ये कहानी बस एक बच्चे की नहीं है. इस अस्पताल में 25 से 28 अक्टूबर के बीच 72 घंटों में 18 बच्चों की मौत हो चुकी है. 27 से 28 अक्टूबर यानी कुल 24 घंटे में इस अस्पताल में 9 बच्चों की मौत हो चुकी है. मरने वालों में पांच बच्चे लुनावाड़ा, सुरेंदरनगर, मनसा, विरमगाम और हिम्मतनगर के अलग-अलग अस्पतालों से लाए गए थे, जबकि चार बच्चे इसी अस्पताल में पैदा हुए थे. अस्पताल प्रशासन कह रहा है कि लाए गए बच्चे और यहां पैदा हुए बच्चे सभी गंभीर रूप से बीमार थे और उनकी मौत अस्वाभाविक नहीं है. अस्पताल प्रशासन के मुताबिक -
"बाहर से लाए गए और यहां पैदा हुए बच्चों का वजन 1.1 किलो के करीब का था. सामान्य तौर पर किसी नवजात का वजन 2.5 किलो होना चाहिए. इन बच्चों को एस्फिक्सिया, एक्स्ट्रीम प्रीटर्म बर्थ एस्फिक्सिया और मेकोनियम एस्पिरेशन सिंड्रोम जैसी बीमारियां थीं. घटना के समय सभी डॉक्टर्स और नर्स नियोनैटल इंटेन्सिव केयर यूनिट में अपनी ड्यूटी पर थे."

24 घंटे में अस्पताल में 9 बच्चे दम तोड़ चुके हैं. (सांकेतिक तस्वीर)
वहीं बच्चों के घरवालों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं. उनका कहना है -
"अहमदाबाद का सिविल अस्पताल गुजरात के बच्चों के लिए अंतिम रेफरल सेंटर है. यानी यहां पर बच्चों के लिए पूरे प्रदेश में सबसे बेहतर सुविधाएं मौजूद हैं. अस्पताल 100 बेड का है, जिसमें बच्चों से जुड़ी हर बीमारी का इलाज किया जाता है. फिर भी यहां मौत हुई है, तो इसके पीछे अस्पताल प्रशासन की लापरवाही ही है."
कांग्रेस ने लगाए आरोप
गुजरात में चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद से ही राजनीति चरम पर है. बच्चों की मौत होने के मामले को कांग्रेस ने भी लड़ाई के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल ने ट्वीट कर कहा है कि गुजरात सरकार को इसके लिए जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार या तो ये स्वीकार करे कि डॉक्टरों ने लापरवाही की या ये माने कि उनकी माताएं कुपोषित थीं.कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी ट्वीट कर गुजरात सरकार पर सवाल खड़े किए हैं.
अस्पताल ने बिठाई जांच

अहमदाबाद के इस सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं मौजूद हैं.
24 घंटे में 9 बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और उसने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यों की कमेटी बना दी. इस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. आरके दीक्षित ने कहा कि इस अस्पताल में अच्छी से अच्छी सुविधाएं मौजूद हैं. इतने बच्चों की मौत क्यों हुई, इसकी जांच वो 29 अक्टूबर तक कर लेंगे.
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