2013 का अगस्त. पटना के एक सरकारी दफ़्तर में इंटेलीजेंट ब्यूरो की गोपनीय मीटिंग चल रही है. मीटिंग रूम का फोन बजता है. उधर से एक भरोसेमंद मुख़बिर की आवाज़, “यासीन भटकल नेपाल में है.” मीटिंग रूम में सरसराहट तारी होती है. ये बड़ा, बहुत बड़ा इनपुट था. भारत के मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों में शुमार यासीन भटकल को ठिकाने लगाने का मौका मिला था.उसकी एक फोटो भी आती है. दाढ़ी बढ़ा ली थी इसलिए चेहरा फोटो से मैच नहीं हो रहा था. लेकिन आंखें, आंखें. आंखें साहब झूठ नहीं बोलती हैं, राज़ सारे खोलती हैं. आंखें वैसी ही थीं, जैसी तस्वीर में थीं. स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी SOG के 5 अफ़सर पर्यटक बनकर नेपाल पहुंचते हैं. नेपाल पुलिस के साथ मिलकर न सिर्फ यासीन भटकल को धर दबोचते हैं बल्कि अल-कायदा के आतंकी असदुल्लाह उर्फ ‘हड्डी' भी गिरफ्त में आ जाता है.ये जो दो आतंकी थे, ये तो दो कठपुतलियां मात्र थे. एक बड़ी साज़िश की पटकथा लिखी गई थी कराची में. पटकथा का नाम था “द कराची प्रोजेक्ट.” था इस मास्टरप्लान में? कौन था इसके पीछे? इसका भंडाफोड़ कैसे हुआ? और भारतीय एजेंसियों ने कैसे इस प्लान को काउंटर किया, कैसे इसका करारा जवाब दिया? जानने के लिए देखें पूरा वीडियो.
आसान भाषा में: 'कराची प्रोजेक्ट' जिसने हिंदुस्तान के कई शहरों को हिलाकर रख दिया
SOG के 5 अफ़सर नेपाल पुलिस के साथ मिलकर न सिर्फ यासीन भटकल को धर दबोचते हैं बल्कि अल-कायदा के आतंकी असदुल्लाह उर्फ ‘हड्डी' भी गिरफ्त में आ जाता है.
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