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दूर देश से किए ये 25 ट्वीट और वीडियो आपको ठिठक कर अपनी मां की तरफ़ देखने पर मजबूर कर देंगे

इलाज कराने भले ही चीन चले जाना पर कभी भारत मत जाना, उनके पास दिल नहीं होता: टोबी

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टोबी भारत आए थे, अपनी मां के साथ लेकिन जब वापस अपने देश गए तो अकेले थे

सोशल मीडिया पर नाइजीरिया के टोबी मार्शल का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इमोशनल वीडियो है, जिसमें एक नाइजीरियन नागरिक टोबी अपनी मां के साथ अस्पताल में हैं. लेकिन इस वीडियो की पूरी कहानी इसी वीडियो के साथ हुए कुल पच्चीस ट्वीट से सामने आती है.

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ये ट्वीट 17 अप्रैल को @tobi_marshal_ हैंडल से हुए. और इन ट्वीट्स से जो कहानी सामने आ रही है वो बेहद हौलनाक और शर्मनाक है. टोबी का कहना है कि उनकी मां को पिछले पांच साल से कमर में दर्द रहता था. दवा और थेरेपी चल रही थी. जून 2018 में पता चला कि उन्हें Degenerative Lumber Canal Stenosis है. आसान भाषा में कहें तो - रीढ़ की हड्डी में बड़ी दिक्कत है. टोबी की मानें तो उनकी मां के डाईबिटीज़ और हाइपरटेंशन के बारे में अस्पताल को मालूम था, और उन्होंने सर्जरी का ख़र्च ज़्यादा से ज़्यादा 10 हज़ार डॉलर बताया था. लेकिन भारत पहुंचने पर कुछ मेडिकल दिक्कतों का हवाला देकर सर्जरी का ख़र्च दोगुना कर दिया गया, जबकि भारत आने से पहले एमआरआई और एक्स-रे रिपोर्ट अस्पताल के पास थी और इसी आधार पर सर्जरी का ख़र्च बताया गया था. टोबी ने दोगुनी फ़ीस यानि 20 हज़ार डॉलर जमा भी कर दी. टोबी ने पांच महीने भारत में बिताए, और इस दौरान उन्हें कई ऐसे नाइजीरिया के लोग मिले जिन्हें कभी न कभी इसी दिक्कत से गुज़रना पड़ा. बहरहाल 4 दिसंबर, 2018 को टोबी की मां की सर्जरी हुई और 8 दिसंबर, 2018 को वो अस्पताल से डिस्चार्ज कर दी गईं. लेकिन 14 दिसंबर, 2018 को उन्हें बीमारी की हालत में वापस उसी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. अस्पताल ने फिर से पैसा मांगा, जो टोबी ने देने से मना कर दिया और अस्पताल ने मां को घर रख कर इलाज कराने की सलाह दी. 1 लाख भारतीय रुपया लगभग 5 लाख नाईजीरियन मुद्रा के बराबर चल रहा है. इस हिसाब से एक महीने तक टोबी हर दिन मेडिकल बिल में लाखों नाइरा (नाईजीरियन मुद्रा) ख़र्च करते रहे, और मां की याददाश्त जाती रही. 13 अप्रैल 2019 को दोबारा भर्ती हुईं. 14 अप्रैल को शरीर के कई हिस्से ख़राब होने की वजह से टोबी की मां नहीं रहीं. टोबी का अस्पताल में अपनी मां के साथ यही वीडियो वायरल हो रहा है और भारत समेत दुनिया भर से लोग मेडिकल भ्रष्टाचार और सिस्टम पर गुस्सा निकाल रहे हैं. टोबी इस मेडिकल भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ भारत में एक वकील से भी मिले, वकील ने कहा- मेडिकल अनदेखी के टोबी इकलौते शिकार नहीं हैं, ऐसा कई बार हो चुका है. टोबी निराश होकर वापस नाइजीरिया चले गए. और आख़िर में टोबी ने जो कहा वो भारत के लिए ऐसा नुकसान है जिसे कोई हवा-हवाई विदेश नीति और विदेश दौरा दुरुस्त नहीं कर सकता. टोबी ने कहा वो असल में दुनिया भर को एक सलाह है कि-
इलाज कराने भले ही चीन चले जाना पर कभी भारत मत जाना, उनके पास दिल नहीं होता.
ये सारी स्टोरी हमने टोबी के ट्वीट्स के आधार पर की है और ज़्यादातर चीज़ें उनका निजी फर्स्ट हैंड एक्सपीरियंस है. हमने बेंगलुरु के मनिपाल अस्पताल से इस बारे में बात करने के लिए लगातार संपर्क करने की कोशिश की. मामले की तह तक जाने के लिए हमने उलब्ध एक और इमरजेंसी नंबर-  +80 2222 1111 पर संपर्क किया. लेडी ने हमें रिसेप्शन में ट्रांसफर किया. रिसेप्शन में जिस लेडी ने कॉल उठाया उसे बहुत समझाने और लगभग 5 मिनट बात करने के दौरान भी कोई ठोस बात निकलकर नहीं सामने आई. अस्पताल का पक्ष जाने बिना हम ये ख़बर करना नहीं चाहते थे, और अस्पताल सफ़ाई दे नहीं रहा था. या फिर ऐसा करने में वो टेक्निकली अक्षम था. जो भी हो इसके चक्कर में हमने स्टोरी पूरी लिखने के बावजूद पब्लिश नहीं की थी. ये बायस्ड हो जाना कहलाता. अब जब इसी मामले पर डेक्कन हेरॉल्ड भी स्टोरी कर चुका है और इसमें अस्पताल का पक्ष भी है तो हम वो भी आपको पढ़वा देते हैं. डेक्कन के अनुसार मणिपाल अस्पताल के क्षेत्रीय मुख्य परिचालन अधिकारी डॉ. दीपक वेणुगोपाल ने अस्पताल का पक्ष रखा है. और अस्पताल ने जो सफ़ाई दी वो कुछ इस तरह है-
अस्पताल ने उन्हें सबसे बेहतरीन इलाज उपलब्ध करवाया. इस पूरी प्रक्रिया में परिवार ने भी सहयोग किया. इस बात का भी ध्यान रखा गया कि ये परिवार भारत में एक विदेशी की हैसियत से आया था. मरीज़ को सभी ज़रूरी इलाज मुहैया कराने में किसी तरह पैसों की दिक्कत सामने नहीं आई. दूसरी बार भर्ती होने के बाद आर्थिक तौर पर परिवार/मरीज़ का पूरा ध्यान रखा गया.
इस मुद्दे पर कौन गलत है, कौन सही इसका निर्णय आपको खुद लेना चाहिए, हमें यकीन है कि आप ऐसा कर सकने में पूरी तरह सक्षम हैं.
वीडियो देखें:-

भारत के प्रवेशद्वार 'गेटवे ऑफ़ इंडिया' पर मौजूद लोग क्या बोले?

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