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देश में 12 औद्योगिक स्मार्ट शहर बनेंगे, 10 लाख लोगों को रोजगार, सरकार ने प्रोजेक्ट को मंजूरी दी

ये इंडस्ट्रियल एरिया उत्तराखंड के खुरपिया, पंजाब के राजपुरा-पटियाला, महाराष्ट्र के दिघी, केरल के पलक्कड़, यूपी के आगरा और प्रयागराज, बिहार के गया, तेलंगाना के जहीराबाद, आंध्र प्रदेश के ओरवाकल और कोप्पर्थी और राजस्थान के जोधपुर-पाली में बनाए जाएंगे.

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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि परियोजना से 1 लाख 52 हजार करोड़ रुपये के निवेश होने का अनुमान है. (फोटो- PTI)

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश भर में 12 औद्योगिक स्मार्ट शहर बनाने की परियोजना को मंजूरी दी है. ये स्मार्ट शहर 10 राज्यों में बनेंगे और इसके लिए 6 इंडस्ट्रियल कॉरिडोर्स बनाए जाएंगे. केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इन स्मार्ट शहरों के लिए 28 हजार 602 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं. उन्होंने बताया कि इस परियोजना से लगभग 10 लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है. इन शहरों का विकास नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम (NICDP) के तहत किया जाएगा.

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28 अगस्त को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद अश्विनी वैष्णव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा कि औद्योगिक स्मार्ट सिटी परियोजना से 1 लाख 52 हजार करोड़ रुपये के निवेश होने का अनुमान है. साथ ही करीब 9 लाख 39 हजार प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद भी लगाई जा रही है. इसके अलावा, वैष्णव ने बताया कि इस योजना से 30 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है.

ये 10 औद्योगिक स्मार्ट शहर कौन से होंगे? केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, ये इंडस्ट्रियल एरिया उत्तराखंड के खुरपिया, पंजाब के राजपुरा-पटियाला, महाराष्ट्र के दिघी, केरल के पलक्कड़, यूपी के आगरा और प्रयागराज, बिहार के गया, तेलंगाना के जहीराबाद, आंध्र प्रदेश के ओरवाकल और कोप्पर्थी और राजस्थान के जोधपुर-पाली में बनाए जाएंगे.

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अश्विनी वैष्णव ने उन 6 औद्योगिक कॉरिडोर का भी नाम लिया, जो इस योजना के तहत बनने वाले हैं. इनमें अमृतसर-कोलकाता, दिल्ली-मुंबई, विजाग-चेन्नई, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-नागपुर और चेन्नई-बेंगलुरु कॉरिडोर शामिल हैं.

सरकार की घोषणा में मुख्य बातें क्या रहीं, जानिए-

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-  स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट: नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम (NICDP) को बड़े उद्योगों और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) दोनों से निवेश के जरिये एक बढ़िया इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम बनाया जाएगा. इससे 2030 तक 2 ट्रिलियन डॉलर (167 लाख करोड़) के निर्यात का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगा. ये सरकार के आत्मनिर्भर और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारत के दृष्टिकोण को दर्शाता है.

- स्मार्ट सिटी और मॉडर्न इन्फ्रास्ट्रक्चर: नए औद्योगिक शहरों को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के ग्रीनफील्ड स्मार्ट शहरों के रूप में डेवलप किया जाएगा. इन्हें 'प्लग-एन-प्ले' और 'वॉक-टू-वर्क' के कॉन्सेप्ट पर बनाया जाएगा. इससे ये सुनिश्चित होगा कि ये शहरें एडवांस इन्फ्रास्ट्रक्चर से लैस हैं.

- PM गतिशक्ति पर एरिया अप्रोच: PM GatiShakti नेशनल मास्टर प्लान के मुताबिक, परियोजनाओं में मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा होगी. इससे लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की बिना रोक-टोक के आवाजाही सुनिश्चित होगी. इंडस्ट्रियल शहरों को पूरे इलाके में बदलाव के लिए विकास केंद्र के रूप में देखा जाएगा.

- 'विकसित भारत' के लिए विजन: इन परियोजनाओं की मंजूरी 'विकसित भारत' के विजन को साकार करने की दिशा में एक कदम है. भारत को Global Value Chains (GVC) में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करके NICDP, तत्काल आवंटन के लिए तैयार जमीन उपलब्ध कराएगा. इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करना आसान हो जाएगा.

वीडियो: अश्विनी वैष्णव ने रेलवे वैकेंसी कम करने की क्या वजह बताई ?

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