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क्या ये विवेकानंद की असली आवाज़ हैः शिकागो विश्व-धर्म संसद (1893) में उनके भाषण का ऑडियो

उन्नीसवीं सदी के आखिर में स्वामी विवेकानंद ने अपने इसी भाषण से पूरी दुनिया का परिचय हिन्दू धर्म और भारतीय वेदांत परंपरा से करवाया था. 1863 में कलकत्ता में जन्मे विवेकानंद 4 जुलाई 1902 को सिर्फ 39 की उम्र में गुज़र गए. उनकी याद.

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दूसरे धर्मों पर अपनी श्रेष्ठता महसूस करने का अवसर भारत में हिंदुओं को दो लोगों ने सबसे ज्यादा दिया.

मनोज कुमार ने 1970 में आई फिल्म ‘पूरब और पश्चिम’ के उस दृश्य में, जब लंदन में गोरों और प्रवासी भारतीयों के बीच क्लब में घूमती टेबल पर बैठकर उनका किरदार भारत गाता है – “जब ज़ीरो दिया मेरे भारत ने, दुनिया को तब गिनती आई”.

और एक स्वामी विवेकानंद ने 11 सितंबर 1893 को शिकागो की विश्व धर्म संसद में, जहां उन्होंने अपने ऐतिहासिक भाषण की शुरुआत “अमेरिका की मेरी बहनों और भाइयों” के संबोधन से की.

बीते करीब 124 वर्षों से विवेकानंद के इस पूरे भाषण की जनमानस में गजब की स्थापना रही है. लेकिन प्रशंसकों ने इस भाषण को या तो पढ़ा है या इसकी किंवदंतियों में खोए रहे हैं कि कैसे पश्चिमी लोगों को तब इस भाषण ने अवाक कर दिया था. लेकिन इंटरनेट पर ऐसे ऑडियो भी मिलते हैं जिनमें विवेकानंद का ये भाषण सुना जा सकता है, और कहा जाता है कि ये विवेकानंद की ही आवाज़ है. जैसे इस ऑडियो मेंः

लेकिन क्या सच में ये आवाज स्वामी विवेकानंद की ही है?

कुछ बातें सामने आती हैं जिनके मुताबिक ये आवाज विवेकानंद की नहीं है और ये शिकागो भाषण की रिकॉर्डिंग नहीं है.

1. विस्तृत शोध और जांचों के बाद मालूम होता है कि सितंबर 1893 में शिकागो में आयोजित धर्म संसद में प्रतिभागियों के भाषणों को रिकॉर्ड ही नहीं किया गया था. बेलूर मठ में जनवरी 1994 में यात्रा पर आई एक शोधकर्ता मैरी लुइज़ बर्क ने कहा था कि उनकी खुद की खोज और उस काल पर पकड़ रखने वाले दो अमेरिकी इतिहासकारों के मुताबिक स्वामी जी के भाषण को रिकॉर्ड नहीं किया गया था.

2. इंटरनेट पर मौजूद जिस आवाज और भाषण को विवेकानंद का बताया जा रहा है उसे खुद रामकृष्ण मिशन के लोग ही फर्जी मानते हैं जिसे विवेकानंद ने ही स्थापित किया था.

शिकागो में विश्व धर्म संसद में बाकी सब प्रतिभागियों के बीच बैठे विवेकानंद, इनसेट में भी. (फोटोः हिंदुइज़्म टुडे)
शिकागो में विश्व धर्म संसद में बाकी सब प्रतिभागियों के बीच बैठे विवेकानंद, इनसेट में भी. (फोटोः हिंदुइज़्म टुडे)

3. शिकागो भाषण के ऑडियो में सुनाई देता है कि एक महिला सबसे पहले माइक पर आकर अगले वक्ता का परिचय देती है और उसके बाद विवेकानंद बोलना शुरू करते हैं. जबकि असल में शिकागो के असली इवेंट में विवेकानंद का परिचय माइक पर मिस्टर बैरोज़ ने दिया था न कि किसी महिला ने. खुद विवेकानंद ने 2 नवंबर 1893 को अपने एक प्रशंसक को लिखे एक पत्र में ऐसा बताया था.

4. ये भी बताया जाता है कि तब इन भाषणों को यूं दर्ज करने की तकनीक भी नहीं थी.

5. ऐसा नहीं है कि विवेकानंद की कोई आवाज कभी कैद हुई नहीं थी. उन्होंने विदेश में कुछ रिकॉर्डिंग की थीं जिन्हें उन्होंने भारत भेजा था. 1892 और 1897 में मैसूर पैलेस और अंबाला में इन्हें दर्ज किया गया था लेकिन आज वो ऑ़डियो खो चुके हैं.


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Voice of Swami Vivekananda from his 1893 Chicago Speech: But is it real?

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