो आंकड़ा चल रहा है, वो पूरी तरह से फर्जी है. 2016 में बलात्कार के कुल 38947 केस दर्ज हुए थे. दूसरी बात ये है कि सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि 90 फीसदी पीड़ित महिलाएं हिंदू हैं और आरोपी मुसलमान. इस बात में भी कोई सच्चाई नहीं है. ऐसा इसलिए है कि एनसीआरबी कभी भी धर्म आधारित आंकड़ा जारी नहीं करता है. एनसीआरबी की रिपोर्ट ये तो बताती है कि पीड़ित की उम्र क्या है, आरोपियों की उम्र क्या है, पीड़िता और आरोपी का संबंध क्या है, कितने आरोपी करीबी रिश्तेदार हैं. इस बात की पुष्टि खुद एनसीआरबी के पीआरओ ने की है. ncrb इसके अलावा एनसीआरबी शहर, राज्य, अपराध की प्रकृति और उसपर लगने वाली भारतीय दंड संहिता की धाराएं बताता है. एनसीआरबी ये भी बताता है कि पीड़ित और आरोपी पुरुष हैं या फिर महिला, पीड़ित और आरोपी बड़े शहरों के हैं या फिर कस्बों के लेकिन वो जाति और धर्म के आधार पर कभी भी आंकड़े जारी नहीं करता है. एनसीआरबी शेड्यूल कास्ट और शेड्यूल ट्राइब के साथ हुए अपराधों के बारे में भी एनसीआरबी आंकड़े जारी करता है. लेकिन एनसीआरबी ये नहीं बताता है कि कितने आरोपी हिंदू हैं, कितने मुस्लिम या फिर ये नहीं बताता है कि कितने आरोपी राजपूत हैं, कितने ब्राह्मण, कायस्थ या फिर किसी और जाति के. ncrb data इसलिए अफवाहों से बचिए. खास तौर से सोशल मीडिया पर जो भी चल रहा है, उनपर आंखमूंद कर भरोसा मत करिए. अगर कोई कह रहा है कि ये आंकड़ा एनसीआरबी का है, तो एनसीआरबी की वेबसाइट पर जाइए और खुद ही फैक्ट चेक करिए. किसी के कहे में मत आइए क्योंकि ऐसी ही बच्चा चोरी की एक अफवाह की वजह से देश में एक दिन में कुल 29 लोगों को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था.
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