देशभर में इस समय या तो होली का माहौल है या चुनाव का. लेकिन राजधानी दिल्ली से करीब 1225 किलोमीटर दूर लोकतंत्र का रंग कुछ अलहदा दिख रहा है. मांगें उठ रही हैं, अनशन हो रहे हैं. मांग- पहचान के संरक्षण की, एक संवैधानिक दर्जे की. आप कहेंगे कि अगर मांग संवैधानिक है, तो पूरी हो जानी चाहिए. लेकिन क्या सब कुछ इतना ही संरेखीय है? आज बात विस्तार से लद्दाख की. बात सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल की. छठी अनुसूची की, जनजातियों की और हिमालय की. नमस्कार, सौरभ द्विवेदी नाम है हमारा और आप देखना शुरू कर चुके हैं दि लल्लनटॉप शो.
दी लल्लनटॉप शो: सोनम वांगचुक 15 दिन से भूख हड़ताल पर क्यों?
संगठन और वांगचुक क्या चाहते हैं?
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