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क्लास 10 की गायब 42,000 एग्जाम कॉपियां जहां मिलीं, जानकर सन्न रह जाएंगे

बिहार में इसी के चक्कर में रुका हुआ है 10वीं का रिजल्ट.

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बिहार में गायब 42000 कॉपियां मिल गई हैं.
बिहार में एक जिला है गोपालगंज. यहां पड़ता है एसएम गर्ल्स स्कूल कॉलेज. 19 जून को यहां कांड हो गया था. पता चला कि यहां के स्ट्रॉन्ग रूम में रखीं 42 हजार कॉपियां चोरी हो गई हैं. ये वो कॉपियां थीं जिनपर बच्चों ने एग्जाम दिया था. अपना भविष्य लिखा था, मगर उनका भविष्य गायब कर दिया गया था. नकल के लिए पहले से बदनाम बिहार बोर्ड के लिए ये और बड़ा झटका था. पटना पुलिस ने मामले में यहां के प्रिंसिपल प्रमोद कुमार श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर लिया. बताया जाता है कि इसी कारण ही बिहार बोर्ड को 20 जून को आने वाला रिजल्ट एक हफ्ते के लिए टालना पड़ा. अब इस मामले में नया और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है.
बिहार में नकल की ये फोटो तो सबको याद ही होगी.
बिहार में नकल की ये फोटो तो सबको याद ही होगी.

खुलासा ये कि इन सारी गायब कॉपियों का पता चल गया है. पुलिस ने इस मामले में एक स्क्रैप डीलर(आसान भाषा में कबाड़ी) और एक ऑटो ड्राइवर को गिरफ्तार किया है. इन लोगों ने कबूला है कि इन्होंने ही ये सारी कॉपियां खरीदी थीं. उन्होंने बताया कि ये कॉपी उन्हें स्कूल के चपरासी छट्टू सिंह ने बेची थीं. कीमत सुनके तो आपका दिमाग चकरा जाएगा. ये लाखों में नहीं है. मात्र 8 हजार रुपये में 42000 बच्चों का भविष्य दांव पर लगा दिया गया था. पता चला है किताब बेंचने में अकेले छट्टू ही नहीं शामिल था, बल्कि नाइट में ड्यूटी करने वाले गार्ड्स और एक मास्टर साहब शामिल थे. ये मास्टर साहब हैं प्रमोद श्रीवास्तव. वहीं जिन्हें पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था. अब इन सभी को पुलिस ने जेल भेज दिया है.
क्या इस साल भी गड़बड़ी की साजिश?
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि कॉपियां ऐसे गायब हुई हों. मगर इतनी बड़ी तादाद में गायब होना चौंकाने वाला है. इन गायब कॉपियों पर विवाद इसलिए भी खड़ा होता है क्योंकि पिछले साल भी इसी तरह से कॉपियां गायब करवाके लोगों को बढ़ा-चढ़ाकर नंबर बांटे गए थे. ये तो कुछ भी नहीं, जिन रूबी और गणेश ने पिछले साल टॉप मारा था, उनकी भी कॉपियां ऐसे ही गायब करवा दी गई थीं. इसे लेकर काफी विवाद हुआ था. ऐसे में सवाल खड़ा होता है क्या इस साल भी टॉपर ऐसे ही फर्जीवाड़े से बनवाने की तैयारी बिहार बोर्ड में की गई है. साफ तौर पर दिखता है कि नीतीश सरकार इस नकल माफिया से निपटने में कितनी कारगर रही है.
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खुला कैसे मामला
बिहार बोर्ड ने इस बार टॉपर्स को लेकर विवाद न हो. इसके लिए खास तैयारी की थी. रिजल्ट के पहले टॉपर्स की दोबारा कॉपियां चेक करवाई जा रही थीं. इसके लिए बोर्ड ने 67 कर्मचारियों की टीम को 38 जिलों के मूल्यांकन केन्द्र पर 15 जून को भेजा था. इन्हीं कर्मचारियों में से सुजीत कुमार व अन्य एसएस गर्ल्स प्लस टू स्कूल पहुंचे थे. उन्होंने प्रिंसिपल से 12 कॉपियां मांगी थीं, लेकिन प्रिंसिपल इन 12 कॉपियों में से तीन कॉपियां उपलब्ध नहीं करा पाए. अगले दिन यानी 16 जून को कॉपियों की खोजबीन शुरू हुई तो पता चला कि हिन्दी के 13 बैग, एनएलएच के तीन बैग, उर्दू का एक बैग, अंग्रेजी के 14 बैग, एससी के 115 बैग, मैथ्स के 16 बैग व एसएससी के 50 बैग समेत 213 बैग उत्तरपुस्तिकाएं व एडवांस मैथ्स की 61 व इकोनॉमिक्स की 44 उत्तरपुस्तिकाएं गायब हैं. इसके बाद ही ये मामला सामने आया.


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