उस बच्ची का नाम मधु था.

बच्ची का परिवार
आगे बढ़ने से पहले चार बातें याद कर लीजिए: 'स्वच्छ भारत' का नारा मोदी जी ने दिया था. झारखंड में बीजेपी की सरकार है. मरकच्चो इलाके के जिस भगवतीडीह गांव में ये घटना हुई, उस गांव का नाम 'खुले में शौच की आदत से मुक्त गांव' की फेहरिस्त में शामिल है. सरकारी आंकड़ों में नत्थी कागजातों में एक पर्चा इसका भी है. याद रखने लायक एक और बात. कोडरमा जिले की इसी पंचायत में यहां के डीसी ने 'गढ्ढा खोदो आंदोलन' शुरू किया था. ताकि गांव को खुले में शौच की आदत से आजाद कर दिया जाए.

ऐसी खबरें पढ़कर लगता है कि क्या स्वच्छ भारत मिशन के प्रचार पर जितना खर्च हो रहा है, उतना जमीन पर काम करवाने में खर्च किया जा रहा है?
'घर में शौचालय होता, तो बेटी बच जाती' मधु का परिवार रुआंसा है. कहता है, घर में शौचालय होता तो बेटी को शौच के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता. बाहर न जाती, तो कुत्ते न खाते उसको. मधु की मौत शायद और ज्यादा दर्दनाक हो सकती थी. मगर भला हो उन बच्चों का, जो वहीं पास से गुजर रहे थे. क्रिकेट खेलने जा रहे थे. उन्होंने कुत्तों को खदेड़ा. पर तब तक देर हो चुकी थी. मधु मर चुकी थी. इत्तला मिलने पर पुलिस आई. कार्रवाई किसके खिलाफ करे? शिकायत किसके खिलाफ दर्ज हो? बहुत सोचा गया और आवारा कुत्तों के नाम शिकायत दर्ज हुई.
सरकार ने मुआवजा दे दिया है, इससे ज्यादा क्या करेगी! सरकार ने अपना काम कर दिया है. मुआवजे का ऐलान करके. एक लाख रुपये मधु के परिवारवालों को थमा दिए जाएंगे. शायद इससे वो अपने लिए नई बेटी 'खरीद' सकें. ऐसे मामलों में मुआवजा देते समय सरकार ये ही तो सोचती होगी शायद. कि मरने वाला पैसे पाकर जी उठेगा. खैर. भाषण क्या देना? बस जाते-जाते बता दूं कि सरकारी फाइलों के अंदर गांव का शौचालय बिल्कुल टंच तैयार है. एकदम फर्स्ट क्लास. ऐसी कई फाइलें और होंगी. ऐसे कई गांव और होंगे. 'ऐसी कई और मौतें हो सकती हैं', जैसा क्रूर सच कहने की हमारी हिम्मत नहीं. इस एक मौत से ही कलेजा भारी हो गया है.
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