2002 से 2006 तक तो बीटी कपास की वजह से किसानों को फायदा हुआ. पहले कपास का उत्पादन 300 किग्रा प्रति हेक्टेयर होता था, जो बीटी के आने के बाद से 474 किग्रा प्रति हेक्टेयर हो गई. इसमें और भी इजाफा हुआ और 2006-07 के दौरान इसके उत्पादन में 554.39 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई. वक्त आगे बढ़ा और 2012-13 में इसका उत्पादन घटकर 488.89 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रह गया.
वजह तो चौंकाने वाली है

जब इसकी वजह तलाशनी शुरू हुई तो पता चला कि बीटी कपास के बीज में भी कीड़े लगने लगे हैं. किसानों के लिए इसका सबसे आसान उपाय था कीटनाशक का छिड़काव. उन्होंने छिड़काव शुरू किया. उन्हें फायदा नजर आया तो कीटनाशक का उपयोग और भी बढ़ गया. इस साल भी कपास में कीड़े लगे, जिसके लिए किसानों ने प्रोफेक्स सुपर नाम का कीटनाशक इस्तेमाल करना शुरू किया. लेकिन इस कीटनाशक से फसल के कीड़े मरे या नहीं, ये देखने के लिए किसान जिंदा ही नहीं बचे. जो बचे, वो अस्पताल में भर्ती हैं और जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं. कुछ किसानों की रोशनी चली गई है तो कुछ किसान इलाज के लिए पैसे न होने की वजह से दम तोड़ रहे हैं.
बढ़ता जा रहा है आंकड़ा
कीटनाशक की वजह से पहली मौत 9 अगस्त को दर्ज की गई. तब से अब तक इस कीटनाशक ने 34 किसानों की जान ले ली है. इनमें से अकेले यवतमाल में 20, नागपुर में सात, अकोला में छह और अमरावती में एक किसान की मौत हो चुकी है.इसके अलावा 800 से अधिक किसान अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं. 25 किसान ऐसे सामने आए हैं, जिनको इस कीटनाशक की वजह से दिखना बंद हो चुका है.
क्या है ये कीटनाशक, जिसने जान-माल का इतना नुकसान किया है

राज्य सरकार ने कीटनाशक बनाने वाली कंपनी पर केस दर्ज कर लिया है.
कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो प्रोफेक्स सुपर दो कीटनाशकों प्रोफेनोफोस और साइपरमेथ्रिन का मिश्रण है. आम तौर पर अलग-अलग होने पर ये दोनों फसलों के कीड़ों को तो मार देते हैं, लेकिन इंसान को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं. शरीर के ढके न होने पर ये दोनों त्वचा से जुड़ी परेशानी कर सकते हैं. मात्रा ज्यादा होने पर सिर में दर्द और आंखों में जलन तक हो सकती है. लेकिन दोनों को मिलाकर जब कीटनाशक तैयार किया जाता है, तो ये ज्यादा घातक हो जाता है. ऐसे में यह इंसानों के लिए भी खतरनाक हो जाता है.
बचाव के उपाय नहीं किए, इसलिए भी बड़ा हुआ हादसा

कीटनाशक के छिड़काव के दौरान किसानों ने सुरक्षा के एहतियात नहीं बरते, इसलिए भी हादसा बड़ा हो गया.
कीटनाशक हमेशा ही खतरनाक होता है. इसकी मात्रा कम हो या ज्यादा, नुकसान तो करता ही है. ऐसे में पूरी दुनिया के किसानों को सलाह दी जाती है कि कीटनाशक के छिड़काव से पहले पूरे शरीर को ढक लिया जाए. मुंह पर मास्क लगा होना चाहिए और छिड़काव करने वाले को एप्रन पहन लेना चाहिए. इसके अलाव हाथों में ग्लव्स और पैरों में जूते भी बेहद जरूरी हैं और इनके बिना किसी भी हाल में दवा का छिड़काव नहीं किया जाना चाहिए. इसके अलावा अगर इंसान के शरीर में कहीं कटा-फटा हो या कोई जख्म हो तो उसे दवा का छिड़काव नहीं करना चाहिए.
राज्य सरकार ने किया है मुआवजे का ऐलान

मुख्यमंंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मृतकों के घरवालों को 2-2 लाख रुपये देने का ऐलान किया है.
किसानों की मौत के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मृतक किसानों के घर वालों को दो-दो लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है. इसके अलावा पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं. सरकार की ओर से कीटनाशक कंपनी पर केस भी दर्ज करवा दिया गया है. इसके अलावा राज्य के सभी कृषि सेवा केंद्रों और दुकानों को निर्देश दिए गए हैं कि बिना सुरक्षा किट के कोई भी कीटनाशक किसानों को न बेचा जाए. हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने भी सरकार और दवा बनाने वाली कंपनी को नोटिस जारी किया है.
9 अधिकारियों को नोटिस

सरकार की ओर से अलग-अलग विभागों के अधिकारियों से10 दिनों में जवाब तलब किया गया है.
राज्य कृषि आयुक्त ने भी मान लिया है कि कीटनाशकों की वजह से ही किसानों की मौत हुई है. आयुक्त ने ये भी मान लिया है कि कीटनाशकों की वजह से किसान बीमार पड़े और इलाज के दौरान उनकी मौत हुई, इसके बाद भी संबंधित विभाग के अधिकारियों ने कृषि विभाग के नियमों का पालन नहीं किया. इसके बाद पुणे स्थित राज्य कृषि मुख्यालय ने कृषि विभाग, जिला परिषद विभाग और संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है. इसके तहत कृषि विकास अधिकारी, जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी, प्रभारी जिला आरोग्य अधिकारी, जिला शल्य चिकित्सक, प्राथमिक आरोग्य अधिकारी, पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी, प्रादेशिक वन अधिकारी, पशुशल्य चिकित्सक और गुट विकास अधिकारी को नोटिस जारी कर 10 दिनों के अंदर जवाब मांगा है.
अब ये अधिकारी क्या जवाब देंगे, शायद सबको पता है. एक विभाग अपनी जिम्मेदारी दूसरे विभाग पर टाल देगा देगा या फिर सरकार थोड़ी सख्ती दिखाएगी तो किसी अधिकारी या कुछ अधिकारियों को सस्पेंड कर देगी. इससे ज्यादा क्या. पीछे छूट गई हैं 34 मौतें, बिना रोशनी के 25 किसानों की आंखें और 800 किसान और उनके परिवार के लोगों का अस्पताल में ठीक होने का इंतजार.अगर अब भी सरकार थोड़ा सा ध्यान दे तो किसानों की आने वाली नस्लों को सुविधाएं दी जा सकेंगी और उनके भविष्य को सुधारा जा सकेगा, ताकि ऐसे हादसों से बचा जा सके.
देखिए आज का लल्लनटॉप बुलेटिन
ये भी पढ़ें:
नरेंद्र मोदी दिल्ली में गांववालों के लिए बोले हैं, पढ़ लो क्या बोले हैं
मध्यप्रदेश: क्या सच में किसानों के कपड़े उतरवाकर उन्हें पीटा गया?
सीकर ग्राउंड रिपोर्ट: 'सरकार को घुटनों पर ला दिया, जरूरत पड़ी तो मुंह के बल गिरा देंगे'













