59 साल की आइडा सीकमैन नर्स का काम करती थी. आम औरत, आम ज़िंदगी. फिर आई एक तारीख. एक रात सीकमैन सोकर उठीं और सब कुछ बदल चुका था. सीकमैन का घर एक बंटवारे की दहलीज बन गया था. मने जिस बिल्डिंग में सीकमैन रहती थी, वो एक देश में थी और उसका दरवाजा दूसरे देश में खुलता था. हालांकि ये व्यवस्था नई नहीं थी. नया ये हुआ था कि देश के हाकिमों ने एक दीवार खड़ी करने का ऐलान कर दिया था. इस पार से उस पार कोई नहीं जा सकेगा. सीकमैन का घर ठीक सीमा के बीचों-बीच था. लिहाज़ा उसके दरवाजे सील कर दिए गए. लोग दूसरी तरफ जाने के लिए कुछ भी करने को तैयार थे. एक रास्ता ढूंढा गया. बिल्डिंग के नीचे कुछ लोग चादर फैलाकर खड़े हो गए. जिसमें कूदकर लोग दूसरी तरफ जा सकते थे. सीकमैन का घर चौथे माले पर था. कूदना मुश्किल था. ऊपर से उनकी उम्र ज्यादा थी. उन्होंने तीन दिन इंतजार किया. लेकिन फिर और इंतज़ार न कर पाई. उस पार पहुंचने की जद्दोजहद में उन्होंने अपना सामान खिड़की से बाहर फेंका और फिर खुद भी कूद गई. चादर फैलाई हुई थी लेकिन वो काम ना आई. सीकमैन का सिर जमीन से टकराया. और उनकी मौत हो गई. पूरा किस्सा जानने के लिए देखें वीडियो.
तारीख: बर्लिन वॉल क्यों बनी और कैसे गिरी जर्मनी की दीवार?
बिल्डिंग के नीचे कुछ लोग चादर फैलाकर खड़े हो गए. जिसमें कूदकर लोग दूसरी तरफ जा सकते थे. सीकमैन का घर चौथे माले पर था. कूदना मुश्किल था. ऊपर से उनकी उम्र ज्यादा थी. उन्होंने तीन दिन इंतजार किया...
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